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नेपाल के मुआवजे की मांग पर भारत ने दिया जवाब: जलवायु परिवर्तन सबके लिए चुनौती, और क्या कहा?

Fri, 04 Sep 2026 07:48 PM IST
प्रशांत तिवारी एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली Published by: प्रशांत तिवारी Updated Fri, 04 Sep 2026 07:48 PM IST
सार

कश्मीर को लेकर बर्मिंघम के मेयर जाकर चौधरी की टिप्पणियों पर भारत ने दो टूक जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि कश्मीर के मामले में भारत का रुख बिल्कुल स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का हिस्सा हैं और भारत के अभिन्न अंग हैं। 

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Kashmir integral part of India MEA blunt message to Birmingham Mayor reveals how many Indians missing in Nepal
नेपाल त्रासदी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार की ब्रीफिंग में बताया कि नेपाल में बाढ़ के बीच भारत ने राहत अभियान तेज करते हुए अब तक सात विमानों से करीब 95 टन राहत सामग्री पहुंचाई है। नेपाल में 166 भारतीयों को बचाया गया है, जबकि 275 भारतीय अब भी लापता हैं। इसके अलावा चीन से 1,907 भारतीय सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं।  वहीं, नेपाल के मंत्री द्वारा मुआवजा मांगे जाने पर भी भारत सरकार की प्रतिक्रिया सामने आई है। 

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'जलवायु परिवर्तन एक साझा चुनौती'
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'मैं यह कहना चाहूंगा कि भारत का हमेशा से यह मानना रहा है कि जलवायु परिवर्तन एक साझा चुनौती है और इस दिशा में कोई भी कदम 'साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों और संबंधित क्षमताओं' के सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो विकसित देश ऐतिहासिक रूप से उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार रहे हैं और जिन्होंने इस संकट को बढ़ाने में सबसे ज्यादा योगदान दिया है, उन्हें ही उत्सर्जन कम करने और इस चुनौती से निपटने के लिए विकासशील देशों को फ़ाइनेंस और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के जरिए मदद करने में आगे आना चाहिए।
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नेपाल में बाढ़ के बीच भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
वहीं, नेपाल में बाढ़ और भारी बारिश से बने गंभीर हालात के बीच भारत ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। जायसवाल ने कहा कि भारत नेपाल सरकार की जरूरतों के मुताबिक लगातार मदद पहुंचाता रहेगा। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में भारत नेपाल को और फोरेंसिक किट, बेली ब्रिज तथा नेपाल सरकार की ओर से मांगी गई अन्य जरूरी सामग्री भेजने की योजना बना रहा है। इन सामानों की खेप भेजे जाने के बाद इसकी जानकारी साझा की जाएगी।
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सात विमानों से नेपाल पहुंची करीब 95 टन राहत सामग्री
रणधीर जायसवाल ने बताया कि गुरुवार को भारत के दो विमान 21 टन राहत सामग्री लेकर काठमांडू पहुंचे। उन्होंने कहा कि अब तक भारत सात विमानों के जरिए करीब 95 टन राहत सामग्री नेपाल पहुंचा चुका है। राहत सामग्री के साथ भारत ने बचाव और विशेषज्ञ सहायता भी नेपाल भेजी है। नेपाल में राहत और बचाव कार्यों में मदद के लिए भारत ने 54 लोगों को भेजा है। इनमें 30 टनल रेस्क्यू विशेषज्ञ, 19 फोरेंसिक विशेषज्ञ और पांच सदस्यों वाली मेडिकल टीम शामिल है। भारतीय बचाव और फोरेंसिक टीमें जमीन पर तैनात हैं और नेपाली अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रही हैं।

नेपाल में 275 भारतीय अब भी लापता
नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों को लेकर विदेश मंत्रालय ने बताया कि मौजूदा जानकारी के अनुसार 275 भारतीय नागरिक अभी भी लापता हैं। भारत सरकार नेपाल सरकार, नेपाल के विदेश मंत्रालय और भारत में संबंधित राज्य सरकारों के साथ लगातार संपर्क में है। बचाए गए भारतीय नागरिकों के नाम नियमित रूप से जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने इस मामले में नेपाली अधिकारियों के प्रयासों की भी सराहना की। अब तक नेपाल में 166 भारतीय नागरिकों को बचाया जा चुका है।

कश्मीर पर भारत का रुख बिल्कुल साफ
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कश्मीर के मुद्दे पर भारत की स्थिति दोहराते हुए कहा कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का हिस्सा हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये क्षेत्र भारत के अभिन्न अंग हैं। विदेश मंत्रालय की ओर से यह बयान बर्मिंघम के मेयर जाकर चौधरी की कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणियों के जवाब में आया है।

पाकिस्तान को लेकर भी भारत की नीति स्पष्ट
पाकिस्तान के संदर्भ में भारत की नीति को लेकर पूछे गए सवाल पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत को अच्छी तरह पता है कि इस मामले में उसकी स्थिति क्या है। उन्होंने संकेत दिया कि कश्मीर और पाकिस्तान से जुड़े मुद्दों पर भारत अपने पहले से स्पष्ट रुख पर कायम है।


चीन से 1,907 भारतीय सुरक्षित नेपाल पहुंचे
विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 1,907 भारतीय नागरिक चीन से सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं। मंत्रालय ने यह भी बताया कि चीन के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में फिलहाल कोई भी भारतीय यात्री फंसा हुआ नहीं है।

'युद्ध का समाधान रणभूमि से नहीं'
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने विदेश मंत्री के यूक्रेन दौरे का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि विदेश मंत्री ने 3 सितंबर को यूक्रेन की राजधानी कीव का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा से मुलाकात की और राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से भी बातचीत की। बातचीत के दौरान विदेश मंत्री ने कहा कि भारत का हमेशा से यह मानना रहा है कि यह युद्ध का दौर नहीं है और किसी भी विवाद का समाधान युद्ध के मैदान से नहीं निकलेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस बात पर भी जोर दिया कि अब अंतहीन युद्ध को जारी रखने के बजाय युद्ध को खत्म करने की कोशिश होनी चाहिए। इसका रास्ता कैसे निकलेगा, यह संबंधित पक्षों को ही तय करना है।

युद्ध खत्म करने में मदद के लिए भारत तैयार
विदेश मंत्री ने कहा कि अगर भारत युद्ध को खत्म करने की दिशा में किसी भी तरह से मदद कर सकता है, तो वह प्रधानमंत्री की हालिया अपील के अनुरूप ऐसा करने के लिए तैयार है। विदेश मंत्री का यूक्रेन दौरा बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान की संभावनाओं को तलाशने पर केंद्रित था।


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1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतें भारत की प्राथमिकता
भारत की ऊर्जा खरीद को लेकर विदेश मंत्रालय ने कहा कि देश के राष्ट्रीय हित ही उसकी ऊर्जा खरीद से जुड़े फैसलों को तय करते हैं। रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत के लिए 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना जरूरी है और यही प्राथमिकता देश को दिशा देती है। उन्होंने कहा कि आगे भी भारत इसी नीति के तहत अपने फैसले लेगा।

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