फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Ajmer News ›   Jahan Betala 12 Year Old and Gaurav Jain IIT Engineer Leaves 18 Lakh Package Chooses Spiritual Life

राजस्थान: 12 साल के जहान लेंगे जैन दीक्षा, 24 साल के आईआईटी इंजीनियर ने भी 18 लाख की नौकरी छोड़ चुना वैराग्य

Mon, 12 Oct 2026 05:32 PM IST
प्रतीक पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, केकड़ी/बालोतरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, केकड़ी/बालोतरा Published by: प्रतीक पांडेय Updated Mon, 12 Oct 2026 05:32 PM IST
सार

राजस्थान से जुड़े दो युवाओं ने कम उम्र में सांसारिक जीवन से विरक्ति दिखाते हुए संयम और अध्यात्म का मार्ग चुना है। गुजरात के सूरत में रहने वाले 12 वर्षीय जहान बेताला दीक्षा ग्रहण करेंगे। वहीं, केकड़ी क्षेत्र के जूनिया गांव के 24 वर्षीय आईआईटी इंजीनियर गौरव जैन ने 18 लाख रुपये के सालाना पैकेज की नौकरी छोड़कर आजीवन ब्रह्मचर्य का व्रत धारण किया है।

विज्ञापन
Jahan Betala 12 Year Old and Gaurav Jain IIT Engineer Leaves 18 Lakh Package Chooses Spiritual Life
राजस्थान के दो युवकों ने अपनाया वैराग्य - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आज के दौर में जहां युवा पढ़ाई, करियर और आर्थिक सफलता को प्राथमिकता देते हैं, वहीं दो युवाओं ने कम उम्र में ही संयम और आध्यात्मिक जीवन का रास्ता चुना है। गुजरात के सूरत में रहने वाले 12 वर्षीय जहान बेताला ने जैन दीक्षा लेने का निर्णय किया है। राजस्थान के मूल निवासी जहान 18 जनवरी 2027 को लाडनूं स्थित जैन विश्व भारती परिसर में आचार्य श्री महाश्रमणजी से दीक्षा ग्रहण करेंगे। दूसरी ओर, राजस्थान के केकड़ी क्षेत्र के जूनिया गांव के 24 वर्षीय आईआईटी इंजीनियर गौरव जैन ने गुरुग्राम में 18 लाख रुपये के वार्षिक पैकेज वाली नौकरी छोड़कर आजीवन ब्रह्मचर्य का व्रत धारण किया है। उन्होंने अपने गुरु मुनिपुंगव श्री सुधासागरजी महाराज के संघ में शामिल होने का निर्णय लिया है।
विज्ञापन


12 साल की उम्र में जागा जहान के मन में वैराग्य
राजस्थान के बोरावड़ क्षेत्र के मूल निवासी प्रवीन बेताला और नताशा बेताला वर्तमान में गुजरात के सूरत शहर में रहते हैं। उनके बेटे जहान बेताला के मन में करीब 12 वर्ष की उम्र से ही त्याग और वैराग्य के भाव उत्पन्न होने लगे थे। परिवार के सदस्यों के अनुसार, जहान का रुझान धीरे-धीरे भौतिक वस्तुओं से दूर होकर धर्म और आध्यात्मिक साधना की ओर बढ़ने लगा। इसी सोच के चलते उन्होंने सांसारिक जीवन का त्याग कर संयम का मार्ग अपनाने का निर्णय किया।
विज्ञापन


साध्वी मंगलप्रज्ञाजी के मार्गदर्शन से मिला संबल
परिवार के सदस्यों की मानें तो जहान के फैसले को दिशा देने में साध्वी मंगलप्रज्ञाजी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। साध्वीजी इन दिनों राजस्थान के बालोतरा में चातुर्मास कर रही हैं। बालोतरा प्रवास के दौरान उन्होंने जहान को संयम मार्ग और जैन धर्म के सिद्धांतों के प्रति मार्गदर्शन दिया। साथ ही उनके माता-पिता से बातचीत कर उन्हें अपने इकलौते बेटे के इस निर्णय को स्वीकार करने और मानसिक रूप से तैयार होने में सहायता की।
विज्ञापन
विज्ञापन


18 जनवरी 2027 को लाडनूं में होगी दीक्षा
परिवार के मुताबिक जहान आगामी 18 जनवरी 2027 को जैन दीक्षा ग्रहण करेंगे। लाडनूं स्थित जैन विश्व भारती परिसर में आचार्य श्री महाश्रमणजी उन्हें दीक्षा प्रदान करेंगे। इस अवसर पर जहान की बहन जियाना, पिता प्रवीन बेताला और माता नताशा बेताला ने बालोतरा के श्रावक-श्राविका समाज को समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। परिवार ने समाज के लोगों से कार्यक्रम में उपस्थित होकर जहान को स्नेह और आशीर्वाद देने की अपील की है।

आईआईटी इंजीनियर गौरव जैन ने छोड़ा 18 लाख का पैकेज
दूसरी ओर, केकड़ी क्षेत्र के जूनिया गांव निवासी 24 वर्षीय गौरव जैन ने भी सांसारिक जीवन से अलग संयम का मार्ग चुना है। राकेश जैन के बड़े बेटे गौरव गुरुग्राम की एक मल्टीनेशनल कंपनी में 18 लाख रुपये के वार्षिक पैकेज पर कार्यरत थे। आईआईटी से इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त करने वाले गौरव पढ़ाई में होशियार होने के साथ खुशमिजाज और मिलनसार स्वभाव के भी रहे हैं। उन्हें धार्मिक संस्कार परिवार से मिले। अब उन्होंने करियर और आर्थिक सफलता के बजाय आध्यात्मिक जीवन को प्राथमिकता दी है।

गुरु के दर्शन से मजबूत हुई धर्म के प्रति आस्था
परिवार की मानें तो गौरव के वैराग्य की शुरुआत वर्ष 2015 में हुई, जब दिगंबर जैन संत मुनिपुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ने उनके ननिहाल गुलगांव में गुणोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र की नींव रखी। उसी दौरान गौरव ने पहली बार मुनिश्री के दर्शन किए और उन्हें अपना गुरु मान लिया। वह नियमित रूप से उनके प्रवचन सुनते और जिज्ञासा समाधान के माध्यम से धर्म के प्रति उनकी आस्था और मजबूत होती गई।

उच्च शिक्षा के लिए जयपुर के प्रताप नगर में रहने के दौरान भी गौरव प्रतिदिन साइकिल से सांगानेर स्थित श्री संघीजी मंदिर पहुंचते थे। वहां देवदर्शन और भगवान का अभिषेक करने के साथ उन्होंने शुद्ध-सात्विक भोजन करने का नियम भी बनाए रखा।

नौकरी लगने के बाद परिवार ने शुरू की शादी की चर्चा
वर्ष 2022 में गौरव को मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी मिली तो परिवार में खुशी का माहौल था। परिजनों ने उनकी शादी को लेकर भी चर्चा शुरू कर दी। हालांकि, गौरव के मन में सांसारिक मोह-माया से दूर होकर वैराग्य का मार्ग अपनाने की इच्छा मजबूत हो रही थी। वह शादी की चर्चाओं को टालते रहे और अंततः आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत लेने का निर्णय कर लिया।

गुरु ने पहले टाला, लेकिन संकल्प से पीछे नहीं हटे गौरव
पर्युषण पर्व से पहले गौरव मध्यप्रदेश के इंदौर पहुंचे, जहां उनके गुरु मुनिपुंगव श्री सुधासागरजी महाराज वर्षायोग के लिए प्रवास कर रहे थे। गौरव ने गुरुचरणों में आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत लेकर संघ में रहने की इच्छा व्यक्त की। उस समय मुनिश्री ने उनकी बात टाल दी, जिसके बाद गौरव गुरुग्राम लौट गए। हालांकि, उनका वैराग्य का संकल्प कमजोर नहीं हुआ।


कुछ दिन बाद पर्युषण पर्व संपन्न होने पर गौरव अपने गांव जूनिया जाने के बजाय दोबारा इंदौर पहुंच गए। उन्होंने परिवार को अपने फैसले की जानकारी दी और परिजनों को भी वहां बुला लिया। माता-पिता और अन्य सदस्यों ने भावुक होकर उन्हें मनाने का प्रयास किया, लेकिन गौरव अपने निर्णय पर अडिग रहे। आखिरकार उन्होंने मुनिपुंगव श्री सुधासागरजी महाराज से विधिवत व्रत ग्रहण कर मुनिसंघ में शामिल होने का संकल्प पूरा किया।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed