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MP: रेलवे में 4.47 लाख के गबन के आरोपों में घिरी महिला अधिकारी को हाईकोर्ट से झटका, अग्रिम जमानत खारिज
Sun, 23 Aug 2026 09:53 AM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
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Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Sun, 23 Aug 2026 09:53 AM IST
सार
जबलपुर हाईकोर्ट ने इटारसी रेलवे स्टेशन पर 4.47 लाख रुपये के कथित गबन के मामले में आरोपी महिला रेलवे अधिकारी भावना राय की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि रेलवे कर्मचारियों की मिलीभगत और पूर्व निर्धारित साजिश के आरोपों में उनकी भूमिका को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।
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जबलपुर हाईकोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
जबलपुर हाईकोर्ट जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि अग्रिम जमानत प्रदान करने के पूर्व तथ्यों और जांच की जरूरतों को ध्यान में रखना आवश्यक है। रेलवे विभाग की कैश राशि का गबन गंभीर आरोप है। सोची-समझी साजिश के आरोप की जांच में याचिकाकर्ता महिला अधिकारी की भूमिका अभी तक पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हुई है। एकलपीठ ने उक्त आदेश के साथ महिला अधिकारी को अग्रिम जमानत का लाभ देने से इनकार कर दिया।
एक साल बाद दर्ज कराई थी रिपोर्ट
याचिकाकर्ता भावना राय की तरफ से अग्रिम जमानत के लिए दायर आवेदन में कहा गया था कि वह रेलवे विभाग में चीफ बुकिंग सुपरवाइजर के पद पर पदस्थ हैं। इटारसी रेलवे स्टेशन पर पांच दिसंबर 2024 से 6 दिसंबर 2024 के बीच रेलवे टिकटों से प्राप्त 4,47,706 रुपये नकद के कथित गबन के आरोप में कुमारी रिंकी पटेल (असिस्टेंट चीफ बुकिंग सुपरवाइजर), भावना राय (चीफ बुकिंग सुपरवाइजर, इटारसी) और अनिल कुमार राय (स्टेशन मैनेजर) के खिलाफ एक साल बाद 15 जनवरी 2026 को रिपोर्ट दर्ज करवाई गई।
सार्वजनिक धन के गबन के आरोपों की जांच जारी
जिस अवधि में राशि का गबन हुआ, उस दौरान वह अवकाश पर थीं। उनकी पेमेंट एक लाख रुपये प्रतिमाह से अधिक है और महज साढ़े चार लाख रुपये की राशि के लिए वह अपने करियर, पेंशन और सामाजिक प्रतिष्ठा को दांव पर कैसे लगा सकती हैं। विभागीय जांच में अन्य व्यक्ति को दोषी माना गया है। शासन की तरफ से अग्रिम जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा गया कि अपराध रेलवे कर्मचारियों की मिलीभगत से पूर्व निर्धारित साजिश के तहत किया गया था। याचिकाकर्ता के अवकाश पर रहने के कारण यह नहीं माना जा सकता है कि उसका अपराध से कोई संबंध नहीं था। उसकी और अन्य आरोपियों की अपराध में सटीक भूमिका की जांच अभी बाकी है। साजिश और सार्वजनिक धन के गबन के गंभीर आरोपों की जांच जारी है।
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ये भी पढ़ें- MP Weather Today: पूर्वी एमपी में बारिश ने बढ़ाई मुसीबत, नदी-नाले उफान पर, 14 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट
एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि अग्रिम जमानत आवेदन पर सुनवाई के दौरान सबूतों का विस्तार से विश्लेषण करना उचित नहीं है। रेलवे कर्मचारियों की मिलीभगत से पहले से रची गई साजिश में उसकी कथित भूमिका को पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता है। विभागीय कार्यवाही और आपराधिक जांच अलग-अलग क्षेत्रों में होती हैं। विभागीय जांच में दर्ज निष्कर्ष एक अहम बात हो सकती है, लेकिन यह उस व्यक्ति की आपराधिक जवाबदेही तय नहीं करती, जिस पर साजिश का आरोप है। आरोपी व्यक्तियों तथा संबंधित रेलवे रिकॉर्ड और लेन-देन के बीच कथित संबंध की जांच के लिए पूछताछ की जरूरत को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता। एकलपीठ ने उक्त आदेश के साथ अग्रिम जमानत आवेदन को खारिज कर दिया।
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एक साल बाद दर्ज कराई थी रिपोर्ट
याचिकाकर्ता भावना राय की तरफ से अग्रिम जमानत के लिए दायर आवेदन में कहा गया था कि वह रेलवे विभाग में चीफ बुकिंग सुपरवाइजर के पद पर पदस्थ हैं। इटारसी रेलवे स्टेशन पर पांच दिसंबर 2024 से 6 दिसंबर 2024 के बीच रेलवे टिकटों से प्राप्त 4,47,706 रुपये नकद के कथित गबन के आरोप में कुमारी रिंकी पटेल (असिस्टेंट चीफ बुकिंग सुपरवाइजर), भावना राय (चीफ बुकिंग सुपरवाइजर, इटारसी) और अनिल कुमार राय (स्टेशन मैनेजर) के खिलाफ एक साल बाद 15 जनवरी 2026 को रिपोर्ट दर्ज करवाई गई।
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सार्वजनिक धन के गबन के आरोपों की जांच जारी
जिस अवधि में राशि का गबन हुआ, उस दौरान वह अवकाश पर थीं। उनकी पेमेंट एक लाख रुपये प्रतिमाह से अधिक है और महज साढ़े चार लाख रुपये की राशि के लिए वह अपने करियर, पेंशन और सामाजिक प्रतिष्ठा को दांव पर कैसे लगा सकती हैं। विभागीय जांच में अन्य व्यक्ति को दोषी माना गया है। शासन की तरफ से अग्रिम जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा गया कि अपराध रेलवे कर्मचारियों की मिलीभगत से पूर्व निर्धारित साजिश के तहत किया गया था। याचिकाकर्ता के अवकाश पर रहने के कारण यह नहीं माना जा सकता है कि उसका अपराध से कोई संबंध नहीं था। उसकी और अन्य आरोपियों की अपराध में सटीक भूमिका की जांच अभी बाकी है। साजिश और सार्वजनिक धन के गबन के गंभीर आरोपों की जांच जारी है।
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एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि अग्रिम जमानत आवेदन पर सुनवाई के दौरान सबूतों का विस्तार से विश्लेषण करना उचित नहीं है। रेलवे कर्मचारियों की मिलीभगत से पहले से रची गई साजिश में उसकी कथित भूमिका को पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता है। विभागीय कार्यवाही और आपराधिक जांच अलग-अलग क्षेत्रों में होती हैं। विभागीय जांच में दर्ज निष्कर्ष एक अहम बात हो सकती है, लेकिन यह उस व्यक्ति की आपराधिक जवाबदेही तय नहीं करती, जिस पर साजिश का आरोप है। आरोपी व्यक्तियों तथा संबंधित रेलवे रिकॉर्ड और लेन-देन के बीच कथित संबंध की जांच के लिए पूछताछ की जरूरत को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता। एकलपीठ ने उक्त आदेश के साथ अग्रिम जमानत आवेदन को खारिज कर दिया।
