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शिवपुरी: पेट में बना ‘बालों का पहाड़’, 14 साल की बच्ची की हालत बिगड़ी तो ऑपरेशन में सामने आया चौंकाने वाला सच
Sun, 13 Sep 2026 09:00 PM IST
शिवपुरी ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिवपुरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिवपुरी
Published by: शिवपुरी ब्यूरो
Updated Sun, 13 Sep 2026 09:00 PM IST
सार
शिवपुरी मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने 14 वर्षीय किशोरी के पेट से 16×14 सेंटीमीटर का बालों का गुच्छा ट्राइकोबेज़ोआर निकालकर उसकी जान बचाई। गुच्छा पेट के करीब 90 प्रतिशत हिस्से में फैला था और छोटी आंत तक पहुंच गया था। करीब तीन घंटे चली ओपन सर्जरी में इसे सफलतापूर्वक बाहर निकाला गया।
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यह गुच्छा पेट के करीब 90 प्रतिशत हिस्से में फैला हुआ था
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
शिवपुरी मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने 14 वर्षीय किशोरी के पेट से 16×14 सेंटीमीटर का बालों का बड़ा गुच्छा (ट्राइकोबेज़ोआर) निकालकर उसकी जान बचाई। डॉक्टरों के मुताबिक यह गुच्छा पेट के करीब 90 प्रतिशत हिस्से में फैला हुआ था और छोटी आंत तक पहुंच गया था। करीब तीन घंटे चली ओपन सर्जरी के बाद डॉक्टरों की टीम ने इसे सफलतापूर्वक बाहर निकाला।
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किशोरी को 11 सितंबर को पेट दर्द की शिकायत के बाद शल्य चिकित्सा विभाग में भर्ती कराया गया था। जांच में उसका हीमोग्लोबिन महज 7.8 ग्राम पाया गया, जिसके बाद उसे दो यूनिट रक्त चढ़ाया गया। CT स्कैन में पेट के भीतर गंभीर स्थिति और छिद्र (Perforation) की आशंका सामने आई। इसके बाद अधिष्ठाता डॉ. ईला गुजारिया के मार्गदर्शन और सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. अनंत राखोंडे के नेतृत्व में ऑपरेशन का निर्णय लिया गया। सर्जरी टीम में प्रोफेसर डॉ. सौरभ चौहान, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कौशलेन्द्र सिंह नरवरिया, पीजी डॉक्टर डॉ. महेश पाटीदार और एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. प्रियंका गुप्ता शामिल रहे।
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महीनों से उल्टी, भूख कम और पेट भरा-भरा रहता था
जानकारी के अनुसार किशोरी पिछले कई महीनों से लगातार उल्टी, पेट भरा-भरा महसूस होने और भूख कम लगने जैसी परेशानियों से जूझ रही थी। डॉक्टरों के अनुसार लंबे समय तक बाल निगलने के कारण ये बाल पेट में जमा होकर धीरे-धीरे एक सख्त गुच्छे का रूप ले सकते हैं। बताया गया कि इस मामले में बाल करीब 3 से 4 साल से जमा हो रहे थे।
एंडोस्कोपी नहीं, करनी पड़ी ओपन सर्जरी
डॉक्टरों ने बताया कि इतना बड़ा ट्राइकोबेज़ोआर एंडोस्कोपी से पूरी तरह निकालना मुश्किल था। CT स्कैन और मरीज की स्थिति को देखते हुए ओपन सर्जरी की गई। करीब तीन घंटे के ऑपरेशन में बालों के विशाल गुच्छे को पेट से बाहर निकाला गया।
डॉ. कौशलेन्द्र सिंह नरवरिया के मुताबिक, लंबे समय तक बाल निगलने की आदत को ट्राइकोफेजिया कहा जाता है, जबकि बाल तोड़ने की आदत ट्राइकोटिलोमेनिया से जुड़ी हो सकती है। ऐसी आदतें कई बार तनाव या चिंता जैसी मानसिक स्थितियों से जुड़ी होती हैं। डॉक्टरों ने इस मामले को गंभीर होने से पहले बच्चों में ऐसे व्यवहार और लक्षणों पर ध्यान देने की जरूरत से जोड़कर देखा है।
