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बंगाल: सिलीगुड़ी में लगे हिंदुओं की दुकान से बिरयानी-पूजा सामग्री खरीदने की अपील वाले पोस्टर, क्या बोली भाजपा?
Sun, 11 Oct 2026 09:53 PM IST
देवेश त्रिपाठी
पीटीआई, सिलीगुड़ी
पीटीआई, सिलीगुड़ी
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Sun, 11 Oct 2026 09:53 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में दुर्गा पूजा से पहले हिंदू जागरण मंच के पोस्टर अभियान ने विवाद खड़ा कर दिया है। संगठन ने लोगों से हिंदुओं की दुकानों से बिरयानी और पूजा सामग्री खरीदने की अपील की है। अभियान के समर्थकों का कहना है कि इससे स्थानीय कारोबार को लाभ मिल सकता है।
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हिंदू जागरण मंच के अभियान की आलोचना
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्से के प्रमुख शहर सिलीगुड़ी में दुर्गा पूजा से पहले एक पोस्टर अभियान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े हिंदू जागरण मंच ने लोगों से हिंदुओं की दुकानों से बिरयानी और पूजा सामग्री खरीदने की अपील की है। इस अभियान की वामपंथी दलों और स्थानीय लोगों के एक वर्ग ने आलोचना की है।
शहर के विभिन्न हिस्सों में लगाए गए पोस्टरों पर लिखा है, "हिंदू दुकान से बिरयानी खाएं" और "हिंदू दुकानों से पूजा सामग्री खरीदें।" संगठन का कहना है कि ये संदेश किसी तरह का फरमान नहीं, बल्कि लोगों से की गई अपील हैं। अभियान का नेतृत्व कर रहे हिंदू जागरण मंच के सदस्य अभिषेक दास ने कहा, "यह कोई फरमान नहीं, बल्कि एक अपील है। अगर लोग हिंदुओं के कारोबार का समर्थन करते हैं, तो इसका स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा।"
माकपा नेता ने की कार्रवाई की मांग
माकपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अशोक भट्टाचार्य ने पोस्टर लगाने वालों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक देश में इस तरह के पोस्टर लगाना अपराध है। भट्टाचार्य ने कहा, "प्रशासन को न केवल पोस्टर हटाने चाहिए, बल्कि इस सांप्रदायिक अभियान के पीछे शामिल लोगों को गिरफ्तार भी करना चाहिए।"
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भाजपा ने अभियान से किया किनारा
भाजपा के एक नेता ने कहा कि हिंदू जागरण मंच एक स्वतंत्र संगठन है और इस अभियान में सत्तारूढ़ पार्टी की कोई भूमिका नहीं है। स्थानीय लोगों के एक वर्ग ने भी पोस्टर अभियान की आलोचना की। उनका कहना है कि बंगाल में लोग लंबे समय से बिरयानी का आनंद लेते आए हैं और आम तौर पर यह नहीं पूछते कि उसे बनाने वाला किस धर्म का है।
पोस्टर अभियान पर क्या बोले स्थानीय लोग?
कुछ लोगों ने यह भी बताया कि दुर्गा पूजा की सामग्री बनाने वाले कई कारीगर मुस्लिम समुदाय से आते हैं। इनमें शोलापिथ यानी शोलापीठ से सजावटी सामग्री बनाने वाले कारीगर भी शामिल हैं। आलोचकों ने कहा कि इस तरह की अपील स्वतंत्र सोच और बंगाल की सामाजिक परंपराओं के विपरीत है।
वामपंथी दलों ने भी अभियान की आलोचना करते हुए कहा कि संविधान सभी धर्मों के लोगों को समान अधिकार देता है और किसी व्यक्ति की आजीविका उसके धर्म के आधार पर तय नहीं होनी चाहिए।
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शहर के विभिन्न हिस्सों में लगाए गए पोस्टरों पर लिखा है, "हिंदू दुकान से बिरयानी खाएं" और "हिंदू दुकानों से पूजा सामग्री खरीदें।" संगठन का कहना है कि ये संदेश किसी तरह का फरमान नहीं, बल्कि लोगों से की गई अपील हैं। अभियान का नेतृत्व कर रहे हिंदू जागरण मंच के सदस्य अभिषेक दास ने कहा, "यह कोई फरमान नहीं, बल्कि एक अपील है। अगर लोग हिंदुओं के कारोबार का समर्थन करते हैं, तो इसका स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा।"
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माकपा नेता ने की कार्रवाई की मांग
माकपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अशोक भट्टाचार्य ने पोस्टर लगाने वालों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक देश में इस तरह के पोस्टर लगाना अपराध है। भट्टाचार्य ने कहा, "प्रशासन को न केवल पोस्टर हटाने चाहिए, बल्कि इस सांप्रदायिक अभियान के पीछे शामिल लोगों को गिरफ्तार भी करना चाहिए।"
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भाजपा ने अभियान से किया किनारा
भाजपा के एक नेता ने कहा कि हिंदू जागरण मंच एक स्वतंत्र संगठन है और इस अभियान में सत्तारूढ़ पार्टी की कोई भूमिका नहीं है। स्थानीय लोगों के एक वर्ग ने भी पोस्टर अभियान की आलोचना की। उनका कहना है कि बंगाल में लोग लंबे समय से बिरयानी का आनंद लेते आए हैं और आम तौर पर यह नहीं पूछते कि उसे बनाने वाला किस धर्म का है।
पोस्टर अभियान पर क्या बोले स्थानीय लोग?
कुछ लोगों ने यह भी बताया कि दुर्गा पूजा की सामग्री बनाने वाले कई कारीगर मुस्लिम समुदाय से आते हैं। इनमें शोलापिथ यानी शोलापीठ से सजावटी सामग्री बनाने वाले कारीगर भी शामिल हैं। आलोचकों ने कहा कि इस तरह की अपील स्वतंत्र सोच और बंगाल की सामाजिक परंपराओं के विपरीत है।
वामपंथी दलों ने भी अभियान की आलोचना करते हुए कहा कि संविधान सभी धर्मों के लोगों को समान अधिकार देता है और किसी व्यक्ति की आजीविका उसके धर्म के आधार पर तय नहीं होनी चाहिए।