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उर्जा खपत: देश में कमजोर मानसून और गर्मी से पावर सेक्टर से बढ़ा दबाव, जानें अगस्त में कितनी बढ़ी बिजली की मांग

Sun, 13 Sep 2026 07:17 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Sun, 13 Sep 2026 07:17 PM IST
सार

बिजली की मांग बढ़ने का असर थर्मल पावर प्लांट के इस्तेमाल पर भी दिखा। अगस्त 2026 में देश के कुल बिजली उत्पादन में थर्मल पावर की हिस्सेदारी करीब 66 फीसदी रही।
 

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Weak monsoon and heat increase pressure on the power sector
बिजली (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

 देश में कमजोर मानसून और ज्यादा गर्मी का असर बिजली की खपत पर पड़ा है। अगस्त 2026 में बिजली की मांग सालाना आधार पर 12.95 फीसदी बढ़कर करीब 169 अरब यूनिट हो गई। ब्रोकरेज फर्म नुवामा की रिपोर्ट के अनुसार, महीने में बिजली की अधिकतम मांग करीब 258 गीगावॉट रही। अगस्त 2025 में यह करीब 229 गीगावॉट थी। यानी एक साल में पीक डिमांड करीब 12.4 फीसदी बढ़ी।
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बिजली की मांग बढ़ने का असर थर्मल पावर प्लांट के इस्तेमाल पर भी दिखा। अगस्त 2026 में देश के कुल बिजली उत्पादन में थर्मल पावर की हिस्सेदारी करीब 66 फीसदी रही। इस दौरान थर्मल पावर प्लांट का प्लांट लोड फैक्टर (PLF) 66.8 फीसदी रहा। यानी प्लांट अपनी कुल क्षमता का औसतन इतना इस्तेमाल कर रहे थे। अगस्त 2025 में यह आंकड़ा 61.7 फीसदी था। एनटीपीसी के प्लांट का इस्तेमाल भी बढ़ा। अगस्त 2026 में कंपनी का PLF 73.7 फीसदी रहा, जो एक साल पहले 69 फीसदी था। यानी बिजली की बढ़ती मांग के बीच एनटीपीसी के प्लांट ने पहले के मुकाबले अपनी क्षमता का ज्यादा इस्तेमाल किया।
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नुवामा की रिपोर्ट के मुताबिक, सौर बिजली उपलब्ध रहने और न रहने के घंटों में बिजली की सप्लाई और कीमत में बड़ा अंतर रहा। सौर बिजली उत्पादन वाले घंटों में सप्लाई मजबूत रही। बिजली बेचने की बोलियां खरीद की बोलियों से करीब 177 फीसदी ज्यादा रहीं। इस दौरान इंडियन एनर्जी एक्सचेंज (आईईएक्स) पर बिजली की औसत कीमत 3.1 रुपये प्रति यूनिट रही। पिछले साल यह 2.5 रुपये थी। सौर बिजली उपलब्ध नहीं रहने वाले घंटों में तस्वीर उलट रही। बेचने की बोलियां खरीद की बोलियों की सिर्फ 33 फीसदी रहीं। सप्लाई कम होने से बिजली की कीमत बढ़कर 7 रुपये प्रति यूनिट हो गई। पिछले साल इसी अवधि में यह 5.8 रुपये थी।
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बिजली की बढ़ी मांग का असर आईईएक्स के कारोबार पर भी पड़ा। अगस्त में एक्सचेंज पर बिजली की ट्रेडिंग वॉल्यूम सालाना आधार पर 20.25 फीसदी बढ़ी। इसमें टर्म अहेड मार्केट का योगदान अहम रहा। इस सेगमेंट में कारोबार करीब 111 फीसदी बढ़ा। हालांकि, रिन्यूएबल एनर्जी सर्टिफिकेट से जुड़े कारोबार में करीब 87 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
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