सुप्रीम कोर्ट अपडेट: तरुण तेजपाल की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय सख्त, गोवा सरकार को जारी किया नोटिस
तरुण तेजपाल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का गोवा सरकार को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पूर्व तेहलका एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल द्वारा दायर याचिका पर गोवा सरकार को नोटिस जारी किया, जिसमें उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें उन्हें 2013 के दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराया गया था और 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी। न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने तेजपाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल की बात सुनने के बाद गोवा राज्य से जवाब मांगा, जिन्होंने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि उनके मुवक्किल ने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्देश के अनुसार आत्मसमर्पण कर दिया था। सिबल ने सुनवाई के लिए जल्द तारीख की मांग करते हुए कहा कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने सजा को निलंबित कर दिया है।
मामला 2013 में गोवा के एक होटल की लिफ्ट में महिला सहकर्मी के उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा है। मई 2021 में निचली अदालत ने तेजपाल को बरी किया था, जिसे बॉम्बे हाईकोर्ट ने अगस्त 2026 में पलट दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने पेपर लीक मामलों में आरोपियों और उनके परिवार के सदस्यों की चल-अचल संपत्ति जब्त करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई छह हफ्ते के लिए टाल दी। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने केंद्र और राज्यों से जवाब दाखिल करने को कहा। याचिका अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दायर की है। इसमें आरोपियों और उनके परिवार की संपत्ति का आकलन कर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। याचिका में पेपर लीक की घटनाओं से छात्रों के मानसिक, शारीरिक और आर्थिक नुकसान का भी जिक्र किया गया है।
एसआईआर विवाद पर सीईसी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका
एसआईआर को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका में आरोप है कि एसआईआर के दौरान लिए गए कुछ फैसले और Form-6 में बदलाव दो अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना किए गए। याचिकाकर्ता ने इन फैसलों को असंवैधानिक घोषित करने, मूल Form-6 बहाल करने और करीब 13 करोड़ हटाए गए नामों की एसआईटी जांच की मांग की है। साथ ही सीईसी ज्ञानेश कुमार, डिप्टी चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग और आईटी प्रमुख सीमा खन्ना के खिलाफ कथित वैधानिक उल्लंघनों को लेकर आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें शीर्ष अदालत की आधिकारिक भाषा के तौर पर हिंदी के इस्तेमाल की सिफारिश के लिए आयोग बनाने की मांग की गई थी। सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि भाषा से जुड़े सुधार अदालत के आदेश से नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर धीरे-धीरे और चरणबद्ध तरीके से किए जा रहे हैं। सीजेआई ने बताया कि कोर्ट अब अपने फैसलों का संक्षिप्त विवरण हिंदी में दे रहा है और आगे अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को भी शामिल किया जाएगा। पीठ ने कहा कि याचिका में मांगी गई राहत के लिए संवैधानिक संशोधन की जरूरत होगी। इसके बाद कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।