दिखावे की महफ़िल में सादगी का अक्स ढूँढता हूँ,
इस मतलबी भीड़ में कोई अपना शख़्स ढूँढता हूँ।
बातों में चालाकी न हो, बस भाव में अपनापन हो,
मैं इस बदलते दौर में वो सच्ची ज़िंदगी ढूँढता हूँ।"
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