यूपी: फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र से हासिल किए 3003 करोड़ के ठेके, ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी; जानिए पूरी डिटेल
उत्तर प्रदेश में जीएस एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड पर कथित फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र के आधार पर 3003 करोड़ रुपये से अधिक के निर्माण कार्य हासिल करने का आरोप है। जांच में एक प्रमाणपत्र को अवैध बताया गया। नियोजन विभाग ने कंपनी से 14 दिन में जवाब मांगा है। जवाब के आधार पर अनुबंध निरस्त करने और ब्लैकलिस्ट करने पर निर्णय होगा।
विस्तार
उत्तर प्रदेश में निर्माण कार्यों के ठेके हासिल करने के लिए फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र लगाने के आरोप में जीएस एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड घिर गई है। कंपनी पर इस प्रमाणपत्र के आधार पर 3003 करोड़ रुपये से अधिक के निर्माण कार्य हासिल करने का आरोप है।
प्रदेश में कंपनी को 41 निर्माण कार्य आवंटित किए गए हैं। नियोजन विभाग के ईपीसी मिशन की जांच में सिद्धार्थनगर स्थित सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के निर्माण कार्य से संबंधित अनुभव प्रमाणपत्र विवादित पाया गया। उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम की अयोध्या इकाई ने स्पष्ट किया कि संबंधित प्रमाणपत्र उसके कार्यालय से जारी नहीं हुआ था।
ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई क्यों न की जाए?
नियोजन विभाग के ईपीसी मिशन के अधीक्षण अभियंता राजेश कुमार ने कंपनी को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। इसमें पूछा गया है कि निविदा शर्तों के उल्लंघन के आरोप में कंपनी को जारी आशय पत्र (एलओए) व अनुबंध निरस्त करने और भविष्य की निविदाओं से प्रतिबंधित कर ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई क्यों न की जाए।
कंपनी ने गोरखपुर में वानिकी एवं उद्यानिकी विश्वविद्यालय, कानपुर में लाला लाजपत राय चिकित्सालय परिसर के ट्रामा सेंटर को 200 बेड के एपेक्स ट्रामा सेंटर के रूप में विकसित करने और आगरा में 450 शैय्या वाले लेडी लायल महिला चिकित्सालय के निर्माण की निविदाओं में तकनीकी बोली के साथ सिद्धार्थ विवि, कपिलवस्तु के निर्माण का अनुभव प्रमाणपत्र लगाया था।
नियोजन विभाग के अनुसार, इस प्रमाणपत्र के आधार पर कंपनी को तकनीकी मूल्यांकन में सफल घोषित किया गया। गोरखपुर परियोजना के लिए तीन सितंबर 2026 को अनुबंध हुआ, जबकि आगरा परियोजना के लिए 24 अगस्त 2026 को आशय पत्र जारी किया गया। नोटिस में इन दोनों परियोजनाओं की निविदाओं और अनुबंधों का उल्लेख करते हुए जवाब मांगा गया है।
14 दिन में जवाब देने का निर्देश
उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम की अयोध्या इकाई ने नौ अक्तूबर को जारी पत्र में अनुभव प्रमाणपत्रों के सत्यापन की स्थिति स्पष्ट की। इकाई के चार अक्तूबर 2026 के पत्र में भी जांच का उल्लेख है। निगम के अनुसार, सिद्धार्थ विवि के निर्माण कार्य के संबंध में 12 अप्रैल 2019 को जारी प्रमाणपत्र वैध था, लेकिन 21 अक्तूबर 2019 के प्रमाणपत्र को उसने जारी करने से इन्कार करते हुए अवैध बताया। यही प्रमाणपत्र विभागीय कार्रवाई का प्रमुख आधार है।
नोटिस में निविदा की शर्तों, अयोग्यता संबंधी प्रावधानों और इंटीग्रिटी पैक्ट का हवाला दिया गया है। इसमें फर्जी दस्तावेज लगाने, तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत करने और निविदा प्रक्रिया प्रभावित करने को गंभीर उल्लंघन माना गया है।
अधीक्षण अभियंता राजेश कुमार ने कंपनी को 14 दिन में जवाब देने का निर्देश दिया है। जवाब के आधार पर आशय पत्र व अनुबंध निरस्त करने, भविष्य की निविदाओं में भाग लेने से रोकने और ब्लैकलिस्ट करने पर निर्णय होगा। गंभीर अनियमितता मिलने पर संबंधित एजेंसियों को जांच के लिए सूचना भी दी जा सकती है।