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इंदौर : 100 साल पुरानी झांकियों की पंरपरा फिर निभाएगा इंदौर, रात भर जागेगा शहर

Thu, 24 Sep 2026 06:57 PM IST
Abhishek Chendke न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Abhishek Chendke Updated Thu, 24 Sep 2026 06:57 PM IST
सार

इंदौर की सड़कों पर शुक्रवार रात झांकियों की भव्य परंपरा जीवंत होगी। श्रमिक क्षेत्र और शहर के मध्य हिस्से से अखाड़ों के साथ 22 झांकियां निकलेंगी, जो राजवाड़ा और गोराकुंड का चक्कर लगाकर वापस मिल परिसरों की ओर लौटेंगी।

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Indore: Indore to uphold the 100-year-old tradition of tableaux once again; the city will stay awake all night
इस बार भी धार्मिंक झांकियां - फोटो : amarujala

विस्तार

इंदौर में रंगपंचमी और झांकियों की परंपरा एक त्योहार का रूप ले चुकी है। तब यहां स्थानीय अवकाश रखा जाता है और शहरवासी परंपरा का हिस्सा बनने के लिए घरों से निकलते हैं। शुक्रवार को फिर यह परंपरा निभाई जाएगी। एक साथ शहर के श्रमिक क्षेत्र और मध्य हिस्से में अखाड़ों के साथ 22 झांकियां एक के बाद एक निकलेंगी। उन्हें देखने के लिए लाखों लोग रातभर जागेंगे। मिलों से निकलने वाली झांकियां राजवाड़ा, गोराकुंड का चक्कर लगाते हुए फिर मिलों की तरफ लौटेंगी।
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मालवा मिल की झांकी पर्यावरण से जुड़ी। - फोटो : amarujala

धार्मिक झांकी निकालने की शुरुआत सर सेठ हुकुमचंद ने वर्ष 1924 में की थी। पहली झांकी बैलगाड़ी पर निकाली गई थी। तब से यह धार्मिक पर्व मिल श्रमिक बड़े धूमधाम से मनाते आ रहे हैं। इंदौर की सभी कपड़ा मिलें बंद होने के बाद भी सभी मिलों की गणेश उत्सव समितियां जनसहयोग से यह धार्मिक त्योहार और 10 दिवसीय गणेश उत्सव मनाती आ रही हैं।

हुकुमचंद मिल गणेश उत्सव का यह 103वां वर्ष है। मिल चालू थी, तब सभी श्रमिक, कर्मचारी और अधिकारी अपना एक दिन का वेतन देते थे और गणेश महोत्सव पर्व मनाते थे। दुर्भाग्यपूर्ण है कि इंदौर की सभी कपड़ा मिलें बंद हो गईं, लेकिन परंपरा नहीं टूटी। जनसहयोग से धार्मिक झांकियों का निर्माण श्रमिक करते हैं। नगर निगम, इंदौर विकास प्राधिकरण और खजराना मंदिर के अलावा अन्य संस्थाओं की झांकियां भी इसमें हिस्सेदारी करती हैं।शुक्रवार को रात से सुबह तक दस घंटे झांकियां सड़कों पर रहेंगी।

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00 साल पुरानी झांकियों की पंरपरा - फोटो : amarujala
इंदौर की बंद मिलों में भी इस बार ज्यादातर झांकियां धार्मिक प्रसंगों पर ही बन रही हैं। भगवान गणेश, देश की सीमा की रक्षा करते सैनिकों के अलावा शहर के विकास और पर्यावरण से जुड़ी झांकियां भी दर्शकों को लुभाएंगी। चल समारोह के बाद तीन दिन तक झांकियां मिल परिसरों में खड़ी रहेंगी और लोग इन्हें देखने आएंगे।
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