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अलीगढ़: 13 साल पुराने गोलीकांड में दो भाइयों को सात-सात साल की सजा, 22 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया
Thu, 24 Sep 2026 03:27 PM IST
Chaman Kumar Sharma
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Thu, 24 Sep 2026 03:27 PM IST
सार
अलीगढ़ की अपर सत्र न्यायालय ने 13 साल पुराने गांधीपार्क गोलीकांड में फैसला सुनाया। अदालत ने दो दोषी भाइयों नीरज वार्ष्णेय और कुशल वार्ष्णेय को 7-7 साल के कारावास की सजा दी। दोनों आरोपियों पर कुल 22 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया, जिसमें से आधी राशि पीड़ित को मिलेगी।
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कोर्ट (प्रतीकात्मक फोटो)
- फोटो : एएनआई
विस्तार
अलीगढ़ के गांधीपार्क थाना क्षेत्र में करीब 13 साल पुराने गोलीकांड के मामले में फैसला आया है। अपर सत्र न्यायाधीश तोष कुमार शर्मा की अदालत ने आरोपी दो भाइयों नीरज वार्ष्णेय और कुशल वार्ष्णेय को दोषी ठहराया है। अदालत ने उन्हें सात-सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है।
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अदालत ने दोनों पर कुल 22 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। मामले में एक आरोपी की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो चुकी है।अभियोजन के अनुसार, 12 मई 2013 को गांधीपार्क थाना क्षेत्र निवासी वादी मुकेश शर्मा ने पुलिस को तहरीर दी थी। आरोप था कि शाम करीब सात बजे तीनों भाई नीरज वार्ष्णेय, कुशल वार्ष्णेय और देवेंद्र वार्ष्णेय उसके घर पहुंचे। आरोपियों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। वादी के बेटे ललित और भुवनेश ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन तीनों ने जान से मारने की नीयत से फायरिंग कर दी। घटना में ललित गंभीर रूप से घायल हुआ था।
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पुलिस ने मामले में नीरज वार्ष्णेय, कुशल वार्ष्णेय और देवेंद्र वार्ष्णेय के खिलाफ 307, 504 भारतीय दंड संहिता की धाराओं में केस दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान देवेंद्र वार्ष्णेय की 26 नवंबर 2025 को मृत्यु हो गई, जिसके चलते उसके खिलाफ मुकदमे की कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
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अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान और चिकित्सकीय रिपोर्ट समेत अन्य दस्तावेजों के आधार पर नीरज वार्ष्णेय और कुशल वार्ष्णेय को दोषी माना। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत ने आदेश दिया कि अधिरोपित कुल 22 हजार रुपये की धनराशि में से आधी राशि वादी को तथा आधी राज्य कोष में जमा की जाए।