फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   World Mental Health Day: Why Have States Not Started School Mental Health Policies

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस आज: स्कूलों के लिए नीति पर काम नहीं हुआ शुरू; यूजीसी के दिशा-निर्देश कहां अटके?

Sat, 10 Oct 2026 07:16 AM IST
निर्मल कांत अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 10 Oct 2026 07:16 AM IST
सार

देशभर में छठी से 12वीं तक के 85 फीसदी बच्चे पढ़ाई और परीक्षा के तनाव से जूझ रहे हैं, जबकि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी नीतियां अब भी अधूरी हैं। विशेषज्ञों ने बच्चों में थकान, नींद की कमी, चिड़चिड़ापन और अकेले रहने जैसे लक्षणों को गंभीरता से लेने की सलाह दी है। आखिर बच्चों का तनाव दूर करने के लिए जरूरी कदम उठाने में देरी क्यों हो रही है? पढ़िए इस रिपोर्ट में। 

विज्ञापन
World Mental Health Day: Why Have States Not Started School Mental Health Policies
मानसिक तनाव (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

यदि आपका बच्चा हर समय थका-थका रहता है, उसे कुछ भी अच्छा नहीं लगता, न ठीक से भूख लगती है और न ही नींद आती है, किसी दोस्त या परिजनों से बात करना पसंद नहीं करता या फिर अचानक गुस्से से भर जाता है तो सावधान हो जाएं...यह मानसिक तनाव हो सकता है। अभिभावक के तौर पर डरने या बच्चे को शर्मिंदगी महसूस कराने की जरूरत नहीं है। डायबिटीज, हॉर्ट, लीवर की तरह तनाव भी एक बीमारी है और दवा से ठीक हो जाती है। कहीं बहुत देर न हो जाए...उससे पहले बच्चे को तुरंत मनोचिकित्सक के पास ले जाकर जांच करवाएं।
विज्ञापन


एनसीईआरटी के 2022 के एक सर्वे के मुताबिक, देशभर के सरकारी और निजी स्कूलों में छठी से 12वीं कक्षा के 85 फीसदी बच्चे पढ़ाई और परीक्षा के कारण तनाव से जूझ रहे हैं। सर्वे में 37 फीसदी बच्चों ने कहा कि शिक्षकों के पर्याप्त ध्यान न देने से चिंतित रहते हैं तो 36 फीसदी अपने प्रदर्शन को इससे जोड़ते हैं कि दूसरे लोग उन्हें कितना स्वीकार करते हैं। 31 फीसद परीक्षा और परिणाम को लेकर तनाव में रहते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष उच्च शिक्षण संस्थानों में बढ़ते तनाव के बाद जीवन समाप्त की घटनाओं पर संज्ञान लेते हुए सही कारणों का पता लगाने के लिए नेशनल टॉस्क फोर्स बनाई। वहीं, सभी राज्यों को स्कूलों के लिए मानसिक स्वास्थ्य नीति पर काम करने को भी कहा था, लेकिन अधिकतर राज्यों ने इस पर कोई काम शुरू तक नहीं किया तो कुछ अभी सिर्फ योजना बना रहे हैं। यूजीसी ने वर्ष 2022 में मानसिक स्वास्थ्य दिशा-निर्देश बनाने पर काम शुरू किया था। मसौदा बना पर आज तक लागू नहीं हो पाया है।
विज्ञापन


बिहार, झारखंड, मेघालय, त्रिपुरा और असम अन्य राज्यों के लिए उदाहरण
बिहार, झारखंड, मेघालय, त्रिपुरा, असम शिक्षा में बेशक पिछड़े हो, लेकिन स्कूली बच्चों की मानसिक सेहत दुरुस्त करने पर काम शुरू हो चुका है। वेलबिंग इंडिया फाउंडेशन की वाइस प्रेजीडेंट नंदिता भाटिया कहती है कि इन राज्यों में टीचर वेलबिंग पर काम हो रहा है। बिहार में शिक्षक बनने वाले छात्र इसकी पढ़ाई कर रहे हैं। मेघालय में हेल्थ एजुकेशन किताब में मेंटल हेल्थ लाइफ स्किल पर काम शुरू हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: स्टारलिंक पर डीआरडीओ के पूर्व वैज्ञानिक की चेतावनी: मुफ्त में भी एंट्री न दे भारत; राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा?

मानसिक स्वास्थ्य का नाम आते ही अभिभावकों को लगता है कि बच्चा पागल है या उसका दिमाग खराब हो गया है। जबकि ऐसा नहीं है, यही भ्रांति आम लोगों और अभिभावकों के मन से निकालनी है। यह कोई शर्म की बात नहीं है, बल्कि आम बीमारी की तरह है और दवा, थेरेपी से जल्दी ठीक हो जाती है।
-डॉ. अनुकृति वर्मा, वरिष्ठ सलाहकार मनोचिकित्सक, विमहंस अस्पताल, दिल्ली

हमें राजनीति आती है पर बच्चों की बात समझ नहीं पाते हैं। देश में प्रति एक लाख आबादी पर तीन मनोचिकित्सक की जरूरत है. जबकि अभी करीब 10 हजार मनोचिकित्सक ही हैं। सभी अस्पतालों में एक मनोचिकित्सक होना चाहिए। अमेरिका में प्रति एक लाख पर 12 मनोचिकित्सक होते हैं।

- डॉ. ओमप्रकाश, सीनियर प्रोफेसर, मनोचिकित्सा व विभागाध्यक्ष, जेरियाट्रिक मानसिक स्वास्थ्य विभाग, इहबास, दिल्ली 

चार साल में टेली-मानस पर 42 लाख से अधिक कॉल
  • मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन यानी टेली-मानस राष्ट्रीय टेली मेंटल हेल्थ प्रोग्राम पर पिछले चार साल में 42 लाख से अधिक कॉल आई हैं। 
  • तनाव होने पर कोई भी टोल-फ्री हेल्पलाइन-14416 पर फोन कर मांग सकता है मदद।
  • 24.2 % युवा डिप्रेशन की समस्या से जूझ रहे।
  • 4.5% आत्महत्या का विचार तक आया (पीजीआई चंडीगढ़ की ओर से 18 से 22 वर्ष के युवाओं पर किए गए सर्वे का नतीजा)।

हरियाणा : मानसिक मदद मांगने वालों में 83% 18 से 45 वर्ष वाले 
चंडीगढ़ (आशीष वर्मा)। हरियाणा की टेली मानस हेल्पलाइन के आंकड़े बताते हैं कि मानसिक मदद मांगने वालों में सबसे बड़ा हिस्सा (82.9 फीसदी) 18 से 45 साल के लोगों का है। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मदद लेने वालों में 64.4 फीसदी पुरुष हैं। लेकिन आंकड़ा परिवार, नौकरी और आर्थिक जिम्मेदारियों के बीच मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत को दर्शाता है। इसमें 34.47 फीसदी मामले उदासी और उससे जुड़े लक्षणों के हैं। 24.05 फीसदी शिकायतें परीक्षा, कामकाज और रिश्तों से जुड़े तनाव की हैं।

हिमाचल : तीन वर्ष में मदद मांगने वालों की संख्या 50% तक बढ़ी
शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति फोन (टेली-मानस) से सलाह लेने वालों का आंकड़ा पिछले तीन वर्षों में करीब 50 फीसदी तक बढ़ गया है। इस वर्ष 25 फरवरी तक ही टेली मानस सेवा के माध्यम से 1433 लोग मानसिक स्वास्थ्य संबंधित सलाह ले चुके हैं। वर्ष 2023 में 483, 2024 में 3363, 2025 में 5070 लोगों ने टेली मेडिसिन से मानसिक स्वास्थ्य का उपचार कराया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed