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दिवाली की सफाई में डस्ट एलर्जी से कैसे बचें? जानें सेहत का ध्यान रखने के जरूरी उपाय
Mon, 26 Oct 2026 01:26 PM IST
श्रुति गौड़
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्रुति गौड़
Updated Mon, 26 Oct 2026 01:26 PM IST
सार
How to Prevent Dust Allergy While Cleaning: दिवाली की सफाई के दौरान डस्ट एलर्जी से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं।
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दिवाली की सफाई में डस्ट एलर्जी से कैसे बचें?
- फोटो : AI
How to Prevent Dust Allergy While Cleaning: दिवाली से पहले घर की साफ-सफाई के दौरान धूल-मिट्टी के संपर्क में आने से छींक, खांसी, आंखों में जलन और सांस संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। खासकर अस्थमा और एलर्जी से परेशान लोगों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। ऐसे में दिवाली की सफाई के दौरान सेहत का ध्यान कैसे रखें और डस्ट एलर्जी से बचने के लिए कौन-सी सावधानियां अपनाएं, आइए इस लेख में जानते हैं।
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दिवाली की सफाई में डस्ट एलर्जी से कैसे बचें?
- फोटो : AI
1. सफाई करते समय मास्क जरूर पहनें
घर की सफाई के दौरान अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क पहनने से हवा में मौजूद बारीक धूल के कणों के संपर्क को कम करने में मदद मिल सकती है। मास्क नाक और मुंह को अच्छी तरह ढकना चाहिए। ढीला मास्क पहनने से हवा किनारों से अंदर जा सकती है।
अगर आपको पहले से अस्थमा या धूल से एलर्जी की समस्या है, तो सफाई करते समय विशेष सावधानी बरतें। जरूरत पड़ने पर परिवार के किसी अन्य सदस्य की मदद लें।
2. सूखी झाड़ू के बजाय गीले कपड़े से सफाई करें
सूखी झाड़ू लगाने और धूल भरे कपड़े से फर्नीचर साफ करने पर धूल हवा में फैल सकती है। इससे एलर्जी के लक्षण बढ़ने की आशंका रहती है।
- अलमारी, मेज, खिड़की और फर्नीचर को हल्के गीले माइक्रोफाइबर कपड़े से साफ करें।
- फर्श पर पोछा लगाएं, ताकि धूल दोबारा हवा में न उड़े।
- पंखों और ऊंची जगहों की सफाई धीरे-धीरे करें।
- धूल हटाने के लिए तेज हवा वाले ब्लोअर का इस्तेमाल करने से बचें।
दिवाली की सफाई में डस्ट एलर्जी से कैसे बचें?
- फोटो : AI
3. पर्दे, चादरें और तकिए के कवर धोएं
पर्दों, गद्दों, तकियों और बिस्तर में धूल और डस्ट माइट्स जमा हो सकते हैं। इनके संपर्क से कुछ लोगों में छींक, नाक बहने और आंखों में खुजली जैसे लक्षण बढ़ सकते हैं।
4. पूरे घर की सफाई एक ही दिन में न करें
लंबे समय तक लगातार सफाई करने से धूल के संपर्क में रहने की अवधि बढ़ सकती है। इसलिए सफाई को अलग-अलग हिस्सों में बांटना बेहतर है।
बच्चों, बुजुर्गों और एलर्जी से परेशान लोगों को सफाई वाली जगह से दूर रखना बेहतर है।
पर्दों, गद्दों, तकियों और बिस्तर में धूल और डस्ट माइट्स जमा हो सकते हैं। इनके संपर्क से कुछ लोगों में छींक, नाक बहने और आंखों में खुजली जैसे लक्षण बढ़ सकते हैं।
- पर्दों और चादरों को नियमित रूप से धोएं।
- तकिए के कवर और बेडशीट बदलें।
- गद्दों और सोफे की सफाई के लिए HEPA फिल्टर वाला वैक्यूम क्लीनर उपयोगी हो सकता है।
- कपड़ों और बिस्तर को पूरी तरह सुखाने के बाद ही इस्तेमाल करें।
4. पूरे घर की सफाई एक ही दिन में न करें
लंबे समय तक लगातार सफाई करने से धूल के संपर्क में रहने की अवधि बढ़ सकती है। इसलिए सफाई को अलग-अलग हिस्सों में बांटना बेहतर है।
- पहले दिन अलमारी और फर्नीचर साफ करें।
- दूसरे दिन पर्दे, चादरें और बिस्तर की सफाई करें।
- तीसरे दिन फर्श और स्टोर रूम पर ध्यान दें।
- बीच-बीच में आराम करें और धूल भरे कमरे से बाहर निकलें।
बच्चों, बुजुर्गों और एलर्जी से परेशान लोगों को सफाई वाली जगह से दूर रखना बेहतर है।
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दिवाली की सफाई में डस्ट एलर्जी से कैसे बचें?
- फोटो : AI
5. घर में हवा की गुणवत्ता का ध्यान रखें
सफाई के दौरान खिड़कियां खोलना या बंद रखना बाहर की हवा की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। यदि बाहर प्रदूषण कम है, तो कुछ समय के लिए खिड़कियां खोलकर वेंटिलेशन किया जा सकता है। लेकिन अगर बाहर हवा की गुणवत्ता खराब है, तो खिड़कियां लंबे समय तक खुली रखने से बचें।
जरूरत पड़ने पर HEPA फिल्टर वाला एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही, तेज खुशबू वाले क्लीनर, स्प्रे और रूम फ्रेशनर का सीमित इस्तेमाल करें, क्योंकि इनसे कुछ लोगों में सांस की परेशानी बढ़ सकती है।
6. पुराने सामान और स्टोर रूम की सफाई सावधानी से करें
लंबे समय से बंद अलमारियों, पुराने डिब्बों और स्टोर रूम में काफी धूल जमा हो सकती है। सामान निकालते समय उसे जोर-जोर से झाड़ने के बजाय धीरे-धीरे साफ करें। पुराने कपड़ों और बिस्तरों को दोबारा इस्तेमाल करने से पहले धो लें।
यदि किसी जगह फफूंद दिखाई दे, तो उसे सूखा रगड़कर साफ न करें। बड़े क्षेत्र में फफूंद होने पर विशेषज्ञ की मदद लेना बेहतर है। सफाई के दौरान दस्ताने पहनना और कमरे में हवा की उचित व्यवस्था रखना भी उपयोगी हो सकता है।
सफाई के दौरान खिड़कियां खोलना या बंद रखना बाहर की हवा की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। यदि बाहर प्रदूषण कम है, तो कुछ समय के लिए खिड़कियां खोलकर वेंटिलेशन किया जा सकता है। लेकिन अगर बाहर हवा की गुणवत्ता खराब है, तो खिड़कियां लंबे समय तक खुली रखने से बचें।
जरूरत पड़ने पर HEPA फिल्टर वाला एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही, तेज खुशबू वाले क्लीनर, स्प्रे और रूम फ्रेशनर का सीमित इस्तेमाल करें, क्योंकि इनसे कुछ लोगों में सांस की परेशानी बढ़ सकती है।
6. पुराने सामान और स्टोर रूम की सफाई सावधानी से करें
लंबे समय से बंद अलमारियों, पुराने डिब्बों और स्टोर रूम में काफी धूल जमा हो सकती है। सामान निकालते समय उसे जोर-जोर से झाड़ने के बजाय धीरे-धीरे साफ करें। पुराने कपड़ों और बिस्तरों को दोबारा इस्तेमाल करने से पहले धो लें।
यदि किसी जगह फफूंद दिखाई दे, तो उसे सूखा रगड़कर साफ न करें। बड़े क्षेत्र में फफूंद होने पर विशेषज्ञ की मदद लेना बेहतर है। सफाई के दौरान दस्ताने पहनना और कमरे में हवा की उचित व्यवस्था रखना भी उपयोगी हो सकता है।
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दिवाली की सफाई में डस्ट एलर्जी से कैसे बचें?
- फोटो : AI
7. सफाई के बाद हाथ-मुंह धोएं और कपड़े बदलें
सफाई के दौरान धूल कपड़ों, बालों और त्वचा पर चिपक सकती है। काम पूरा होने के बाद हाथ और चेहरा धोएं तथा धूल भरे कपड़े बदल लें। आंखों में धूल जाने पर साफ पानी से धीरे-धीरे धोएं।
यदि नाक बहने या छींक आने की समस्या बार-बार हो रही है, तो डॉक्टर की सलाह लें। बिना सलाह के एलर्जी की दवाओं का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल न करें।
8. एलर्जी या सांस की परेशानी बढ़ने पर डॉक्टर से संपर्क करें
अगर सफाई के दौरान लगातार छींक, खांसी, नाक बहने या आंखों में खुजली की समस्या हो रही है, तो धूल से दूर हो जाएं। पहले से अस्थमा के मरीज डॉक्टर की बताई दवाएं और उपचार योजना जारी रखें।
सांस फूलने, सीने में जकड़न या घरघराहट होने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। गंभीर सांस की तकलीफ, होंठ नीले पड़ने या बोलने में परेशानी होने पर आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
सफाई के दौरान धूल कपड़ों, बालों और त्वचा पर चिपक सकती है। काम पूरा होने के बाद हाथ और चेहरा धोएं तथा धूल भरे कपड़े बदल लें। आंखों में धूल जाने पर साफ पानी से धीरे-धीरे धोएं।
यदि नाक बहने या छींक आने की समस्या बार-बार हो रही है, तो डॉक्टर की सलाह लें। बिना सलाह के एलर्जी की दवाओं का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल न करें।
8. एलर्जी या सांस की परेशानी बढ़ने पर डॉक्टर से संपर्क करें
अगर सफाई के दौरान लगातार छींक, खांसी, नाक बहने या आंखों में खुजली की समस्या हो रही है, तो धूल से दूर हो जाएं। पहले से अस्थमा के मरीज डॉक्टर की बताई दवाएं और उपचार योजना जारी रखें।
सांस फूलने, सीने में जकड़न या घरघराहट होने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। गंभीर सांस की तकलीफ, होंठ नीले पड़ने या बोलने में परेशानी होने पर आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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