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एशियन पैरा गेम्स: मां की तस्वीर लेकर मैदान पर उतरे रिंकू हुड्डा, आखिरी थ्रो में गोल्ड जीतकर भावुक हुए; वीडियो
Mon, 19 Oct 2026 09:54 PM IST
मयंक त्रिपाठी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया
Published by: मयंक त्रिपाठी
Updated Mon, 19 Oct 2026 09:54 PM IST
सार
भारत के पैरा जैवलिन थ्रोअर रिंकू हुड्डा ने मां को खोने के गम और कंधे की चोट से जूझने के बावजूद पुरुषों की भाला फेंक एफ46 स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। फाइनल थ्रो में 65.11 मीटर भाला फेंककर उन्होंने हमवतन अजीत सिंह यादव को पीछे छोड़ दिया।
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रिंकू हुड्डा
- फोटो : PCI (Insta-videograb)
विस्तार
जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय पैरा एथलीट रिंकू हुड्डा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों की जैवलिन थ्रो एफ46 स्पर्धा में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। हालांकि, इस ऐतिहासिक जीत के पीछे उनकी कड़ी मेहनत के साथ मां को खोने का गहरा दर्द भी छिपा था। गोल्ड मेडल जीतने के बाद रिंकू ने अपनी मां की तस्वीर हाथ में उठाकर उन्हें भावुक श्रद्धांजलि दी। तस्वीर पर लिखा संदेश था- लव यू, मां।
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पिछले महीने हुआ था निधन
रिंकू के लिए यह जीत इसलिए भी खास रही, क्योंकि उन्होंने पिछले महीने अपनी मां को खो दिया था। मां के निधन के बाद वह एशियन पैरा गेम्स में हिस्सा लेने पहुंचे थे। व्यक्तिगत दुख और चोट के कारण उनकी तैयारी भी प्रभावित हुई, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतकर अपनी मां को समर्पित किया।
रिंकू के लिए यह जीत इसलिए भी खास रही, क्योंकि उन्होंने पिछले महीने अपनी मां को खो दिया था। मां के निधन के बाद वह एशियन पैरा गेम्स में हिस्सा लेने पहुंचे थे। व्यक्तिगत दुख और चोट के कारण उनकी तैयारी भी प्रभावित हुई, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतकर अपनी मां को समर्पित किया।
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मां की तस्वीर लेकर पहुंचे थे रिंकू
रिंकू हुड्डा ने अपनी मां की याद को इस खास मौके पर अपने साथ रखा। फाइनल मुकाबले में उतरने से पहले वह अपनी मां की तस्वीर को करीब लेकर मैदान पर पहुंचे। गोल्ड मेडल जीतने के बाद उन्होंने तस्वीर को दर्शकों की ओर उठाकर अपनी सफलता के पीछे मां की प्रेरणा को याद किया। रिंकू ने बताया कि उन्होंने जीत के बाद मां को श्रद्धांजलि देने की योजना पहले ही बना ली थी। इसी वजह से वह उनकी तस्वीर अपने साथ नागोया लेकर आए थे। उन्होंने रेवस्पोर्ट्ज से बातचीत में कहा, 'मैंने पहले से ही इसकी योजना बनाई थी, इसलिए मां की तस्वीर अपने साथ लेकर आया था। मैं इस बार कुछ अलग करना चाहता था और मुझे खुशी है कि यह वैसा ही हुआ, जैसा मैंने सोचा था।'
रिंकू हुड्डा ने अपनी मां की याद को इस खास मौके पर अपने साथ रखा। फाइनल मुकाबले में उतरने से पहले वह अपनी मां की तस्वीर को करीब लेकर मैदान पर पहुंचे। गोल्ड मेडल जीतने के बाद उन्होंने तस्वीर को दर्शकों की ओर उठाकर अपनी सफलता के पीछे मां की प्रेरणा को याद किया। रिंकू ने बताया कि उन्होंने जीत के बाद मां को श्रद्धांजलि देने की योजना पहले ही बना ली थी। इसी वजह से वह उनकी तस्वीर अपने साथ नागोया लेकर आए थे। उन्होंने रेवस्पोर्ट्ज से बातचीत में कहा, 'मैंने पहले से ही इसकी योजना बनाई थी, इसलिए मां की तस्वीर अपने साथ लेकर आया था। मैं इस बार कुछ अलग करना चाहता था और मुझे खुशी है कि यह वैसा ही हुआ, जैसा मैंने सोचा था।'
2018 में कांस्य, 2022 में रजत और अब जीता स्वर्ण
- रिंकू हुड्डा ने एशियन पैरा गेम्स में अपने पदकों का सफर भी पूरा कर लिया। उन्होंने 2018 में कांस्य पदक जीता था, जबकि 2022 के संस्करण में उनके खाते में रजत पदक आया था। अब 2026 में गोल्ड मेडल जीतकर उन्होंने पदकों का रंग बदलने का सिलसिला पूरा किया।
- इस बार रिंकू का सफर आसान नहीं रहा। उनकी मां का 8 अगस्त को निधन हो गया था। इसके बाद जब उन्होंने दोबारा अभ्यास शुरू किया, तो कंधे में दर्द की समस्या सामने आ गई। इस वजह से उन्हें 15 से 20 दिनों तक पूरी तरह आराम करना पड़ा और ऊपरी शरीर की कसरत से भी दूर रहना पड़ा।
- रिंकू ने एएनआई से बातचीत में बताया कि पिछले डेढ़ से दो महीने उनके लिए काफी मुश्किल रहे। इस दौरान उन्होंने अपनी फिटनेस बनाए रखने के लिए दौड़ने और जिम में हल्के अभ्यास का सहारा लिया।
- उन्होंने कहा, '2018 में मैंने कांस्य जीता था, 2022 में रजत और आज स्वर्ण पदक जीता है। इसके पीछे काफी तैयारी थी, लेकिन मां के निधन के बाद मैं ज्यादा ट्रेनिंग नहीं कर पाया। जब अभ्यास शुरू किया, तो कंधे में दर्द होने लगा और मुझे 15 से 20 दिन पूरी तरह आराम करना पड़ा।'
रिंकू और अजीत
- फोटो : Twitter
आखिरी थ्रो में पलटी बाजी, अजीत सिंह को पछाड़ा
पुरुषों की भाला फेंक एफ46 स्पर्धा में भारत के रिंकू हुड्डा और अजीत सिंह यादव के बीच स्वर्ण पदक के लिए कड़ी टक्कर देखने को मिली। दोनों भारतीय खिलाड़ी बाकी प्रतिस्पर्धियों से आगे रहे। इंडोनेशिया के आर. सक्त्योनो ने कांस्य पदक जीता। मुकाबले में अजीत सिंह यादव ने अपने चौथे प्रयास में 65.02 मीटर का थ्रो करके बढ़त हासिल कर ली थी। दूसरी ओर, रिंकू ने 56.17 मीटर के थ्रो से शुरुआत की और जल्द ही 60 मीटर का आंकड़ा पार कर लिया। इसके बावजूद वह अजीत से पीछे चल रहे थे। ऐसा लग रहा था कि रिंकू को रजत पदक से संतोष करना पड़ेगा, लेकिन आखिरी प्रयास में उन्होंने कमाल कर दिया। रिंकू ने 65.11 मीटर का शानदार थ्रो किया और अजीत के 65.02 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को पीछे छोड़ते हुए स्वर्ण पदक जीत लिया।
पुरुषों की भाला फेंक एफ46 स्पर्धा में भारत के रिंकू हुड्डा और अजीत सिंह यादव के बीच स्वर्ण पदक के लिए कड़ी टक्कर देखने को मिली। दोनों भारतीय खिलाड़ी बाकी प्रतिस्पर्धियों से आगे रहे। इंडोनेशिया के आर. सक्त्योनो ने कांस्य पदक जीता। मुकाबले में अजीत सिंह यादव ने अपने चौथे प्रयास में 65.02 मीटर का थ्रो करके बढ़त हासिल कर ली थी। दूसरी ओर, रिंकू ने 56.17 मीटर के थ्रो से शुरुआत की और जल्द ही 60 मीटर का आंकड़ा पार कर लिया। इसके बावजूद वह अजीत से पीछे चल रहे थे। ऐसा लग रहा था कि रिंकू को रजत पदक से संतोष करना पड़ेगा, लेकिन आखिरी प्रयास में उन्होंने कमाल कर दिया। रिंकू ने 65.11 मीटर का शानदार थ्रो किया और अजीत के 65.02 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को पीछे छोड़ते हुए स्वर्ण पदक जीत लिया।
मां को समर्पित किए अपने सभी पदक
रिंकू हुड्डा ने कहा कि वह अपने इस पदक को अपनी मां को समर्पित करना चाहते हैं और भविष्य में भी जो पदक जीतेंगे, वे सभी मां की याद को समर्पित होंगे। उन्होंने कहा, 'मैं यह पदक अपनी मां को समर्पित करना चाहता हूं। भविष्य में भी मैं जो पदक जीतूंगा, वे सभी अपनी मां को समर्पित करूंगा।'
रिंकू हुड्डा ने कहा कि वह अपने इस पदक को अपनी मां को समर्पित करना चाहते हैं और भविष्य में भी जो पदक जीतेंगे, वे सभी मां की याद को समर्पित होंगे। उन्होंने कहा, 'मैं यह पदक अपनी मां को समर्पित करना चाहता हूं। भविष्य में भी मैं जो पदक जीतूंगा, वे सभी अपनी मां को समर्पित करूंगा।'
रिंकू और अजीत
- फोटो : IANS
अब विश्व चैंपियनशिप और लॉस एंजिलिस पैरालंपिक पर नजर
एशियन पैरा गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने के बाद रिंकू हुड्डा का अगला लक्ष्य विश्व चैंपियनशिप है। हालांकि, उनका सबसे बड़ा सपना 2028 में लॉस एंजिलिस में होने वाले पैरालंपिक खेलों में पदक जीतना है। रिंकू ने बताया कि वह एक-दो महीने आराम करने के बाद नए सत्र की तैयारी शुरू करेंगे। उनका लक्ष्य आने वाली प्रतियोगिताओं में अपने प्रदर्शन को और बेहतर बनाना है।
2022 एशियन पैरा गेम्स में भारत ने इस स्पर्धा में तीनों पदक जीते थे। उस समय सुंदर सिंह गुर्जर ने 68.60 मीटर के विश्व रिकॉर्ड थ्रो के साथ स्वर्ण, रिंकू हुड्डा ने 67.08 मीटर के साथ रजत और अजीत सिंह यादव ने 63.52 मीटर के साथ कांस्य पदक हासिल किया था। एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारत ने शुरुआती दिन शानदार प्रदर्शन करते हुए 11 पदक जीते, जिनमें चार स्वर्ण, पांच रजत और दो कांस्य पदक शामिल रहे। भारतीय दल पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा।
एशियन पैरा गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने के बाद रिंकू हुड्डा का अगला लक्ष्य विश्व चैंपियनशिप है। हालांकि, उनका सबसे बड़ा सपना 2028 में लॉस एंजिलिस में होने वाले पैरालंपिक खेलों में पदक जीतना है। रिंकू ने बताया कि वह एक-दो महीने आराम करने के बाद नए सत्र की तैयारी शुरू करेंगे। उनका लक्ष्य आने वाली प्रतियोगिताओं में अपने प्रदर्शन को और बेहतर बनाना है।
2022 एशियन पैरा गेम्स में भारत ने इस स्पर्धा में तीनों पदक जीते थे। उस समय सुंदर सिंह गुर्जर ने 68.60 मीटर के विश्व रिकॉर्ड थ्रो के साथ स्वर्ण, रिंकू हुड्डा ने 67.08 मीटर के साथ रजत और अजीत सिंह यादव ने 63.52 मीटर के साथ कांस्य पदक हासिल किया था। एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारत ने शुरुआती दिन शानदार प्रदर्शन करते हुए 11 पदक जीते, जिनमें चार स्वर्ण, पांच रजत और दो कांस्य पदक शामिल रहे। भारतीय दल पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा।