राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में दाखिल चार्जशीट ने ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय की भूमिका को लेकर नए सवाल खड़े किए हैं। पुलिस ने उन्हें आरोपी नहीं बनाया है, लेकिन चार्जशीट में दर्ज उनके बयान के मुताबिक चोरी की सूचना, वीडियो और करीब 2.25 लाख रुपये की रकम से जुड़ा संदेश उन्हें चार जून की रात करीब पौने दस बजे ही मिल गया था।
अगले दिन उन्हें चोरी से जुड़े वीडियो भी दिखाए गए। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सूचना मिलने के बाद पुलिस को कब और किस स्तर से जानकारी दी गई और कार्रवाई में इतना अंतर क्यों रहा।
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Ram Mandir
- फोटो : अमर उजाला
चार्जशीट के अनुसार, चार जून की रात गणना कर्मी आनंद कुमार चौधरी ने चंपत राय के मोबाइल पर वीडियो और लिखित संदेश भेजा था। संदेश में चढ़ावे की रकम में करीब 2.25 लाख रुपये की चोरी की जानकारी दी गई थी। वीडियो में नोटों की गड्डियां दिखाई गई थीं। विवेचना में इस रकम के गणना कक्ष के बाथरूम से बरामद होने का भी उल्लेख है।
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राम मंदिर के शिखर पर लहराता ध्वज
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पांच जून को मामला और स्पष्ट हुआ। चार्जशीट के मुताबिक अयोध्या पहुंचने के बाद चंपत राय की ट्रस्ट के पदाधिकारियों से मुलाकात हुई। उनके आवास पर लैपटॉप के जरिये गणना कक्ष के वीडियो दिखाए गए।
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राममंदिर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
फुटेज में चढ़ावे की रकम की गिनती के दौरान नोटों की गड्डियों से कथित तौर पर रकम निकालने की तस्वीरें सामने आईं। इसके बावजूद एफआईआर 25 जून को दर्ज हुई। यही करीब तीन सप्ताह का अंतर अब मामले में महत्वपूर्ण सवाल बन गया है।
सवाल यह है कि चार जून की रात चंपत राय को सूचना मिलने के बाद उन्होंने सबसे पहले किसे बताया? क्या पुलिस को तत्काल सूचना दी गई? यदि नहीं, तो ट्रस्ट स्तर पर मामले की जांच या सत्यापन का फैसला किसने लिया?