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इंदौरः हेड कांस्टेबल की संपत्ति 64 करोड़ पार, पत्नी के नाम पर खरीदी बेशकीमती जमीनें
Mon, 19 Oct 2026 08:13 PM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Mon, 19 Oct 2026 08:13 PM IST
सार
इंदौर में लोकायुक्त पुलिस की छापेमारी के बाद जांच में 64 करोड़ रुपये की 46 अचल संपत्तियों का खुलासा हुआ है, जो हेड कांस्टेबल फिरोज खान और उनके सहयोगियों से जुड़ी हैं।
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हेड कांस्टेबल की अकूत संपत्ति देख लोकायुक्त पुलिस भी हैरान।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
विस्तार
इंदौर में लोकायुक्त पुलिस द्वारा हेड कांस्टेबल फिरोज खान के मामले में की गई हालिया कार्रवाई और उसके बाद सामने आई विस्तृत जांच में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। इस मामले में पुलिस ने कई अचल संपत्तियों का पता लगाया है, जिनकी बाजार में अनुमानित कीमत 64 करोड़ रुपये आंकी गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात की जानकारी सोमवार को साझा की है।
अधिकारी के अनुसार, ये सभी संपत्तियां पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय (PTC) में पदस्थ हेड कांस्टेबल फिरोज खान उनके परिवार के सदस्यों, करीबी साथियों और उनसे जुड़ी विभिन्न कंपनियों के नाम पर दर्ज हैं। इस खुलासे के बाद से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है और मामले की गहराई से छानबीन की जा रही है।
विवादित संपत्तियों के सौदों और ड्यूटी से गैरहाजिरी का मामला
लोकायुक्त डीएसपी सुनील टालन ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि इंदौर के पुलिस प्रशिक्षण कॉलेज में ड्राइवर के रूप में तैनात हेड कांस्टेबल फिरोज खान के खिलाफ एक गंभीर शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत में मुख्य तौर पर यह आरोप लगाया गया था कि संबंधित हेड कांस्टेबल लंबे समय से अपनी ड्यूटी से लगातार नदारद चल रहे थे। इसके अलावा, उन्होंने पुलिस विभाग में अपने पद और रसूख का इस्तेमाल करके बड़े पैमाने पर विवादित संपत्तियों के सौदों को अंजाम दिया था।
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भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला हुआ दर्ज
लोकायुक्त पुलिस के जिम्मेदार अधिकारियों ने बताया कि जब इस शिकायत की प्रारंभिक और तथ्यात्मक जांच की गई, तो आरोपों में सच्चाई पाई गई। इसके बाद, आरोपी हेड कांस्टेबल और उनकी करीबी सहयोगी रोशनी वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम के सुसंगत प्रावधानों के तहत औपचारिक मामला दर्ज कर लिया गया। कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए पुलिस ने आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू की और आरोपियों के ठिकानों पर दबिश देने की योजना बनाई।
इंदौर और देवास जिलों में कई ठिकानों पर की गई थी छापेमारी
बीती 14 अक्टूबर को लोकायुक्त पुलिस की विशेष टीमों ने इंदौर और देवास जिलों में सुनियोजित तरीके से छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया। यह छापे मुख्य रूप से आरोपी हेड कांस्टेबल, उनके परिवार के सदस्यों, व्यावसायिक साथियों और उनसे जुड़ी निजी कंपनियों के विभिन्न ठिकानों पर मारे गए थे। इस दौरान पुलिस टीमों ने मौके से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, फाइलें और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए, जिनकी मदद से संपत्ति के इस बड़े साम्राज्य का पर्दाफाश हुआ है।
सरकारी और बाजार दरों में भारी अंतर का हुआ खुलासा
टालन ने आगे बताया कि अब तक की गई विस्तृत जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि हेड कांस्टेबल, उनके परिजनों, साथियों और निजी कंपनियों के नाम पर कुल 46 अचल संपत्तियां खरीदी गई हैं। इन संपत्तियों में अलग-अलग स्थानों पर बने मकान, कृषि भूमि, तथा आवासीय और व्यावसायिक भूखंड शामिल हैं। सरकारी दस्तावेजों और निर्धारित दरों के हिसाब से इन सभी संपत्तियों की कुल कीमत 17 करोड़ 19 लाख रुपये बैठती है, जबकि इनकी मौजूदा अनुमानित बाजार कीमत 64 करोड़ एक लाख रुपये से भी अधिक है।
निजी कंपनियों के नाम पर खरीदी गई थी कृषि भूमि
छापेमारी के बाद की गई निरंतर जांच के दौरान पुलिस अधिकारियों को कुछ और नई संपत्तियों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं। इनमें इंदौर जिले के अलग-अलग हिस्सों में एक निजी कंपनी के नाम पर खरीदी गई कृषि भूमि का मामला भी शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि यह विशेष कंपनी आरोपी हेड कांस्टेबल की पत्नी हीना और युवराज पंवार नाम के एक अन्य व्यक्ति द्वारा आपस में मिलकर संचालित की जा रही थी, जिसके माध्यम से संपत्तियों के सौदे किए जाते थे।
सेवाकाल के दौरान कुल वैध आय और आगे की जांच जारी
पुलिस विभाग में अपने 24 साल के लंबे सेवाकाल के दौरान, वेतन के रूप में हेड कांस्टेबल की कुल कमाई लगभग 75 लाख रुपये आंकी गई है। इसके अलावा, अन्य सभी वैध स्रोतों से होने वाली आय को यदि मिला लिया जाए, तो उनकी कुल वैध कमाई लगभग एक करोड़ 94 लाख रुपये बनती है। फिलहाल हेड कांस्टेबल और उनके सभी सहयोगियों से कथित तौर पर जुड़ी इन बेनामी और संदिग्ध संपत्तियों के मामले में लोकायुक्त पुलिस की गहन जांच अभी भी लगातार जारी है।
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अधिकारी के अनुसार, ये सभी संपत्तियां पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय (PTC) में पदस्थ हेड कांस्टेबल फिरोज खान उनके परिवार के सदस्यों, करीबी साथियों और उनसे जुड़ी विभिन्न कंपनियों के नाम पर दर्ज हैं। इस खुलासे के बाद से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है और मामले की गहराई से छानबीन की जा रही है।
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विवादित संपत्तियों के सौदों और ड्यूटी से गैरहाजिरी का मामला
लोकायुक्त डीएसपी सुनील टालन ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि इंदौर के पुलिस प्रशिक्षण कॉलेज में ड्राइवर के रूप में तैनात हेड कांस्टेबल फिरोज खान के खिलाफ एक गंभीर शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत में मुख्य तौर पर यह आरोप लगाया गया था कि संबंधित हेड कांस्टेबल लंबे समय से अपनी ड्यूटी से लगातार नदारद चल रहे थे। इसके अलावा, उन्होंने पुलिस विभाग में अपने पद और रसूख का इस्तेमाल करके बड़े पैमाने पर विवादित संपत्तियों के सौदों को अंजाम दिया था।
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भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला हुआ दर्ज
लोकायुक्त पुलिस के जिम्मेदार अधिकारियों ने बताया कि जब इस शिकायत की प्रारंभिक और तथ्यात्मक जांच की गई, तो आरोपों में सच्चाई पाई गई। इसके बाद, आरोपी हेड कांस्टेबल और उनकी करीबी सहयोगी रोशनी वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम के सुसंगत प्रावधानों के तहत औपचारिक मामला दर्ज कर लिया गया। कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए पुलिस ने आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू की और आरोपियों के ठिकानों पर दबिश देने की योजना बनाई।
इंदौर और देवास जिलों में कई ठिकानों पर की गई थी छापेमारी
बीती 14 अक्टूबर को लोकायुक्त पुलिस की विशेष टीमों ने इंदौर और देवास जिलों में सुनियोजित तरीके से छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया। यह छापे मुख्य रूप से आरोपी हेड कांस्टेबल, उनके परिवार के सदस्यों, व्यावसायिक साथियों और उनसे जुड़ी निजी कंपनियों के विभिन्न ठिकानों पर मारे गए थे। इस दौरान पुलिस टीमों ने मौके से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, फाइलें और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए, जिनकी मदद से संपत्ति के इस बड़े साम्राज्य का पर्दाफाश हुआ है।
सरकारी और बाजार दरों में भारी अंतर का हुआ खुलासा
टालन ने आगे बताया कि अब तक की गई विस्तृत जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि हेड कांस्टेबल, उनके परिजनों, साथियों और निजी कंपनियों के नाम पर कुल 46 अचल संपत्तियां खरीदी गई हैं। इन संपत्तियों में अलग-अलग स्थानों पर बने मकान, कृषि भूमि, तथा आवासीय और व्यावसायिक भूखंड शामिल हैं। सरकारी दस्तावेजों और निर्धारित दरों के हिसाब से इन सभी संपत्तियों की कुल कीमत 17 करोड़ 19 लाख रुपये बैठती है, जबकि इनकी मौजूदा अनुमानित बाजार कीमत 64 करोड़ एक लाख रुपये से भी अधिक है।
निजी कंपनियों के नाम पर खरीदी गई थी कृषि भूमि
छापेमारी के बाद की गई निरंतर जांच के दौरान पुलिस अधिकारियों को कुछ और नई संपत्तियों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं। इनमें इंदौर जिले के अलग-अलग हिस्सों में एक निजी कंपनी के नाम पर खरीदी गई कृषि भूमि का मामला भी शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि यह विशेष कंपनी आरोपी हेड कांस्टेबल की पत्नी हीना और युवराज पंवार नाम के एक अन्य व्यक्ति द्वारा आपस में मिलकर संचालित की जा रही थी, जिसके माध्यम से संपत्तियों के सौदे किए जाते थे।
सेवाकाल के दौरान कुल वैध आय और आगे की जांच जारी
पुलिस विभाग में अपने 24 साल के लंबे सेवाकाल के दौरान, वेतन के रूप में हेड कांस्टेबल की कुल कमाई लगभग 75 लाख रुपये आंकी गई है। इसके अलावा, अन्य सभी वैध स्रोतों से होने वाली आय को यदि मिला लिया जाए, तो उनकी कुल वैध कमाई लगभग एक करोड़ 94 लाख रुपये बनती है। फिलहाल हेड कांस्टेबल और उनके सभी सहयोगियों से कथित तौर पर जुड़ी इन बेनामी और संदिग्ध संपत्तियों के मामले में लोकायुक्त पुलिस की गहन जांच अभी भी लगातार जारी है।
