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कोटपूतली: 28 साल पहले चाचा-भतीजे ने साथ पहनी थी वर्दी, अब एक साथ ली सेना से विदाई, गांव में हुआ भव्य स्वागत
Thu, 03 Sep 2026 11:59 PM IST
कोटपुतली ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटपूतली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटपूतली
Published by: कोटपुतली ब्यूरो
Updated Thu, 03 Sep 2026 11:59 PM IST
सार
कोटपूतली के चुरी गांव में करीब 28 साल पहले एक साथ सेना में भर्ती हुए सूबेदार रमेश चंद और लेफ्टिनेंट विक्रम सिंह ने 31 अगस्त को एक साथ सैन्य सेवा से सेवानिवृत्ति ली। गांव लौटने पर ग्रामीणों ने दोनों का भव्य स्वागत किया।
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सूबेदार चाचा और लेफ्टिनेंट भतीजे का गांव पहुंचने पर भव्य स्वागत
विस्तार
कोटपूतली। देश सेवा का जज्बा जब परिवार की परंपरा बन जाए तो उसकी मिसाल पीढ़ियों तक दी जाती है। कोटपूतली क्षेत्र के ग्राम चुरी में ऐसी ही गौरवशाली तस्वीर देखने को मिली। गांव के सगे चाचा-भतीजे ने करीब 28 वर्ष पहले एक साथ भारतीय सेना की वर्दी पहनी थी और अब 31 अगस्त को दोनों ने एक साथ सेना से सेवानिवृत्ति ली। बुधवार को जब दोनों सैन्य अधिकारी अपने पैतृक गांव पहुंचे तो ग्रामीणों ने भारत माता की जय और देशभक्ति के नारों के बीच उनका जोरदार स्वागत किया।
सूबेदार रमेश चंद और लेफ्टिनेंट विक्रम सिंह की यह कहानी इसलिए भी खास है, क्योंकि दोनों ने सेना में एक साथ कदम रखा और करीब तीन दशक तक देश की सेवा करने के बाद एक साथ सेवानिवृत्त हुए। विक्रम सिंह ने अपनी सैन्य सेवा के दौरान कारगिल युद्ध सहित ऑपरेशन सिंधु जैसे चुनौतीपूर्ण अभियानों में भी जिम्मेदारी निभाई। वहीं रमेश चंद ने विभिन्न स्थानों पर सैन्य सेवा करते हुए सूबेदार की रैंक तक पहुंचकर सेना से विदाई ली।
चाचा के साथ भतीजे ने भी थामी थी देशसेवा की राह
गांव चुरी निवासी ग्यारसीराम यादव के पुत्र रमेश चंद ने करीब 28 वर्ष पहले सेना में भर्ती होकर देश सेवा की शुरुआत की थी। इसके कुछ समय बाद रामजीलाल यादव के पुत्र विक्रम सिंह भी अपने चाचा के साथ सेना में शामिल हुए। दोनों ने लंबे सैन्य जीवन के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में अपनी सेवाएं दीं।
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विक्रम सिंह ने कारगिल युद्ध और ऑपरेशन सिंधु जैसे महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में अपनी जिम्मेदारी निभाई। सेना में उनकी उत्कृष्ट सेवाओं को देखते हुए इसी वर्ष स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उन्हें लेफ्टिनेंट के पद पर पदोन्नति मिली। वहीं रमेश चंद सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हुए। खास बात यह रही कि दोनों ने 31 अगस्त को नासिक आर्टिलरी सेंटर से एक साथ सैन्य सेवा को अलविदा कहा।
गांव पहुंचते ही गूंजे भारत माता के जयकारे
बुधवार को चाचा-भतीजे की जोड़ी के गांव पहुंचने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मुख्य बस स्टैंड पर एकत्र हो गए। दोनों के पहुंचते ही माहौल देशभक्ति से सराबोर हो गया। ग्रामीणों ने मालाएं पहनाकर और साफा बांधकर दोनों सैन्य अधिकारियों का सम्मान किया। इसके बाद डीजे पर देशभक्ति गीतों के साथ गांव में स्वागत रैली निकाली गई।
रैली में बड़ी संख्या में युवा और ग्रामीण शामिल हुए। भारत माता की जय और देशभक्ति के नारों से पूरा क्षेत्र गूंजता रहा। ग्रामीणों ने कहा कि एक ही परिवार के दो सदस्यों का एक साथ सेना में जाना और 28 वर्ष बाद एक साथ सेवानिवृत्त होकर लौटना पूरे गांव के लिए गौरव की बात है।
सबसे पहले शहीद स्मारक पहुंचकर दी श्रद्धांजलि
गांव में प्रवेश करने के बाद चाचा-भतीजे सबसे पहले निर्माणाधीन शहीद स्मारक पहुंचे। यहां उन्होंने शहीद मनोज कुमार यादव स्मारक पर पुष्प अर्पित कर शहीद को नमन किया और श्रद्धांजलि दी। सैन्य वर्दी में शहीद स्मारक पर शीश नवाते दोनों पूर्व सैन्य अधिकारियों का दृश्य भावुक करने वाला रहा।
इस मौके पर चुरी सहित कायमपुराबास, पंवाला-राजपूत, रामनगर, ढाणी राघवजी और आसपास के कई गांवों से लोग पहुंचे। ग्रामीणों ने दोनों सैन्य अधिकारियों की सेवाओं पर गर्व जताते हुए उनका सम्मान किया।
'सेना नौकरी नहीं, मां भारती की सेवा का संकल्प'
सेवानिवृत्ति समारोह में मुख्य अतिथि पूर्व राज्यमंत्री राजेंद्र सिंह यादव रहे। उन्होंने रमेश चंद और विक्रम सिंह का अभिनंदन करते हुए कहा कि ग्राम चुरी और कोटपूतली के लिए यह गौरव का क्षण है। एक ही परिवार के चाचा-भतीजे का एक साथ सेना में भर्ती होना, कठिन सैन्य अभियानों में देश की सेवा करना और 28 वर्ष बाद एक साथ सेवानिवृत्त होकर गांव लौटना अपने आप में अनूठी मिसाल है।
उन्होंने कहा कि रमेश चंद ने सूबेदार के रूप में और विक्रम सिंह ने कारगिल जैसे युद्ध में सेवा देने के साथ लेफ्टिनेंट के पद तक पहुंचकर क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने युवाओं से दोनों सैन्य अधिकारियों के जीवन से प्रेरणा लेने की अपील की। कहा कि सेना महज नौकरी नहीं, बल्कि मां भारती के चरणों में अपना सर्वस्व समर्पित करने का संकल्प है।
युवाओं से बोले- नशे से दूर रहें, सेना में जाएं
समारोह के दौरान दोनों सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों ने गांव के युवाओं से संवाद किया। उन्होंने युवाओं को नशे और अन्य सामाजिक बुराइयों से दूर रहने की सलाह दी। साथ ही अधिक से अधिक युवाओं से सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करने का आह्वान किया।
चाचा-भतीजे ने कहा कि देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए युवाओं को आगे आना चाहिए। उनकी 28 वर्ष की सैन्य सेवा और एक साथ सेवानिवृत्ति की कहानी इन दिनों पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि दोनों ने न केवल अपने माता-पिता और परिवार का नाम रोशन किया, बल्कि ग्राम चुरी और पूरे क्षेत्र को भी गौरवान्वित किया है।
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सूबेदार रमेश चंद और लेफ्टिनेंट विक्रम सिंह की यह कहानी इसलिए भी खास है, क्योंकि दोनों ने सेना में एक साथ कदम रखा और करीब तीन दशक तक देश की सेवा करने के बाद एक साथ सेवानिवृत्त हुए। विक्रम सिंह ने अपनी सैन्य सेवा के दौरान कारगिल युद्ध सहित ऑपरेशन सिंधु जैसे चुनौतीपूर्ण अभियानों में भी जिम्मेदारी निभाई। वहीं रमेश चंद ने विभिन्न स्थानों पर सैन्य सेवा करते हुए सूबेदार की रैंक तक पहुंचकर सेना से विदाई ली।
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चाचा के साथ भतीजे ने भी थामी थी देशसेवा की राह
गांव चुरी निवासी ग्यारसीराम यादव के पुत्र रमेश चंद ने करीब 28 वर्ष पहले सेना में भर्ती होकर देश सेवा की शुरुआत की थी। इसके कुछ समय बाद रामजीलाल यादव के पुत्र विक्रम सिंह भी अपने चाचा के साथ सेना में शामिल हुए। दोनों ने लंबे सैन्य जीवन के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में अपनी सेवाएं दीं।
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विक्रम सिंह ने कारगिल युद्ध और ऑपरेशन सिंधु जैसे महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में अपनी जिम्मेदारी निभाई। सेना में उनकी उत्कृष्ट सेवाओं को देखते हुए इसी वर्ष स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उन्हें लेफ्टिनेंट के पद पर पदोन्नति मिली। वहीं रमेश चंद सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हुए। खास बात यह रही कि दोनों ने 31 अगस्त को नासिक आर्टिलरी सेंटर से एक साथ सैन्य सेवा को अलविदा कहा।
गांव पहुंचते ही गूंजे भारत माता के जयकारे
बुधवार को चाचा-भतीजे की जोड़ी के गांव पहुंचने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मुख्य बस स्टैंड पर एकत्र हो गए। दोनों के पहुंचते ही माहौल देशभक्ति से सराबोर हो गया। ग्रामीणों ने मालाएं पहनाकर और साफा बांधकर दोनों सैन्य अधिकारियों का सम्मान किया। इसके बाद डीजे पर देशभक्ति गीतों के साथ गांव में स्वागत रैली निकाली गई।
रैली में बड़ी संख्या में युवा और ग्रामीण शामिल हुए। भारत माता की जय और देशभक्ति के नारों से पूरा क्षेत्र गूंजता रहा। ग्रामीणों ने कहा कि एक ही परिवार के दो सदस्यों का एक साथ सेना में जाना और 28 वर्ष बाद एक साथ सेवानिवृत्त होकर लौटना पूरे गांव के लिए गौरव की बात है।
सबसे पहले शहीद स्मारक पहुंचकर दी श्रद्धांजलि
गांव में प्रवेश करने के बाद चाचा-भतीजे सबसे पहले निर्माणाधीन शहीद स्मारक पहुंचे। यहां उन्होंने शहीद मनोज कुमार यादव स्मारक पर पुष्प अर्पित कर शहीद को नमन किया और श्रद्धांजलि दी। सैन्य वर्दी में शहीद स्मारक पर शीश नवाते दोनों पूर्व सैन्य अधिकारियों का दृश्य भावुक करने वाला रहा।
इस मौके पर चुरी सहित कायमपुराबास, पंवाला-राजपूत, रामनगर, ढाणी राघवजी और आसपास के कई गांवों से लोग पहुंचे। ग्रामीणों ने दोनों सैन्य अधिकारियों की सेवाओं पर गर्व जताते हुए उनका सम्मान किया।
'सेना नौकरी नहीं, मां भारती की सेवा का संकल्प'
सेवानिवृत्ति समारोह में मुख्य अतिथि पूर्व राज्यमंत्री राजेंद्र सिंह यादव रहे। उन्होंने रमेश चंद और विक्रम सिंह का अभिनंदन करते हुए कहा कि ग्राम चुरी और कोटपूतली के लिए यह गौरव का क्षण है। एक ही परिवार के चाचा-भतीजे का एक साथ सेना में भर्ती होना, कठिन सैन्य अभियानों में देश की सेवा करना और 28 वर्ष बाद एक साथ सेवानिवृत्त होकर गांव लौटना अपने आप में अनूठी मिसाल है।
उन्होंने कहा कि रमेश चंद ने सूबेदार के रूप में और विक्रम सिंह ने कारगिल जैसे युद्ध में सेवा देने के साथ लेफ्टिनेंट के पद तक पहुंचकर क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने युवाओं से दोनों सैन्य अधिकारियों के जीवन से प्रेरणा लेने की अपील की। कहा कि सेना महज नौकरी नहीं, बल्कि मां भारती के चरणों में अपना सर्वस्व समर्पित करने का संकल्प है।
युवाओं से बोले- नशे से दूर रहें, सेना में जाएं
समारोह के दौरान दोनों सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों ने गांव के युवाओं से संवाद किया। उन्होंने युवाओं को नशे और अन्य सामाजिक बुराइयों से दूर रहने की सलाह दी। साथ ही अधिक से अधिक युवाओं से सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करने का आह्वान किया।
चाचा-भतीजे ने कहा कि देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए युवाओं को आगे आना चाहिए। उनकी 28 वर्ष की सैन्य सेवा और एक साथ सेवानिवृत्ति की कहानी इन दिनों पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि दोनों ने न केवल अपने माता-पिता और परिवार का नाम रोशन किया, बल्कि ग्राम चुरी और पूरे क्षेत्र को भी गौरवान्वित किया है।

सूबेदार चाचा और लेफ्टिनेंट भतीजे का गांव पहुंचने पर भव्य स्वागत