हृदय रोग और कैंसर को दुनियाभर में मौत के सबसे बड़े कारणों में से एक माना जाता है, पर क्या आप जानते हैं कि फेफड़ों की बीमारियां भी इसी तरह से गंभीर स्वास्थ्य जोखिम मानी जाती रही हैं।
फेफड़ा दिवस: फेफड़ों को धीरे-धीरे खोखला कर रही हैं आपकी रोज की ये आदतें, बस सिगरेट छोड़ने से नहीं चलेगा काम
world lung day 2026: तंबाकू का धुआं फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने वाले प्रमुख कारणों में से एक है। इसके अलावा सेकेंड हैंड स्मोक और प्रदूषित हवा का लंबे समय तक संपर्क भी जोखिम बढ़ा सकता है। लंबे समय तक निष्क्रिय रहना भी स्वस्थ जीवनशैली के लिए नुकसानदायक है। इसलिए लंग्स को हेल्दी रखने के लिए पूरी दिनचर्या में सुधार करें।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ गौरव चतुर्वेदी बताते हैं, हमारे फेफड़े दिन-रात बिना रुके काम करते हैं, लेकिन हम अक्सर उनकी सेहत पर तब ध्यान देते हैं जब सांस लेने में परेशानी शुरू हो जाती है। इसी अंग की मदद से हमे निरंतर प्राणवायु मिलती रहती है, ऐसे में फेफड़ों में होने वाली कोई भी गड़बड़ी गंभीर और जानलेवा समस्याओं का कारण बन सकती है।
- फेफड़ों का डैमेज हमेशा अचानक नहीं होता। कई बार हमारी आदतें और परिस्थितियां लंबे समय में सांस लेने की क्षमता पर असर डालती रहती हैं, जिसका अंदाजा भी नहीं होता।
- धूम्रपान इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, ये फेफड़ों के लिए सबसे खतरनाक है, लेकिन खतरा सिर्फ सिगरेट तक सीमित नहीं है। हमारी रोजमर्रा की कई गलतियां भी लंग्स की सेहत को नुकसान पहुंचाती रहती हैं।
सिगरेट और तंबाकू का धुआं सबसे बड़ा खतरा
डॉक्टर बताते हैं, सिगरेट पीना फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने वाली सबसे प्रमुख आदतों में से एक है है। तंबाकू के धुएं में हजारों रसायन होते हैं और इनमें कई कैंसर पैदा करने वाले भी पाए गए हैं।
- लंबे समय तक धूम्रपान से फेफड़ों में सूजन और ऊतकों को नुकसान हो सकता है।
- ये क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज यानी सीओपीडी से लेकर फेफड़ों के कैंसर तक के खतरे को बढ़ाने वाली आदत हो सकती है।
- सिर्फ खुद सिगरेट पीना ही समस्या नहीं है। दूसरे व्यक्ति के सिगरेट के धुएं के बार-बार संपर्क में रहना भी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है। इसे सेकेंड हैंड स्मोकिंग कहा जाता है।
प्रदूषित हवा का फेफड़ों पर असर
शहरों में रहने वाले लोगों के लिए वायु प्रदूषण भी चिंता का विषय है। कई अध्ययनों से स्पष्ट हो चुका है कि प्रदूषित हवा में मौजूद पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्मकण फेफड़ों को तो डैमेज करते ही हैं, साथ ही ये खून में मिलकर शरीर के दूसरे अंगों तक भी पहुंच सकते हैं।
- इसी तरह से लंबे समय तक शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहना भी फेफड़ों की कार्यक्षमता को कम करने वाला हो सकता है।
- अच्छी बात यह है कि इनमें से कई जोखिमों को कम किया जा सकता है। समय रहते सावधानी आपके फेफड़ों को किसी जानलेवा बीमारी से बचाने में मददगार हो सकती है।
कम उम्र से ही सावधानी जरूरी
डॉ गौरव बताते हैं, फैक्ट्रियों में धूल, सिलिका, धुएं और केमिकल से होने वाली जलन भी लोगों में अस्थमा, सीओपीडी और न्यूमोकोनियोसिस का खतरा बढ़ाने वाली पाई गई है। अगर आप ऐसे जगहों पर काम करते हैं तो सुरक्षा के लिए मास्क जरूर लगाएं। जिस तरह से फेफड़ों की बीमारियों को बोझ बढ़ता जा रहा है, ऐसे में हम सभी को कम उम्र से ही अलर्ट हो जाने की जरूरत है।
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स्रोत:
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