राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस: भाजपा की लगातार जीत पर कहा- जहां लोकतंत्र नहीं, वहां एंटी-इन्कंबेंसी भी नहीं
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एंटी-इन्कंबेंसी, लोकतंत्र और चुनावी व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों में गड़बड़ियां हो रही हैं और वोट की सुरक्षा पर सवाल हैं। राहुल ने कहा कि वोट कमजोर हुआ तो संविधान, कानून और लोकतांत्रिक संस्थाएं भी कमजोर हो जाएंगी।
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी करीब सवा घंटे की देरी से शुरू हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल ने कहा कि भारत में मौलिक बल है जिसे एंटी इन्कंबेंसी कहा जाता है जो कि काफी जल्दी किसी भी सरकार के प्रतिरोध में खड़ी हो जाती है। इससे कोई नहीं बचता। इंदिरा गांधी जी बांग्लादेश युद्ध जीत जाती हैं वे अपने लोकप्रियता के चरम पर होती हैं और इसके बाद सिर्फ दो-तीन साल में ही उनके खिलाफ एंटी-इन्कंबेंसी पैदा हो जाती है। ऐसा कई और कांग्रेस के प्रधानमंत्रियों के साथ होता है। लेकिन यह नरेंद्र मोदी और अमित शाह समेत किसी भाजपा नेता के साथ आज नहीं होता।
राहुल गांधी ने कहा कि वह बिना आधार के कोई बात नहीं कह रहे हैं, बल्कि उन्होंने अपने दावों को सबूत के साथ सामने रखा है। उन्होंने दावा किया कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह 100 प्रतिशत स्पष्ट है कि भारत के चुनाव, 2024 के लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनावों में गड़बड़ियां हो रही हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सभी चुनावों में धांधली की। वोट चोरी से लोकतंत्र कमजोर हुआ है। राहुल ने पहले की तीन प्रेस कॉन्फ्रेंस का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग पर वोट चोरी का आरोप लगाया था। उन्होंने आयोग को सरकार की 'B टीम' भी कहा था। भाजपा के साथ वोट चोरी करने का आरोप लगाया था।
उन्होंने कहा कि हरियाणा में 50 साल से लगातार अलग-अलग सरकारों में रही एंटी-इन्कंबेंसी खत्म हो जाती है। महाराष्ट्र में खत्म हो जाती है। गुजरात में नहीं रहती। कई और राज्यों में भी ऐसा ही होता है। हमें यह नहीं समझ आता है कि एंटी-इन्कंबेंसी खत्म कैसे हो जाती है। लेकिन फिर समझ आता है कि इराक में एंटी-इन्कंबेंसी नहीं होती। उत्तर कोरिया में एंटी-इन्कंबेंसी नहीं होती। तब हमें दिखता है कि जहां लोकतंत्र नहीं होता, वहां एंटी-इन्कंबेंसी नहीं होती है। राहुल ने आगे कहा 'अगर आप वोट को खत्म कर दें तो हमारा संविधान भी तबाह हो सकता है। उसे अपनी ताकत नहीं मिलती, वह कार्य नहीं कर सकता। अगर हमारा संविधान तबाह हो जाए तो हमारे कानून अवैध हो जाते हैं और अगर कानून ही वैध न रहे तो संस्थान भी बर्बाद हो जाते हैं। हम काफी समय से कह रहे हैं कि यहां वोट के साथ लंबे समय से परेशानी चल रही है। चुनाव आयोग ऐसा संस्थान है, जिसकी जिम्मेदारी लोगों के वोट को सुरक्षित करने की है।'
राहुल ने कहा कि इस बात की स्पष्टता है कि भारत के चुनाव, लोकसभा चुनाव, विधानसभा चुनाव में गड़बड़ियां हो रही हैं। दो चुनाव आयुक्त आज मुख्य चुनाव आयुक्त- ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठा रहे हैं। लेकिन उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुना है। अब दो चुनाव आयुक्त कह रहे हैं कि ज्ञानेश कुमार उस नुकसान के लिए जिम्मेदार हैं, जो हमारे वोटिंग सिस्टम में हुई है। वोट चोरी से आती है कानून चोरी और कानून चोरी से आती है संस्था चोरी। यह चेन पूरे देश में चल रही है। आज वोट गया, तो पूरा कानून बनाने वाला सिस्टम गया। अगर चुने गए सांसद चोरी हुए वोट से संसद में बैठे हैं और वही चोरी के वोट से जीते हुए सांसद कानून बना रहे हैं तो वह जो भी कानून बना रहे हैं वह भी अवैध है। वह जो भी संस्थागत बदलाव कर रहे हैं वह भी अवैध है। अगले छह महीनों में यह बिल्कुल ब्लैक एंड व्हाइट होगा आपके लिए।
राहुल ने कहा कि हमारे कानून भी गैरकानूनी हो गए। ये सिर्फ वोट पर हमला नहीं है। ये बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला है, जो लोगों को अपना नेता चुनने का अधिकार देता है। वोटों की रक्षा करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। अगर वोट खत्म हो गया, तो संविधान काम नहीं कर रहा है। 1947 से आज तक हम वहां नहीं बैठे, जहां हम आज बैठे हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि पहली चीज जो हम कह रहे हैं वह यह कि सीईसी ज्ञानेश कुमार को पद से तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। मैं उनसे कहना चाहूंगा कि आप समझें कि क्या हो रहा है। आपने जो किया है वह भारत देश के खिलाफ है। यह सिर्फ चुनाव में छोटी-मोटी गड़बड़ी नहीं है। यह वोटिंग सिस्टम पर हमला है। आप वह व्यक्ति हैं, जिन्हें वोटों को सुरक्षित करने का जिम्मा मिला था। हमारे पास इतने सबूत हैं कि हम वोट चोरी को साबित कर सकते हैं। हम लोकतंत्र को भारत में तबाह नहीं होने देंगे और इस गड़बड़ी में शामिल हर एक व्यक्ति को सजा मिलेगी। दो चुनाव आयुक्त अब साफ होकर सामने आए हैं।
राहुल गांधी ने आगे कहा कि ज्ञानेश कुमार को खुद सोचना चाहिए और इन गड़बड़ियों का गवाह बनना चाहिए। हमें गड़बड़ी पता है और हम इनका खुलासा करेंगे। उन्हें भी यह पता है कि हमें सबकुछ पता है। आज जो हो रहा है उसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की भी जांच होगी। यह दोनों लोग इस साजिश के शीर्ष पर हैं। यह भारत देश के खिलाफ कार्य है। हम चुप रहने से इनकार करते हैं और चुप बैठने से भी इनकार करते हैं। देशद्रोही हैं ये सब, जो व्यक्ति वोट को तबाह करता है वह देशद्रोही है। आपने देखा है कि 2023 में यह सब कह रहा हूं और मैंने हमेशा तथ्यों के साथ यह बात कही है। मैंने हर बार तथ्य रखे हैं और देश के लोग यह जानते हैं। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने इस देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर हमला किया है।
क्या है पूरा मामला?
इससे पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, 'संविधान के दुश्मनों का पर्दाफाश हो गया है। न्याय जरूर होगा। मैं शाम चार बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करूंगा।' बता दें कि राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर गुरुवार को बताया था कि शाम चार बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं, जब चुनाव आयोग के भीतर ही एसआईआर प्रक्रिया के विरोध में आवाज उठी है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग के कामकाज और फैसले लेने की प्रक्रिया को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि दो चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में 14 बार आपत्ति दर्ज कराई।
रिपोर्ट में क्या दावा किया गया है?
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर कहा कि उन्हें इसकी जानकारी या उनकी मंजूरी नहीं ली गई। ये आपत्तियां विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर, नए मतदाताओं के पंजीकरण, फॉर्म-6 में बदलाव, वोटर लिस्ट से नाम हटाने और जोड़ने, नाम बहाल करने के आदेशों के खिलाफ अपील तथा वोटर डेटा की सुरक्षा जैसे मुद्दों से जुड़ी थीं।
फॉर्म-6 और नए मतदाताओं के पंजीकरण पर क्या सवाल उठे?
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रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में किए गए बदलाव पर आपत्ति जताई। इस फॉर्म में एसआईआर से जुड़ा एक सवाल जोड़ा गया था, जिसमें आवेदक से पूछा जा रहा था कि उसका या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम पिछली एसआईआर की मतदाता सूची में था या नहीं।
- रिपोर्ट के मुताबिक, इस बदलाव पर विवेक जोशी ने मई में आपत्ति दर्ज की थी। उनका कहना था कि फॉर्म-6 में बदलाव के लिए मतदाता पंजीकरण से जुड़े नियमों में संशोधन जरूरी है। सुखबीर सिंह संधू ने भी इस आपत्ति से सहमति जताई। बाद में संधू ने इस बदलाव को अनधिकृत और गैरकानूनी बताते हुए इसे हटाने की मांग की।