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रवि पुष्य नक्षत्र में अहोई अष्टमी कल, जानिए पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और तारों के निकलने का समय

Sat, 31 Oct 2026 06:24 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sat, 31 Oct 2026 06:24 PM IST
सार

01 नवंबर को अहोई अष्टमी है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं और अहोई माता की पूजा करती हैं, फिर शाम को तारों के निकलने पर दर्शन करते हुए व्रत पूरा करती हैं। 

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अहोई अष्टमी 2026 - फोटो : अमर उजाला AI

विस्तार
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01 नवंबर 2026 को अहोई अष्टमी का त्योहार है। हिंदू धर्म में अहोई अष्टमी के पर्व का विशेष महत्व होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है। अहोई अष्टमी पर माताएं संतान की लंबी आयु, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन महिलाएं सुबह से ही व्रत रखती हैं, फिर शाम के समय अहोई माता की पूजा होती है और तारों के निकलने पर अर्घ्य देकर व्रत खोलती है। आइए जानते हैं अहोई अष्टमी तिथि, पूजा मुहूर्त, चंद्रोदय और तारों के दर्शन का समय। 
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अहोई अष्टमी तिथि 2026
हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 1 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 51 मिनट पर होगी, वहीं अष्टमी तिथि  2 नवंबर को दोपहर 1 बजकर 10 पर होगी। ऐसे में अहोई अष्टमी 1 नवंबर को है। इस वर्ष अहोई अष्टमी पर रवि पुष्य नक्षत्र का संयोग बन रहा है। 
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अहोई अष्टमी 2026 पूजा शुभ मुहूर्त 
द्रिक पंचांग के अनुसार, अहोई अष्टमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त 5 बजकर 35 मिनट से शुरू होकर 6 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। 

अहोई अष्टमी पर तारों के दर्शन और चंद्रोदय का समय कब 
  • 01 नवंबर को चंद्रोदय का समय- रात 11 बजकर 39 मिनट पर।
  • तारों के निकलने का समय- शाम का समय- 6 बजे। 

अहोई अष्टमी 2026 पूजा विधि
हिंदू धर्म में अहोई अष्टमी का खास महत्व होता है। हर वर्ष यह त्योहार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इसमें माताएं संतान की लंबी आयु, अच्छी सेहत और उज्जवल भविष्य के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इस शाम के समय अहोई माता की पूजा होती है फिर तारों के निकलने पर दर्शन और चांद को अर्घ्य देकर व्रत पूरी करती हैं। अहोई अष्टमी की पूजा सूर्यास्त के बाद होती है। 
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अहोई अष्टमी पूजन सामग्री
-अहोई माता की पूजा
- लकड़ी की चौकी
- लाल कपड़ा
- कलश
-फूल, फल, माला, रोली, अक्षत, दीपक, धूप, नैवेद्य,फल और मिठाई।

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