शरीर स्वस्थ रहे, सभी अंगों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिलता रहे इसके लिए फेफड़ों का सही से काम करते रहना जरूरी है। फेफड़े हवा से ऑक्सीजन लेकर खून में पहुंचाते हैं, जिस दिल के जरिए शरीर के अन्य हिस्सों तक पहुंचती है। ऐसे में सोचिए कि अगर फेफड़ों में कोई दिक्कत हो जाए तो इसका पूरी सेहत पर किस प्रकार से नकारात्मक असर हो सकता है?
लंग्स हेल्थ: थोड़ी देर चलते ही फूलने लगती है सांस और खांसी ने कर दिया परेशान? ये सीओपीडी का संकेत तो नहीं
World lung day 2026: सीओपीडी फेफड़ों की ऐसी बीमारी है जिसमें सांस की नलियों में हवा का प्रवाह बाधित होता है। लगातार खांसी, बलगम, सांस फूलना, सीने में जकड़न और सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज इसके प्रमुख लक्षण हैं। कहीं आप भी तो इसका शिकार नहीं हैं?
सीओपीडी की समस्या को लेकर बरतें सावधानी
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आमतौर पर फेफड़ों या सांस में होने वाली दिक्कतों को धूम्रपान या मौसम का असर समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन अगर ये समस्या लगातार बनी रहती है तो समय रहते इसकी जांच जरूरी है। सीओपीडी जैसी बीमारियों को शुरुआत में अनदेखा करना आगे चलकर गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।
- सीओपीडी यानी क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज फेफड़ों की ऐसी बीमारी है जिसमें सांस की नलियों में हवा का प्रवाह बाधित होने लगता है।
- समय के साथ यह बीमारी बढ़ती जाती है और सांस लेने में परेशानी ज्यादा होने लगती है।
अध्ययनों में धूम्रपान को सीओपीडी का सबसे बड़ा कारण माना जाता रहा है, लेकिन सिर्फ धूम्रपान करने वालों को ही यह बीमारी नहीं होती। लंबे समय तक धुंआ, वायु प्रदूषण या काम की जगह मौजूद धूल और रसायन भी फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं, इससे भी आपकी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
सीओपीडी में फेफड़ों में क्या होता है?
सीओपीडी में फेफड़ों की सांस की नलियां और हवा की छोटी थैलियां यानी एयर सैक्स प्रभावित होती हैं। सांस की नलियों में सूजन आ सकती है, उनकी दीवारें मोटी हो जाती हैं। जरूरत से ज्यादा बलगम बनने से हवा का रास्ता और संकरा हो सकता है। कुछ मामलों में फेफड़ों की छोटी हवा की थैलियों की संरचना भी क्षतिग्रस्त होती है।
- इसका सीधा असर सांस लेने पर पड़ता है। सीओपीडी के शिकार लोगों को लग सकता है कि पहले जितनी आसानी से सांस आती थी, अब उतनी नहीं आ रही।
- इस तरह की दिक्कतें अगर लगातार और लंबे समय तक बनी रहती है तो इसे अनदेखा करना आपके लिए बड़ी मुसीबतों का कारण हो सकता है।
कैसे जानें कहीं आप भी तो नहीं हो गए शिकार?
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि सीओपीडी की शुरुआत में लक्षण बहुत हल्के होते हैं।
- रोगियों को लगातार खांसी, खांसी के साथ ज्यादा बलगम, चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर सांस फूलने की दिक्कत हो सकती है।
- कुछ लोगों को सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आने और सीने में जकड़न की भी समस्या हो सकती है।
- लगातार खांसी या सामान्य काम करने पर भी सांस फूलने की समस्या को केवल उम्र या कमजोरी मानकर छोड़ना गंभीर हो सकता है।
- समय रहते समस्या की जांच कराकर इलाज कराने से बीमारी की बढ़ने से रोका जा सकता है।
क्यों बढ़ रही है ये समस्या?
धूम्रपान सीओपीडी का प्रमुख कारण है। इसके अलावा सेकंड-हैंड धुआं यानी दूसरे व्यक्ति के सिगरेट के धुएं में सांस लेना, लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहना भी आपको इस बीमारी का शिकार बना सकता है।
- कार्यस्थल की धूल-धुएं और रसायनों के संपर्क में रहना भी जोखिम बढ़ा सकता है।
- कुछ लोगों में परिवार से आनुवंशिक रूप से भी सीओपीडी की बीमारी का खतरा रहता है।
- सीओपीडी का पूरी तरह इलाज करने वाली कोई दवा नहीं है, लेकिन लक्षणों को नियंत्रित करने, बीमारी की रफ्तार धीमी करने और जीवन की गुणवत्ता बेहतर करने में शुरुआती इलाज से मदद मिल सकती है।अगर आप धूम्रपान करते हैं तो इसे छोड़ना आपके जोखिमों को कम करने में मददगार हो सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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