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विश्व हृदय दिवस आज: हार्ट अटैक आया तो कितना आएगा खर्च? एंजियोप्लास्टी से बाईपास तक जानें पूरा गणित
Tue, 29 Sep 2026 10:11 AM IST
Shruti Gaur
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Tue, 29 Sep 2026 10:11 AM IST
सार
World Heart Day: इस लेख में जानें, भारत में दिल की बीमारी के इलाज का खर्च कितना है, एंजियोप्लास्टी-बाईपास पर कितना खर्च आता है और आयुष्मान भारत से कितनी राहत मिलती है।
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दिल की बीमारी में कितना खर्च आता है?
- फोटो : AI
World Heart Day: आज विश्व हृदय दिवस है। इस मौके पर जब दुनिया भर में लोगों को दिल को स्वस्थ रखने और हृदय रोगों से बचाव के प्रति जागरूक किया जा रहा है। दिल में थोड़ी सी तकलीफ होने पर जान जाने तक की नौबत आ सकती है। ऐसे समय मं हार्ट अटैक के बाद एंजियोप्लास्टी से लेकर बाईपास सर्जरी तक का इलाज कई परिवारों के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती बन सकता है।
दिल की बीमारी में कितना खर्च आता है?
- फोटो : AI
हार्ट अटैक से लेकर बाईपास तक, कितना खर्च?
दिल की बीमारी का इलाज मरीज की स्थिति, अस्पताल, शहर और प्रक्रिया के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।
हार्ट अटैक आया तो कितना आएगा खर्च
आसान भाषा में समझें तो हार्ट अटैक आने के बाद इलाज का खर्च मरीज की स्थिति, अस्पताल, शहर और उपचार की जरूरत पर निर्भर करता है। शुरुआती इमरजेंसी इलाज, ICU, ECG, ब्लड टेस्ट और एंजियोग्राफी से खर्च बढ़ सकता है। अगर एंजियोप्लास्टी की जरूरत पड़ती है तो स्टेंट समेत इलाज पर करीब 1 लाख रुपये से कई लाख रुपये तक खर्च हो सकता है, जबकि बाईपास सर्जरी की स्थिति में खर्च 2 से 5 लाख रुपये या उससे अधिक हो सकता है। निजी अस्पताल में वास्तविक बिल इससे कम या ज्यादा हो सकता है।
( ये खर्च अनुमानित है। मरीज की हालत के हिसाब से खर्च घट या बढ़ भी सकता है)
दिल की बीमारी का इलाज मरीज की स्थिति, अस्पताल, शहर और प्रक्रिया के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।
- एंजियोप्लास्टी: करीब 1 लाख रुपये से कई लाख रुपये तक।
- बाईपास सर्जरी: करीब 2 लाख से 5 लाख रुपये या उससे अधिक।
- हार्ट अटैक का इमरजेंसी इलाज: ICU, एंजियोग्राफी, दवाइयां और अन्य जांचों के कारण खर्च तेजी से बढ़ सकता है।
- इलाज के बाद: नियमित दवाइयां, ब्लड टेस्ट, ECG/अन्य जांच और डॉक्टर की फीस का खर्च जारी रह सकता है।
हार्ट अटैक आया तो कितना आएगा खर्च
आसान भाषा में समझें तो हार्ट अटैक आने के बाद इलाज का खर्च मरीज की स्थिति, अस्पताल, शहर और उपचार की जरूरत पर निर्भर करता है। शुरुआती इमरजेंसी इलाज, ICU, ECG, ब्लड टेस्ट और एंजियोग्राफी से खर्च बढ़ सकता है। अगर एंजियोप्लास्टी की जरूरत पड़ती है तो स्टेंट समेत इलाज पर करीब 1 लाख रुपये से कई लाख रुपये तक खर्च हो सकता है, जबकि बाईपास सर्जरी की स्थिति में खर्च 2 से 5 लाख रुपये या उससे अधिक हो सकता है। निजी अस्पताल में वास्तविक बिल इससे कम या ज्यादा हो सकता है।
( ये खर्च अनुमानित है। मरीज की हालत के हिसाब से खर्च घट या बढ़ भी सकता है)
दिल की बीमारी में कितना खर्च आता है?
- फोटो : AI
आयुष्मान भारत से कितनी राहत?
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पात्र परिवारों को हर साल 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर मिलता है। योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में कई गंभीर बीमारियों और सर्जरी का कैशलेस इलाज उपलब्ध है। कार्डियक उपचार भी योजना के तहत आने वाली प्रमुख सेवाओं में शामिल है। इससे पात्र परिवारों को महंगे इलाज के समय जेब से होने वाले खर्च को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि किस परेशानी में आपको सरकार से कितनी मदद मिल सकती है, ये आपकी रिपोर्ट पर निर्भर करता है।
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पात्र परिवारों को हर साल 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर मिलता है। योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में कई गंभीर बीमारियों और सर्जरी का कैशलेस इलाज उपलब्ध है। कार्डियक उपचार भी योजना के तहत आने वाली प्रमुख सेवाओं में शामिल है। इससे पात्र परिवारों को महंगे इलाज के समय जेब से होने वाले खर्च को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि किस परेशानी में आपको सरकार से कितनी मदद मिल सकती है, ये आपकी रिपोर्ट पर निर्भर करता है।
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दिल की बीमारी में कितना खर्च आता है?
- फोटो : AI
बीमारी का खर्च सिर्फ अस्पताल के बिल तक सीमित नहीं
विश्व हृदय दिवस पर आर्थिक बोझ को समझते समय सिर्फ ऑपरेशन का खर्च देखना पर्याप्त नहीं है। परिवार को कई अप्रत्यक्ष खर्च भी उठाने पड़ सकते हैं।
विश्व हृदय दिवस पर आर्थिक बोझ को समझते समय सिर्फ ऑपरेशन का खर्च देखना पर्याप्त नहीं है। परिवार को कई अप्रत्यक्ष खर्च भी उठाने पड़ सकते हैं।
- अस्पताल और ICU का खर्च
- स्टेंट और सर्जरी का खर्च
- दवाइयां और जांच
- अस्पताल आने-जाने का खर्च
- मरीज की देखभाल करने वाले व्यक्ति का खर्च
- लंबे समय तक चलने वाली दवाइयों का खर्च
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दिल की बीमारी में कितना खर्च आता है?
- फोटो : AI
सबसे बड़ा सवाल: बीमारी से पहले बचाव
हार्ट डिजीज का आर्थिक बोझ कम करने का सबसे प्रभावी तरीका बीमारी के गंभीर होने का इंतजार करने के बजाय समय रहते उसके जोखिमों को पहचानना और नियंत्रित करना है। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल कई बार लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षण के रह सकते हैं, लेकिन धीरे-धीरे हृदय और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
हार्ट डिजीज का आर्थिक बोझ कम करने का सबसे प्रभावी तरीका बीमारी के गंभीर होने का इंतजार करने के बजाय समय रहते उसके जोखिमों को पहचानना और नियंत्रित करना है। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल कई बार लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षण के रह सकते हैं, लेकिन धीरे-धीरे हृदय और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं।