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Ludhiana News: बहुओं ने सास की अर्थी को दिया कंधा, पार्थिव शरीर और नेत्र किए दान
Fri, 04 Sep 2026 07:08 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना
Updated Fri, 04 Sep 2026 07:08 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
लुधियाना। महानगर के प्रताप सिंह वाला क्षेत्र में एक परिवार ने रूढ़िवादी सामाजिक मान्यताओं को तोड़ते हुए मानवता की मिसाल पेश की है। दिवंगत सुखदेव कौर की अंतिम यात्रा में उनकी दोनों बहुओं मनप्रीत कौर और राजवीर कौर ने अर्थी को कंधा दिया। परिवार ने सुखदेव कौर की इच्छा के अनुसार उनके पार्थिव शरीर और नेत्रों का भी दान किया।
बुधवार शाम हृदय गति रुकने से सुखदेव कौर का निधन हो गया था। इसके तुरंत बाद परिजन ने 10 वर्ष पूर्व लिए गए उनके संकल्प को पूरा करने की प्रक्रिया शुरू की। अंतिम यात्रा में बहुओं ने अर्थी के आगे का हिस्सा संभाला। बेटों यादविंदर सिंह और गुरविंदर सिंह ने पीछे से सहारा दिया। डॉ. रमेश सुपरस्पेशलिटी आई एंड लेजर सेंटर की टीम ने दिवंगत की आंखें प्राप्त कीं। ये आंखें अब किसी दृष्टिहीन व्यक्ति के जीवन में उजाला फैलाएंगी। धार्मिक विधि-विधान के बाद पार्थिव शव को फूलों से सजी एंबुलेंस तक पहुंचाया गया। गांव के सरपंच गुरमेज सिंह कामरेड ने एंबुलेंस को फिरोजपुर स्थित हारमनी आयुर्वेदिक कॉलेज एंड हॉस्पिटल के लिए रवाना किया। इस संस्थान के छात्र दिवंगत शव पर अपनी पढ़ाई और प्रैक्टिकल करेंगे।
सुखदेव कौर ने एक दशक पहले एक धार्मिक समागम से प्रेरित होकर शव दान का फॉर्म भरा था। उनके बेटों ने भी शपथ पत्र देकर इस पर पूर्ण सहमति जताई थी। सरपंच गुरमेज सिंह ने इस महान कार्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि सुखदेव कौर का यह त्याग उन्हें अमर बना गया है।
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शिक्षा और मानवता के लिए दान
दिवंगत सुखदेव कौर के नेत्रदान से दृष्टिहीन लोगों को रोशनी मिलेगी। उनके शरीर का दान मेडिकल छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन बनेगा। इससे भावी डॉक्टरों को मानव शरीर की संरचना समझने में मदद मिलेगी। यह कदम शिक्षा और मानवता दोनों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है।
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लुधियाना। महानगर के प्रताप सिंह वाला क्षेत्र में एक परिवार ने रूढ़िवादी सामाजिक मान्यताओं को तोड़ते हुए मानवता की मिसाल पेश की है। दिवंगत सुखदेव कौर की अंतिम यात्रा में उनकी दोनों बहुओं मनप्रीत कौर और राजवीर कौर ने अर्थी को कंधा दिया। परिवार ने सुखदेव कौर की इच्छा के अनुसार उनके पार्थिव शरीर और नेत्रों का भी दान किया।
बुधवार शाम हृदय गति रुकने से सुखदेव कौर का निधन हो गया था। इसके तुरंत बाद परिजन ने 10 वर्ष पूर्व लिए गए उनके संकल्प को पूरा करने की प्रक्रिया शुरू की। अंतिम यात्रा में बहुओं ने अर्थी के आगे का हिस्सा संभाला। बेटों यादविंदर सिंह और गुरविंदर सिंह ने पीछे से सहारा दिया। डॉ. रमेश सुपरस्पेशलिटी आई एंड लेजर सेंटर की टीम ने दिवंगत की आंखें प्राप्त कीं। ये आंखें अब किसी दृष्टिहीन व्यक्ति के जीवन में उजाला फैलाएंगी। धार्मिक विधि-विधान के बाद पार्थिव शव को फूलों से सजी एंबुलेंस तक पहुंचाया गया। गांव के सरपंच गुरमेज सिंह कामरेड ने एंबुलेंस को फिरोजपुर स्थित हारमनी आयुर्वेदिक कॉलेज एंड हॉस्पिटल के लिए रवाना किया। इस संस्थान के छात्र दिवंगत शव पर अपनी पढ़ाई और प्रैक्टिकल करेंगे।
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सुखदेव कौर ने एक दशक पहले एक धार्मिक समागम से प्रेरित होकर शव दान का फॉर्म भरा था। उनके बेटों ने भी शपथ पत्र देकर इस पर पूर्ण सहमति जताई थी। सरपंच गुरमेज सिंह ने इस महान कार्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि सुखदेव कौर का यह त्याग उन्हें अमर बना गया है।
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शिक्षा और मानवता के लिए दान
दिवंगत सुखदेव कौर के नेत्रदान से दृष्टिहीन लोगों को रोशनी मिलेगी। उनके शरीर का दान मेडिकल छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन बनेगा। इससे भावी डॉक्टरों को मानव शरीर की संरचना समझने में मदद मिलेगी। यह कदम शिक्षा और मानवता दोनों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है।