नेकां में बगावत की चिंगारी पड़ी ठंडी: फारूक के घर दो घंटे की बैठक के बाद बनी बात, एकजुट दिखे 15 नाराज विधायक
कैबिनेट फेरबदल से नाराज नेशनल कॉन्फ्रेंस के 15 विधायकों के साथ फारूक और उमर अब्दुल्ला की बैठक के बाद सुलह के संकेत मिले हैं। फारूक ने पार्टी में टूट की अटकलों को खारिज करते हुए भरोसा दिया कि विधायकों की शिकायतें दूर कर संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाया जाएगा।
विस्तार
नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर 27 अक्तूबर से सुलग रही बगावत की चिंगारी 11वें दिन शुक्रवार को ठंडी नजर आई। उमर कैबिनेट के मौजूदा फेरबदल से नाराज 15 विधायकों की पार्टी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला के गुपकार रोड स्थित आवास पर बंद कमरे में करीब दो घंटे चली मैराथन बैठक में सुलह का रास्ता निकल आया। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की माैजूदगी में असंतुष्टों की बात सुनी गई। निर्दलीयों को बैठक से दूर रखा गया। बातचीत के बाद सभी विधायक पार्टी आलाकमान के साथ बाहर आए। फारूक ने नेकां में अंदरूनी कलह को खारिज किया, कहा- पार्टी एकजुट है। विधायकों की चिंताएं वाजिब हैं, जिन्हें दूर किया जाएगा।
करीब दो घंटे चली गहन चर्चा के दौरान विधायकों ने प्रशासनिक उपेक्षा, हालिया कैबिनेट विस्तार में वरिष्ठता की अनदेखी और संगठन के भीतर संवादहीनता को लेकर अपनी शिकायतें दर्ज कराईं। शीर्ष नेतृत्व ने आश्वस्त किया कि संगठन व सरकार के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। बैठक के बाद फारूक, उमर और सभी 15 विधायक एक साथ बाहर आए।
पत्रकारों से बातचीत में फारूक ने कहा कि हमने उनसे (असंतुष्ट विधायकों) बात की है। उनकी चिंताएं जायज थीं और उन पर उचित ध्यान दिया गया है। पार्टी नेतृत्व ने सबकी बात सुनी है और उन्हें हल करने के कदम उठाए जाएंगे। सरकार और पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए कुछ कदम तुरंत और कुछ चरणबद्ध तरीके से उठाए जाएंगे ताकि आम जनता की परेशानियों का समाधान किया जा सके। इसके साथ ही, राज्य के दर्जे की बहाली और अनुच्छेद 370 व 35ए की वापसी के लिए संघर्ष जारी रहेगा और इसे अपने मुकाम तक पहुंचाया जाएगा।
सुरिंदर की कार्यशैली पर विधायकों को ऐतराज
अंदरूनी सूत्रों के अनुसार बैठक में विधायकों ने उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी के पास मौजूद सड़क एवं भवन निर्माण विभाग की कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताया। याद दिलाया कि जून में दाछिगाम की बैठक में भी 20 से अधिक विधायकों ने इस विभाग के कामकाज पर विरोध दर्ज कराया था। इसके बाद भी उनसे यह प्रभार वापस नहीं लिया गया था।
विधायकों की सबसे बड़ी शिकायत यह थी कि मौजूदा कैबिनेट मंत्री जनता और निर्वाचित प्रतिनिधियों के प्रति पूरी तरह लापरवाह बने हुए हैं। विकास कार्यों को लेकर विधायकों की अनदेखी की जा रही है।
विधायकों ने मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी पर संगठन और विधायकों के बीच दीवार खड़ी करने का आरोप लगाते हुए उन्हें हटाने तथा पूरे मंत्रिमंडल का कामकाज के आधार पर पुनर्गठन करने की जोरदार मांग उठाई थी।
कानाफूसी की तो बिफर पड़े उमर
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का गुस्सा भी देखने को मिला। पिछले एक हफ्ते में विधायकों द्वारा गुप्त बैठकें करने और मीडिया में बगावती माहौल बनाने को लेकर उमर ने विधायकों की जमकर क्लास लगाई। सूत्रों ने बताया कि चर्चा के दौरान जब दो विधायक आपस में कानाफूसी कर रहे थे तो उमर ने सबके सामने उन्हें कड़ी फटकार लगाते हुए पार्टी अनुशासन की सीमा में रहने और सरकार की छवि खराब न करने की सख्त हिदायत दी।
फारूक के आवास के बंद कमरे में निशाने पर रहे मंत्री
नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख फारूक अब्दुल्ला के आवास पर नाराज विधायकों की बैठक में मंत्री निशाने पर रहे हैं। दाछिगाम के बाद दूसरी मर्तबा विधायकों ने बंद कमरे की इस बैठक में मंत्रियों का नाम लेकर उनसे विभाग वापस लेने की सिफारिश की है। फारूक ने कहा कि अगले एक से दो सप्ताह में विधायकों की नाराजगी को दूर करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
विभागों को बदलने से इस कदम की शुरुआत होती है तो पुराने मंत्रियों पर गाज गिरना तय है। फारूकके आवास पर नाराज विधायकों ने खुलकर पीडब्ल्यूडी समते दूसरे विभागों में बदलाव की बात कही है। बंद कमरे की इस बैठक से बाहर निकली बातों पर यकीन करें तो विधायकों के निशाने पर सभी पुराने चार मंत्री रहे हैं। इसके अलावा नए बनाए गए मंत्रियों की वरिष्ठता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। फारूक के साथ बैठक के बाद अब्दुल मजीद भट ने बताया कि सभी मुद्दों पर सिलसिलेवार बातचीत हुई है और विधायकों ने अपनी राय फारूक अब्दुल्ला के सामने रख दी है।
उन्होंने बताया कि मंत्रियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। उन्हें आश्वासन मिला है कि जल्द ही मुद्दों का समाधान कर लिया जाएगा। सभी नाराज विधायकों ने पार्टी प्रमुख के फैसलों पर अपनी सहमति जताई है।
मंत्रियों को जवाबदेह होना पड़ेगा विधायकों को हल्के में न लें : लारमी
विधायक अब्दुल मजीद लारमी ने मंत्रियों की जवाबदेही का सवाल उठाते हुए कहा कि मंत्रियों को विधायकों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। मंत्री जनता और जनप्रतिनिधियों के प्रति जवाबदेह हैं। विधायकों की अपेक्षा है कि विभागों में उनके द्वारा उठाए गए मामलों पर गंभीरता से कार्रवाई हो और क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान में अनावश्यक देरी न की जाए। उन्होंने बताया कि बैठक में कुछ मंत्रियों के कामकाज के तौर-तरीकों और मौजूदा विभागों के आवंटन को लेकर भी खुलकर बात हुई है। लारमी ने कहा कि विधायकों की चिंताओं को पार्टी नेतृत्व ने पूरी गंभीरता और संजीदगी से सुना है। डॉ. फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला दोनों ने यह स्वीकार किया कि विधायकों द्वारा उठाए गए मुद्दे पूरी तरह जायज हैं और इन्हें संगठन तथा सरकार के स्तर पर प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाएगा। आगा रुहुल्ला के बयानों पर लारमी ने कहा कि अनुच्छेद 370, 35ए और जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली जैसे बुनियादी मुद्दों पर पूरी पार्टी और वे खुद आगा के साथ खड़े हैं।
ऐसे आंतरिक मसलों को सार्वजनिक मंचों या सोशल मीडिया पर उठाने के बजाय सीधे पार्टी नेतृत्व के समक्ष रखना अधिक प्रभावी और उचित तरीका होता। मंत्रालयों के पोर्टफोलियो में फेरबदल के लिए समय मांगा -लारमी ने कहा कि मंत्रालयों के पोर्टफोलियो में फेरबदल और पीर पंजाल, चिनाब घाटी सहित कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में क्षेत्रीय संतुलन साधने की मांग पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने थोड़ा वक्त मांगा है। लारमी ने इसके साफ संकेत दिए कि आने वाले दिनों में विभागों के प्रभार और सरकारी तंत्र के कामकाज में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा और पीडीपी जैसी पार्टियां नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार को कमजोर करने या गिराने के ख्वाब देख रही हैं, लेकिन उनके मंसूबे कभी पूरे नहीं होंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी विधायक पार्टी की विचारधारा और नेतृत्व के प्रति पूरी निष्ठा रखते हैं और सरकार को आंच तक नहीं आने देंगे।
न कोई गुट बना, न अलग पार्टी बगावत की बातें अफवाह : गुरेजी
नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के शीर्ष नेतृत्व और असंतुष्ट विधायकों के बीच शुक्रवार को हुई बैठक के बाद पार्टी के भीतर चल रहा विवाद सुलझता नजर आ रहा है। गुपकार रोड स्थित डॉ. फारूक अब्दुल्ला के आवास पर हुई मैराथन बैठक के बाद विधायक नजीर अहमद खान गुरेजी ने मीडिया से बातचीत में पार्टी में किसी भी तरह की फूट या अलग गुट के गठन की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर चल रही बगावत की बातें महज अफवाहें हैं और विधायक केवल अपने लोकतांत्रिक अधिकार के तहत अपनी बात रख रहे थे। गुरेजी ने बताया कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और डॉ. फारूक अब्दुल्ला की मौजूदगी में हुई दो घंटे की यह चर्चा बेहद सकारात्मक रही। नेतृत्व ने विधायकों की चिंताओं को गंभीरता से सुना है और राजनीतिक व प्रशासनिक स्तर पर ठोस आश्वासन दिया है। कुछ अहम मुद्दों का समाधान तत्काल प्रभाव से करने तथा नीतिगत मामलों पर चरणबद्ध तरीके से काम करने पर सहमति बनी है।
गौरतलब है कि 27 अक्टूबर को हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद कई कद्दावर नेताओं को जगह न मिलने और क्षेत्रीय असंतुलन के कारण करीब 15 विधायक नाराज चल रहे थे। इस बढ़ती नाराजगी को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने समय रहते डैमेज कंट्रोल कर लिया है।
मांगों पर जल्द दिखेंगे नतीजे : बशीर
नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के भीतर उपजे असंतोष के बीच पार्टी विधायक बशीर वीरी ने शुक्रवार को संकेत दिया कि बागी विधायकों की चिंताओं के समाधान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पार्टी प्रमुख फारूक अब्दुल्ला के आवास पर हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद वीरी ने पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि पार्टी नेतृत्व विधायकों की मांगों को लेकर गंभीर है और जल्द ही इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। वीरी ने कहा कि कुछ मांगों पर तत्काल निर्णय लिया जा सकता है, जबकि प्रशासनिक और नीतिगत जटिलताओं वाले कुछ अन्य मसलों के समाधान में थोड़ा समय लग सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी का मुख्य फोकस चुनाव के दौरान जनता से किए गए वादों को पूरा करने और कामकाज की प्रणाली में सुधार लाने पर है। विधायकों को मंत्रियों तक पहुंच बनाने में आ रही दिक्कतों और काम न होने जैसी शिकायतों पर उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले दिनों में स्थिति में सुधार देखने को मिलेगा। वहीं, अनुच्छेद 370 की बहाली और 2019 में छीने गए अधिकारों के मुद्दे पर वीरी ने पार्टी के रुख को पूरी तरह स्पष्ट किया।
उन्होंने दोहराया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस का शीर्ष नेतृत्व इस एजेंडे को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और अपने रुख से पीछे नहीं हटा है। पार्टी इन महत्वपूर्ण मुद्दों को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।