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यूपी: 1.70 लाख से अधिक शिक्षणेत्तर कर्मियों को मिला कैशलेस चिकित्सा का तोहफा, कैबिनेट में मिली हरी झंडी

Tue, 27 Oct 2026 01:56 PM IST
Akash Dwivedi डिजिटल डेस्क, लखनऊ
डिजिटल डेस्क, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Tue, 27 Oct 2026 01:56 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने बेसिक, माध्यमिक और संस्कृत शिक्षा विभागों के 1,70,366 शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और उनके आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की मंजूरी दी है। योजना के तहत सरकारी और संबद्ध निजी अस्पतालों में भर्ती होकर इलाज कराया जा सकेगा। इस पर राज्य सरकार सालाना लगभग 51.11 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

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UP: Over 1.70 lakh non-teaching staff receive the gift of cashless medical care; proposal gets the green light
यूपी कैबिनेट बैठक। - फोटो : amar ujala

विस्तार

उत्तर प्रदेश में बेसिक, माध्यमिक और संस्कृत शिक्षा विभाग के 1,70,366 शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और उनके आश्रित परिजनों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इसके तहत कर्मचारी सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ योजना से संबद्ध निजी अस्पतालों में भी कैशलेस इलाज करा सकेंगे।

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सरकार वहन करेगी 51.11 करोड़ रुपये का वार्षिक खर्च

अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने बताया कि योजना के लिए राज्य सरकार प्रति कर्मचारी 3,000 रुपये वार्षिक प्रीमियम देगी। इस पर कुल 51.11 करोड़ रुपये का वार्षिक वित्तीय भार आएगा। योजना का संचालन स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) के माध्यम से किया जाएगा।

कैशलेस उपचार की सुविधा इनडोर पेशेंट डिपार्टमेंट (आईपीडी) यानी अस्पताल में भर्ती होकर कराए जाने वाले इलाज के लिए होगी। उपचार आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की अनुमोदित दरों के अनुसार उपलब्ध कराया जाएगा।

 

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बेसिक शिक्षा के 1.22 लाख कर्मियों को लाभ

बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने बताया कि परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों, अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों, वित्तविहीन विद्यालयों और समग्र शिक्षा परियोजना में कार्यरत 1,22,304 शिक्षणेत्तर कर्मचारी इस फैसले से लाभान्वित होंगे। इनके लिए सरकार लगभग 36.69 करोड़ रुपये का वार्षिक प्रीमियम वहन करेगी।

उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस, 5 सितंबर 2025 को मुख्यमंत्री ने बेसिक शिक्षा परिवार को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की घोषणा की थी। कैबिनेट की मंजूरी के साथ इस घोषणा को लागू करने का रास्ता साफ हो गया है।

 

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माध्यमिक और संस्कृत शिक्षा के 48 हजार से अधिक कर्मियों को भी राहत

माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने बताया कि अशासकीय सहायता प्राप्त और वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों, संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों और संस्कृत महाविद्यालयों में कार्यरत 48,062 शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी योजना का लाभ मिलेगा।

इनके लिए सरकार करीब 14.42 करोड़ रुपये का वार्षिक खर्च उठाएगी। योजना के तहत कर्मचारियों और उनके आश्रित परिजनों को सरकारी अस्पतालों तथा साचीज से संबद्ध निजी अस्पतालों में निर्धारित दरों पर कैशलेस आईपीडी उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।

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