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MP: मेरिट धारकों को कम अंक वाले उम्मीदवारों से नीचे रखना गलत, जबलपुर हाईकोर्ट ने एकलपीठ का आदेश किया निरस्त
Sat, 22 Aug 2026 03:17 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Sat, 22 Aug 2026 03:17 PM IST
सार
जबलपुर हाईकोर्ट की युगलपीठ ने शिक्षक भर्ती से जुड़े मामले में कहा कि प्रशासनिक कारणों से अधिक मेरिट वाले उम्मीदवारों को कम अंक वाले उम्मीदवारों की तुलना में नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता।
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जबलपुर हाईकोर्ट
- फोटो : Social Media
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विस्तार
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की युगलपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले पर आदेश जारी करते हुए कहा है कि योग्यता मेरिट सूची में योग्यता के आधार पर स्थान पाने वालों के हितों का हनन नहीं होना चाहिए। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी. पी. शर्मा की खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश को निरस्त करते हुए कहा है कि ऐसी व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया जा सकता, जिसके परिणामस्वरूप अधिक योग्य उम्मीदवार को कम योग्य उम्मीदवार की तुलना में निचले स्थान पर रखा जाए।
अपीलकर्ता रामनाथ शाह व अन्य की तरफ से दायर की गई अपील में कहा गया था कि आदिवासी कल्याण विभाग में नियुक्ति प्राप्त कर लेने के कारण उन्हें स्कूल शिक्षा विभाग की काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लेने से वंचित कर दिया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग और आदिवासी कल्याण विभाग में शिक्षण पदों पर नियुक्ति के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा-2018 आयोजित करने हेतु प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड ने एक साझा विज्ञापन जारी किया था। भर्ती प्रक्रिया में शामिल पदों की संख्या अधिक होने के कारण दोनों विभागों की रिक्तियों को एक साझा चयन ढांचे के अंतर्गत लाया गया था।
अधिक अंक वाले उम्मीदवारों को आदिवासी कल्याण विभाग में मिली नियुक्ति
आरक्षित श्रेणियों से संबंधित कई उम्मीदवारों ने अनारक्षित श्रेणी में आने वाले उम्मीदवारों की तुलना में अधिक अंक प्राप्त किए थे। ऐसे उम्मीदवारों को मेरिट पर चयनित उम्मीदवार माना गया और उन्हें अनारक्षित व सामान्य रिक्तियों के विरुद्ध समायोजित किया गया। इनमें से कई उम्मीदवारों को आदिवासी कल्याण विभाग के तहत स्कूल आवंटित किए गए। इनमें से कई उम्मीदवारों ने अपनी प्राथमिकता में स्कूल शिक्षा विभाग के स्कूलों का चयन किया था। उनसे कम अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों को स्कूल शिक्षा विभाग के स्कूल आवंटित कर दिए गए।
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कम मेरिट वाले उम्मीदवारों को स्कूल शिक्षा विभाग में नौकरी पाने की अनुमति दी गई
अपील में कहा गया था कि 2 नवंबर 2022 और 21 दिसंबर 2022 को आदेश जारी कर स्कूल शिक्षा विभाग या आदिवासी कल्याण विभाग में नियुक्ति पा चुके उम्मीदवारों को खाली सीटों के लिए काउंसलिंग में रजिस्ट्रेशन करने से बाहर कर दिया गया। भर्ती विज्ञापन में ऐसी कोई शर्त नहीं थी। संबंधित अधिकारियों का यह कदम मूल चयन प्रक्रिया और मेरिट के सिद्धांतों के खिलाफ है। कम मेरिट वाले उम्मीदवारों को स्कूल शिक्षा विभाग में नौकरी पाने की अनुमति दी गई है। मेरिट सूची में ऊपर होने के बावजूद भी अपीलकर्ताओं को इस मौके से वंचित कर दिया गया, जो संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है।
ये भी पढ़ें- MP: सतना में उफनते नाले में बाइक समेत बहे तीन लोग, दो ने तैरकर बचाई जान; एक की तलाश जारी
सरकार ने कहा- दूसरे मौके का दावा नहीं कर सकते
सरकार की तरफ से दलील दी गई कि आदिवासी कल्याण विभाग में नियुक्ति हो जाने के बाद अपीलकर्ताओं की भर्ती प्रक्रिया पूर्ण हो गई है। वे स्कूल शिक्षा विभाग की काउंसलिंग में शामिल होने के लिए दूसरे मौके का दावा नहीं कर सकते। अनुमति देने से आदिवासी कल्याण विभाग में उन्हें पहले से आवंटित पद खाली हो जाएंगे और पहले से की गई नियुक्तियां प्रभावित होंगी।
प्रशासनिक कारणों से मेरिट वालों को नुकसान नहीं होना चाहिए
युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि रिकॉर्ड से इस बात की पुष्टि होती है कि कम योग्यता वाले उम्मीदवारों को स्कूल शिक्षा विभाग की काउंसलिंग में भाग लेने की अनुमति दी गई। अधिक योग्यता होने के बावजूद अपीलकर्ताओं को आदिवासी कल्याण विभाग में नियुक्ति प्रदान किए जाने के कारण यह मौका नहीं दिया गया। युगलपीठ ने कहा कि प्रशासनिक कारणों से मेरिट में आने वाले उम्मीदवार को अधिक अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवार की तुलना में नुकसान नहीं होना चाहिए। युगलपीठ ने एकलपीठ द्वारा पूर्व में पारित आदेश को निरस्त करते हुए अपने आदेश में कहा है कि मेरिट के आधार पर नियुक्ति प्राप्त करने वाले अपीलकर्ताओं को पसंद के अनुसार पोस्टिंग प्रदान करने पर विचार किया जाए। उन्हें संबंधित विभाग में उपलब्ध वैकेंसी के आधार पर एडजस्ट किया जाएगा। यदि वैकेंसी उपलब्ध नहीं है, तो दो महीने के अंदर स्कूल चॉइस फिलिंग पॉलिसी के अनुसार उन्हें दूसरे विभाग में एडजस्ट किया जाएगा।
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अपीलकर्ता रामनाथ शाह व अन्य की तरफ से दायर की गई अपील में कहा गया था कि आदिवासी कल्याण विभाग में नियुक्ति प्राप्त कर लेने के कारण उन्हें स्कूल शिक्षा विभाग की काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लेने से वंचित कर दिया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग और आदिवासी कल्याण विभाग में शिक्षण पदों पर नियुक्ति के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा-2018 आयोजित करने हेतु प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड ने एक साझा विज्ञापन जारी किया था। भर्ती प्रक्रिया में शामिल पदों की संख्या अधिक होने के कारण दोनों विभागों की रिक्तियों को एक साझा चयन ढांचे के अंतर्गत लाया गया था।
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अधिक अंक वाले उम्मीदवारों को आदिवासी कल्याण विभाग में मिली नियुक्ति
आरक्षित श्रेणियों से संबंधित कई उम्मीदवारों ने अनारक्षित श्रेणी में आने वाले उम्मीदवारों की तुलना में अधिक अंक प्राप्त किए थे। ऐसे उम्मीदवारों को मेरिट पर चयनित उम्मीदवार माना गया और उन्हें अनारक्षित व सामान्य रिक्तियों के विरुद्ध समायोजित किया गया। इनमें से कई उम्मीदवारों को आदिवासी कल्याण विभाग के तहत स्कूल आवंटित किए गए। इनमें से कई उम्मीदवारों ने अपनी प्राथमिकता में स्कूल शिक्षा विभाग के स्कूलों का चयन किया था। उनसे कम अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों को स्कूल शिक्षा विभाग के स्कूल आवंटित कर दिए गए।
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कम मेरिट वाले उम्मीदवारों को स्कूल शिक्षा विभाग में नौकरी पाने की अनुमति दी गई
अपील में कहा गया था कि 2 नवंबर 2022 और 21 दिसंबर 2022 को आदेश जारी कर स्कूल शिक्षा विभाग या आदिवासी कल्याण विभाग में नियुक्ति पा चुके उम्मीदवारों को खाली सीटों के लिए काउंसलिंग में रजिस्ट्रेशन करने से बाहर कर दिया गया। भर्ती विज्ञापन में ऐसी कोई शर्त नहीं थी। संबंधित अधिकारियों का यह कदम मूल चयन प्रक्रिया और मेरिट के सिद्धांतों के खिलाफ है। कम मेरिट वाले उम्मीदवारों को स्कूल शिक्षा विभाग में नौकरी पाने की अनुमति दी गई है। मेरिट सूची में ऊपर होने के बावजूद भी अपीलकर्ताओं को इस मौके से वंचित कर दिया गया, जो संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है।
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सरकार ने कहा- दूसरे मौके का दावा नहीं कर सकते
सरकार की तरफ से दलील दी गई कि आदिवासी कल्याण विभाग में नियुक्ति हो जाने के बाद अपीलकर्ताओं की भर्ती प्रक्रिया पूर्ण हो गई है। वे स्कूल शिक्षा विभाग की काउंसलिंग में शामिल होने के लिए दूसरे मौके का दावा नहीं कर सकते। अनुमति देने से आदिवासी कल्याण विभाग में उन्हें पहले से आवंटित पद खाली हो जाएंगे और पहले से की गई नियुक्तियां प्रभावित होंगी।
प्रशासनिक कारणों से मेरिट वालों को नुकसान नहीं होना चाहिए
युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि रिकॉर्ड से इस बात की पुष्टि होती है कि कम योग्यता वाले उम्मीदवारों को स्कूल शिक्षा विभाग की काउंसलिंग में भाग लेने की अनुमति दी गई। अधिक योग्यता होने के बावजूद अपीलकर्ताओं को आदिवासी कल्याण विभाग में नियुक्ति प्रदान किए जाने के कारण यह मौका नहीं दिया गया। युगलपीठ ने कहा कि प्रशासनिक कारणों से मेरिट में आने वाले उम्मीदवार को अधिक अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवार की तुलना में नुकसान नहीं होना चाहिए। युगलपीठ ने एकलपीठ द्वारा पूर्व में पारित आदेश को निरस्त करते हुए अपने आदेश में कहा है कि मेरिट के आधार पर नियुक्ति प्राप्त करने वाले अपीलकर्ताओं को पसंद के अनुसार पोस्टिंग प्रदान करने पर विचार किया जाए। उन्हें संबंधित विभाग में उपलब्ध वैकेंसी के आधार पर एडजस्ट किया जाएगा। यदि वैकेंसी उपलब्ध नहीं है, तो दो महीने के अंदर स्कूल चॉइस फिलिंग पॉलिसी के अनुसार उन्हें दूसरे विभाग में एडजस्ट किया जाएगा।
