{"_id":"6aad7c6dd176c849be0278a7","slug":"nandigram-bypoll-milan-pradhan-arrest-rahul-gandhi-ritabrata-banerjee-2026-09-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रधान की गिरफ्तारी: राहुल के ट्वीट पर ऋतब्रत का जवाब, बोले- तीन हत्या के केस लंबित; नंदीग्राम में बवाल क्यों?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
प्रधान की गिरफ्तारी: राहुल के ट्वीट पर ऋतब्रत का जवाब, बोले- तीन हत्या के केस लंबित; नंदीग्राम में बवाल क्यों?
Fri, 18 Sep 2026 11:31 PM IST
राकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 18 Sep 2026 11:31 PM IST
सार
नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। पुलिस के मुताबिक कार्रवाई 2007 के पुराने हत्या मामले और लंबित वारंट के आधार पर हुई, जबकि गिरफ्तारी के समय को लेकर कांग्रेस और ममता बनर्जी के खेमे ने सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया, जिसके बाद ऋतब्रत बनर्जी ने जवाब देते हुए मिलन प्रधान के खिलाफ तीन हत्या के मामले लंबित होने का दावा किया। क्या है पूरा मामला? जानिए...
विज्ञापन
राहुल गांधी और ऋतब्रत बनर्जी
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
राहुल गांधी के मिलन प्रधान की गिरफ्तारी को लेकर किए गए ट्वीट पर ऋतब्रत बनर्जी ने पलटवार किया है। डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी ने मिलन प्रधान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है और उनके खिलाफ तीन हत्या के मामले लंबित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव के दौरान लंबित वारंट को लागू करना अनिवार्य है। साथ ही ऋतब्रत ने आरोप लगाया कि राज्य कांग्रेस नेतृत्व ने राहुल गांधी को मामले की वास्तविक जानकारी नहीं दी।
राहुल गांधी ने क्या कहा था?
राहुल गांधी ने मिलन प्रधान की गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया था। उन्होंने कहा था कि नंदीग्राम उपचुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी कोई संयोग नहीं, राजनीतिक प्रतिशोध है, लोकतंत्र की हत्या है। भाजपा का निष्पक्ष चुनाव में भरोसा ही नहीं, इसलिए कभी वोट चोरी, कभी सरकार चोरी और कभी पार्टी चोरी से सत्ता बचाना चाहती है। वो चुनाव नहीं लड़ना चाहते, चुनावी मुकाबला ही खत्म कर देना चाहते हैं। कांग्रेस न डरेगी, न झुकेगी। हम लड़ेंगे भी, जीतेंगे भी।
मिलन प्रधान की गिरफ्तारी क्यों हुई?
पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्रधान को 2007 के नंदीग्राम भूमि आंदोलन से जुड़े पुराने हत्या मामले में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, उनके खिलाफ एक लंबित वारंट था और अदालत से उन्हें कोई कानूनी सुरक्षा नहीं मिली थी। पुलिस का कहना है कि चुनाव के दौरान पुराने लंबित गिरफ्तारी वारंट की समीक्षा की जाती है और इस कार्रवाई का उपचुनाव से कोई संबंध नहीं है।
विज्ञापन
बताते चलें कि नंदीग्राम उपचुनाव में शुक्रवार को सियासी घटनाक्रम तेजी से बदला। कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को पुराने हत्या मामले में गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई, जब ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी के उम्मीदवार के नामांकन वापस लेने के बाद नंदीग्राम में मिलन प्रधान को समर्थन देने का एलान किया था। नंदीग्राम में उपचुनाव छह अक्तूबर को होना है।
यह भी पढ़ें: बंगाल उपचुनाव: चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं ममता, टीएमसी के नाम और चिह्न वाले फैसले को दी चुनौती
संचिता प्रधान ने नामांकन क्यों वापस लिया?
पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम उपचुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने कोलकाता में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात करने के बाद अचानक अपना नामांकन वापस ले लिया। इस फैसले का कोई आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन नामांकन वापस लेने के बाद ममता बनर्जी ने इस सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा की है। चूंकि नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख बीत चुकी थी, इसलिए अब टीएमसी नंदीग्राम में अपना नया उम्मीदवार नहीं उतार सकती।
अब किस-किस के बीच लड़ाई?
नंदीग्राम उपचुनाव में अब मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा की हसीरानी रथ, कांग्रेस के मिलन प्रधान, ऋतब्रत बनर्जी की पार्टी से मोहम्मद एतेशामुल हक और वाम मोर्चे के घटक दल भाकपा के शांति गोपाल गिरी के बीच है। मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बावजूद वह नंदीग्राम उपचुनाव लड़ सकते हैं, बशर्ते उन्हें किसी मामले में दोषी ठहराकर दो साल या उससे अधिक की सजा न सुनाई गई हो। केवल गिरफ्तारी या जेल में होने से उनकी उम्मीदवारी अपने-आप रद्द नहीं होती।
विज्ञापन
राहुल गांधी ने क्या कहा था?
राहुल गांधी ने मिलन प्रधान की गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया था। उन्होंने कहा था कि नंदीग्राम उपचुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी कोई संयोग नहीं, राजनीतिक प्रतिशोध है, लोकतंत्र की हत्या है। भाजपा का निष्पक्ष चुनाव में भरोसा ही नहीं, इसलिए कभी वोट चोरी, कभी सरकार चोरी और कभी पार्टी चोरी से सत्ता बचाना चाहती है। वो चुनाव नहीं लड़ना चाहते, चुनावी मुकाबला ही खत्म कर देना चाहते हैं। कांग्रेस न डरेगी, न झुकेगी। हम लड़ेंगे भी, जीतेंगे भी।
विज्ञापन
मिलन प्रधान की गिरफ्तारी क्यों हुई?
पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्रधान को 2007 के नंदीग्राम भूमि आंदोलन से जुड़े पुराने हत्या मामले में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, उनके खिलाफ एक लंबित वारंट था और अदालत से उन्हें कोई कानूनी सुरक्षा नहीं मिली थी। पुलिस का कहना है कि चुनाव के दौरान पुराने लंबित गिरफ्तारी वारंट की समीक्षा की जाती है और इस कार्रवाई का उपचुनाव से कोई संबंध नहीं है।
विज्ञापन
बताते चलें कि नंदीग्राम उपचुनाव में शुक्रवार को सियासी घटनाक्रम तेजी से बदला। कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को पुराने हत्या मामले में गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई, जब ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी के उम्मीदवार के नामांकन वापस लेने के बाद नंदीग्राम में मिलन प्रधान को समर्थन देने का एलान किया था। नंदीग्राम में उपचुनाव छह अक्तूबर को होना है।
यह भी पढ़ें: बंगाल उपचुनाव: चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं ममता, टीएमसी के नाम और चिह्न वाले फैसले को दी चुनौती
संचिता प्रधान ने नामांकन क्यों वापस लिया?
पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम उपचुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने कोलकाता में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात करने के बाद अचानक अपना नामांकन वापस ले लिया। इस फैसले का कोई आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन नामांकन वापस लेने के बाद ममता बनर्जी ने इस सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा की है। चूंकि नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख बीत चुकी थी, इसलिए अब टीएमसी नंदीग्राम में अपना नया उम्मीदवार नहीं उतार सकती।
अब किस-किस के बीच लड़ाई?
नंदीग्राम उपचुनाव में अब मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा की हसीरानी रथ, कांग्रेस के मिलन प्रधान, ऋतब्रत बनर्जी की पार्टी से मोहम्मद एतेशामुल हक और वाम मोर्चे के घटक दल भाकपा के शांति गोपाल गिरी के बीच है। मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बावजूद वह नंदीग्राम उपचुनाव लड़ सकते हैं, बशर्ते उन्हें किसी मामले में दोषी ठहराकर दो साल या उससे अधिक की सजा न सुनाई गई हो। केवल गिरफ्तारी या जेल में होने से उनकी उम्मीदवारी अपने-आप रद्द नहीं होती।