{"_id":"6aa66c8ac90bfb4c04009891","slug":"precision-strikes-on-airbases-runways-terror-hideouts-read-about-extent-damage-pakistan-suffered-ops-sindoor-2026-09-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"वार्षिक रिपोर्ट: एयर बेस, रनवे और आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले, पढ़ें ऑपरेशन सिंदूर में पाक को कितना हुआ नुकसान?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
वार्षिक रिपोर्ट: एयर बेस, रनवे और आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले, पढ़ें ऑपरेशन सिंदूर में पाक को कितना हुआ नुकसान?
Sun, 13 Sep 2026 02:58 PM IST
प्रशांत तिवारी
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Sun, 13 Sep 2026 02:58 PM IST
सार
रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय वायुसेना के एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लगभग 314 किलोमीटर दूर एक पाकिस्तानी विशेष मिशन विमान को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। यह कार्रवाई भारत की लंबी दूरी तक दुश्मन के विमानों को पहचानने, ट्रैक करने और मार गिराने की मजबूत क्षमता को दिखाती है। इसके बाद 12 मई 2025 को प्रधानमंत्री मोदी ने आदमपुर एयरबेस जाकर वायुसेना के जवानों से मुलाकात कर उनके साहस की सराहना की।
विज्ञापन
एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
रक्षा मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 में भारतीय वायुसेना (IAF) की एक ऐसी महत्वपूर्ण कार्रवाई का उल्लेख किया गया है, जिसे वायु रक्षा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की एक यूनिट ने 314 किलोमीटर की दूरी से पाकिस्तानी स्पेशल मिशन एयरक्राफ्ट को सफलतापूर्वक निशाना बनाकर नष्ट कर दिया। इसे सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल से की गई सबसे लंबी दूरी की कार्रवाइयों में से एक बताया गया है।
दुश्मन की दूरी वाली सुरक्षा की धारणा को मिली चुनौती
रिपोर्ट के मुताबिक, इस ऑपरेशन ने दुश्मन की उस धारणा को चुनौती दी कि अधिक दूरी उसे भारतीय वायुसेना की कार्रवाई से सुरक्षा प्रदान कर सकती है। ऑपरेशन के दौरान भारतीय रडार प्रणालियों ने खतरे को बेहद सटीकता के साथ ट्रैक किया और S-400 की लंबी दूरी की मिसाइल को लक्ष्य तक सफलतापूर्वक निर्देशित किया गया। 314 किलोमीटर की दूरी से किया गया यह प्रहार भारतीय वायु रक्षा नेटवर्क की निगरानी, लक्ष्य की पहचान और लंबी दूरी तक सटीक प्रहार करने की क्षमता को दर्शाता है।
हवाई क्षेत्र में दूरी को सुरक्षा कवच मानने की सोच पर प्रहार
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस कार्रवाई का रणनीतिक महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि इससे यह स्पष्ट संदेश गया कि भारतीय वायुसेना के आक्रामक और वायु रक्षा संसाधनों की पहुंच केवल सीमावर्ती इलाकों तक सीमित नहीं है। इस ऑपरेशन ने विरोधी की उस सोच को भी चुनौती दी कि हवाई क्षेत्र में पर्याप्त दूरी बनाए रखकर वह भारतीय कार्रवाई से सुरक्षित रह सकता है।
विज्ञापन
12 मई को आदमपुर पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी
ऑपरेशन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मई 2025 को एयर फोर्स स्टेशन आदमपुर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने वहां तैनात एयर वॉरियर्स से मुलाकात की और ऑपरेशन में उनकी भूमिका की व्यक्तिगत रूप से सराहना की। प्रधानमंत्री ने अभियान के दौरान भारतीय वायुसेना के कर्मियों के साहस और दृढ़ संकल्प को विशेष रूप से रेखांकित किया।
वायुसेना के जवानों को मिले 219 प्रेसिडेंशियल गैलेंट्री अवॉर्ड
इसके अलावा, 15 अगस्त 2025 को भारतीय वायुसेना के कर्मियों को 219 प्रेसिडेंशियल गैलेंट्री अवॉर्ड प्रदान किए गए। ये सम्मान ऑपरेशन के दौरान प्रदर्शित साहस, दृढ़ता और कर्तव्य के प्रति समर्पण के लिए दिए गए। इतनी बड़ी संख्या में वीरता पुरस्कारों ने इस अभियान में भारतीय वायुसेना की महत्वपूर्ण भूमिका को और स्पष्ट किया।
ये भी पढ़ें: 'ताकत से दम पर नहीं चलेंगे संबंध': ब्रिक्स समिट से शी जिनपिंग का दुनिया को संदेश, ग्लोबल साउथ पर क्या कहा?
314 किमी की दूरी से सटीक प्रहार बना अहम उपलब्धि
S-400 से 314 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य को निशाना बनाकर की गई यह कार्रवाई भारतीय वायु रक्षा क्षमताओं के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है। इसने लंबी दूरी तक निगरानी, लक्ष्य की पहचान, ट्रैकिंग और सटीक प्रहार करने की भारत की क्षमता को रेखांकित किया है। ऑपरेशन ने यह भी दिखाया कि आधुनिक वायु युद्ध में दूरी अपने आप में सुरक्षा की गारंटी नहीं है और प्रभावी रडार नेटवर्क तथा लंबी दूरी की मिसाइल प्रणाली किसी भी खतरे को दूर से ही निष्क्रिय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
विज्ञापन
दुश्मन की दूरी वाली सुरक्षा की धारणा को मिली चुनौती
रिपोर्ट के मुताबिक, इस ऑपरेशन ने दुश्मन की उस धारणा को चुनौती दी कि अधिक दूरी उसे भारतीय वायुसेना की कार्रवाई से सुरक्षा प्रदान कर सकती है। ऑपरेशन के दौरान भारतीय रडार प्रणालियों ने खतरे को बेहद सटीकता के साथ ट्रैक किया और S-400 की लंबी दूरी की मिसाइल को लक्ष्य तक सफलतापूर्वक निर्देशित किया गया। 314 किलोमीटर की दूरी से किया गया यह प्रहार भारतीय वायु रक्षा नेटवर्क की निगरानी, लक्ष्य की पहचान और लंबी दूरी तक सटीक प्रहार करने की क्षमता को दर्शाता है।
विज्ञापन
हवाई क्षेत्र में दूरी को सुरक्षा कवच मानने की सोच पर प्रहार
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस कार्रवाई का रणनीतिक महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि इससे यह स्पष्ट संदेश गया कि भारतीय वायुसेना के आक्रामक और वायु रक्षा संसाधनों की पहुंच केवल सीमावर्ती इलाकों तक सीमित नहीं है। इस ऑपरेशन ने विरोधी की उस सोच को भी चुनौती दी कि हवाई क्षेत्र में पर्याप्त दूरी बनाए रखकर वह भारतीय कार्रवाई से सुरक्षित रह सकता है।
विज्ञापन
12 मई को आदमपुर पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी
ऑपरेशन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मई 2025 को एयर फोर्स स्टेशन आदमपुर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने वहां तैनात एयर वॉरियर्स से मुलाकात की और ऑपरेशन में उनकी भूमिका की व्यक्तिगत रूप से सराहना की। प्रधानमंत्री ने अभियान के दौरान भारतीय वायुसेना के कर्मियों के साहस और दृढ़ संकल्प को विशेष रूप से रेखांकित किया।
वायुसेना के जवानों को मिले 219 प्रेसिडेंशियल गैलेंट्री अवॉर्ड
इसके अलावा, 15 अगस्त 2025 को भारतीय वायुसेना के कर्मियों को 219 प्रेसिडेंशियल गैलेंट्री अवॉर्ड प्रदान किए गए। ये सम्मान ऑपरेशन के दौरान प्रदर्शित साहस, दृढ़ता और कर्तव्य के प्रति समर्पण के लिए दिए गए। इतनी बड़ी संख्या में वीरता पुरस्कारों ने इस अभियान में भारतीय वायुसेना की महत्वपूर्ण भूमिका को और स्पष्ट किया।
ये भी पढ़ें: 'ताकत से दम पर नहीं चलेंगे संबंध': ब्रिक्स समिट से शी जिनपिंग का दुनिया को संदेश, ग्लोबल साउथ पर क्या कहा?
314 किमी की दूरी से सटीक प्रहार बना अहम उपलब्धि
S-400 से 314 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य को निशाना बनाकर की गई यह कार्रवाई भारतीय वायु रक्षा क्षमताओं के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है। इसने लंबी दूरी तक निगरानी, लक्ष्य की पहचान, ट्रैकिंग और सटीक प्रहार करने की भारत की क्षमता को रेखांकित किया है। ऑपरेशन ने यह भी दिखाया कि आधुनिक वायु युद्ध में दूरी अपने आप में सुरक्षा की गारंटी नहीं है और प्रभावी रडार नेटवर्क तथा लंबी दूरी की मिसाइल प्रणाली किसी भी खतरे को दूर से ही निष्क्रिय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।