यूसीसी को लेकर सीएम उमर का बड़ा बयान, जम्मू-कश्मीर में लागू करने से किया साफ इनकार, बोले- संसद में लाएं विधेयक
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) किसी भी कीमत पर लागू नहीं किया जाएगा और केंद्र को इसे संसद में विधेयक के रूप में लाना चाहिए।
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मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) जम्मू-कश्मीर में किसी भी कीमत पर लागू नहीं किया जाएगा। पूरे देश के लिए ऐसे कानून पर संसद में बहस होनी चाहिए और इसे वहीं पारित किया जाना चाहिए। उन्होंने भाजपा व केंद्र सरकार को चुनौती दी कि यदि हिम्मत है तो वे संसद में विधेयक लेकर आएं।
पत्रकारों से बातचीत में उमर ने कहा कि कोई भी कानून तब तक सही मायने में यूनिफॉर्म (एकसमान) नहीं कहा जा सकता जब तक वह पूरे देश में एक साथ लागू न हो। भाजपा शासित राज्य इसे टुकड़ों में लागू कर रहे हैं जो पूरी तरह से गलत है। केंद्र इसे अलग-अलग राज्यों के माध्यम से लागू करने के बजाय सीधे संसद में विधेयक के रूप में पेश करें। उन्होंने कहा कि बिहार में भी सत्ताधारी दल ने इसे लागू न करने की बात कही है। जम्मू-कश्मीर सरकार भी इसे अपने यहां लागू नहीं करेगी।
वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों पर सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद
इंडिया ब्लॉक के सांसदों के चुनाव आयोग कार्यालय तक मार्च करने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के आरोपों पर उमर ने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को लंबे समय से उठा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले को पूरी गंभीरता से लिया है। अब यह देखना बाकी है कि चुनाव आयोग और केंद्र सरकार से जवाब मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट इसे सुधारने के लिए क्या कदम उठाता है।
रोहिंग्याओं पर अचानक से हुई कार्रवाई अजीब
बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं पर कार्रवाई पर उमर ने कहा कि रोहिंग्याओं को जब उनके अपने देश से खदेड़ा गया था तब मानवीय आधार पर उन्हें यहां शरण और रहने की जगह दी गई थी। अब अचानक उनके खिलाफ इस तरह की कार्रवाई करना काफी अजीब लगता है। हालांकि, कानून-व्यवस्था के पहलू के मद्देनजर बिना दस्तावेज अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशियों का मामला अलग है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पुलिस और कानून-व्यवस्था केंद्र और उपराज्यपाल के अधीन है।