फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   supreme court delhi metro shutdown contempt notice

दिल्ली में मेट्रो बंद करने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: गृह सचिव से लेकर पुलिस तक को नोटिस; 13 अक्तूबर तक मांगा जवाब

Sun, 11 Oct 2026 08:43 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: राकेश कुमार Updated Sun, 11 Oct 2026 08:43 PM IST
सार

दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान मेट्रो और ट्रेनों की आवाजाही पर रोक को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की गई है। कोर्ट ने पहली नजर में अवमानना का मामला मानते हुए गृह मंत्रालय के सचिव, दिल्ली पुलिस आयुक्त और डीएमआरसी अध्यक्ष को नोटिस जारी किया है। अधिकारियों को 13 अक्तूबर तक जवाब और अनुपालन रिपोर्ट देनी होगी। फिलहाल शीर्ष अदालत ने यह अंतिम फैसला नहीं दिया है कि अवमानना हुई है या नहीं।
 

विज्ञापन
supreme court delhi metro shutdown contempt notice
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान मेट्रो और ट्रेनों की आवाजाही रोकने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने रविवार को कहा कि अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग करने वाले याचिकाकर्ताओं ने पहली नजर में अपना मामला बना लिया है। यानी कोर्ट को शुरुआती तौर पर लगता है कि उसके आदेश का उल्लंघन हुआ हो सकता है। हालांकि, अभी यह अंतिम फैसला नहीं है कि अधिकारियों ने अदालत की अवमानना की है।
विज्ञापन


किन अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया?
जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) की अध्यक्ष डी. थारा को नोटिस जारी किया है। शीर्ष अदालत ने इन अधिकारियों से 13 अक्तूबर 2026 तक जवाब और आदेश का पालन करने से जुड़ी रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। फिलहाल उन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने से छूट दी गई है।
विज्ञापन


याचिकाकर्ताओं ने क्या आरोप लगाए?
अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया है कि अधिकारियों ने नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी की। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली मेट्रो, दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार का यह रवैया जानबूझकर उठाया गया कदम है और इस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि अदालत के निर्देश और अधिकारियों की ओर से दिए गए आश्वासन के बावजूद मेट्रो और रेल सेवाओं पर व्यापक रोक जारी रखी गई।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह भी पढ़ें: 'दादी की मौत की खबर दी, लेकिन फोन नहीं दिया': दिपके ने दिल्ली पुलिस को बताया वर्दी में गुंडा; बवाल क्यों?


सुप्रीम कोर्ट ने पहले क्या आदेश दिया था?
सुप्रीम कोर्ट ने नौ अक्तूबर को एक दूसरी याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से कहा था कि 10 अक्तूबर को प्रदर्शन के कारण दिल्ली आने वाली मेट्रो और ट्रेनों की आवाजाही पूरी तरह नहीं रोकी जानी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा था कि सब कुछ ठप नहीं किया जा सकता। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा था कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एजेंसियां उपद्रव की आशंका होने पर कदम उठा सकती हैं, लेकिन आम लोगों को बेवजह परेशान नहीं किया जाना चाहिए।

प्रदर्शन और मेट्रो बंद करने का मामला क्या है?
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और कुछ छात्र संगठनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का आह्वान किया था। प्रदर्शनकारी चुनाव आयोग के कामकाज में कथित गड़बड़ियों का विरोध कर रहे थे। मेट्रो की ओर से जारी सूचना के अनुसार, सुरक्षा कारणों से शुक्रवार रात नौ बजे से शनिवार शाम छह बजे तक 45 मेट्रो स्टेशन बंद रखे गए थे। अवमानना याचिका में आरोप लगाया गया है कि अदालत के आदेश के बावजूद मेट्रो और रेल सेवाओं पर व्यापक रोक जारी रही। साथ ही, ट्रेनें रद्द की गईं और यातायात व परिवहन से जुड़ी स्पष्ट जानकारी भी पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक नहीं की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed