बंकिम चन्द्र चटर्जी द्वारा सृजित राष्ट्रगीत वन्दे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने के शुभ अवसर पर विगत एक वर्ष से देश भर में अनेकानेक कार्यक्रम / उपक्रम आदि हो रहे हैं। मुहब्बतों के शायर रमेश कँवल ने भी इस यज्ञ में अपनी ओर से आहुति समर्पित करने का सफल उद्यम किया है।
“वन्दे मातरम स्तुति संग्रह” नामक इस पुस्तक में प्रसिद्ध ग़ज़लकार कृष्ण कुमार ‘नाज़’, विजय कुमार स्वर्णकार, ज़ाहिद अबरोल, कविता कोश की सह निदेशिका शारदा सुमन एवं रमेश कँवल ने राष्ट्रगीत वन्देमातरम एवम इस पुस्तक की परिकल्पना आदि विषयों पर यथेष्ट प्रकाश डाला है।
श्री अरबिन्दो द्वारा किया गया अंग्रेजी अनुवाद, जनाब ज़ाहिद अबरोल द्वारा किया गया उर्दू अनुवाद एवं नवीन सी चतुर्वेदी द्वारा मूल राग में किया गया भावानुवाद इस पुस्तक को और भी विशिष्ट बना रहे हैं।
राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् का मूल राग में भावानुवाद
वन्दे मातरम्
सुजले सुफले शीतल मलय पवन
ओ हरी भरी मातु मम
वन्दे मातरम्
रात्रि बिखेरे चमचम चाँदनी
और धरती मह मह महक रही
सदा सुखी रसना है शहद सनी
सुख वर दात्री मातु मम
वन्दे मातरम्
कोटि कोटि कण्ठ पल पल बखान सुनाएं
कोटि कोटि हुतात्मा बिछ बिछ जाएं
अबला है तू कौन कहे
बहुबल धारिणी नमामि तारिणी
रिपुदल वारिणी मातु मम
वन्दे मातरम्
वन्दे मातरम्
तू ही विद्या तू ही धर्म
तू ही हृदय तू ही मर्म
तू ही प्राण है तन भी
तू ही है बल बाँहों का
उर में तेरी ही भक्ति
तेरी ही प्रतिमा
मन्दिरों में स्थापित है माँ
वन्दे मातरम्
तू ही दुर्गा
दस भुज आयुध हैं सजे
लक्ष्मी कमल पर विराजती
वाणी विद्या दायिनी तुझे नमन
नमामि कमले अमले अतुले
सुजले सुफले मातु मम
वन्दे मातरम्
श्यामले सरले सुष्मिते भूषिते
धरणी भरणी मातु मम
वन्दे मातरम्
57 रचनाधर्मियों द्वारा सृजित वन्देमातरम रदीफ़ के साथ सृजित रचनाओं से सुसज्जित यह अनूठा ग्रन्थ रमेश जी द्वारा प्रदत्त एक अनुपम भेंट समान है। इस महत्कर्म के लिए उनकी जितनी भी प्रशंसा की जाय कम ही होगी।
पुस्तक नाम – वन्देमातरम स्तुति संग्रह
प्रकाशक – श्वेतवर्णा प्रकाशन
सम्पादक – रमेश कँवल
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