रूसी तेल का विकल्प बनेगा वेनेजुएला?: रिलायंस के जामनगर प्लांट क्यों जा रहे अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने मंगलवार को मुंबई में विदेश मंत्री जयशंकर से मुलाकात की। इस दौरान मीडिया से बात करते हुए रूबियो ने कहा कि भारत अपनी तेल खरीद में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है जो समझदारी भरा कदम है।
विस्तार
वेनेजुएला में तेल उत्पादन को लेकर रिलायंस से होगी बातचीत
अमेरिकी विदेश मंत्री ने बताया कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल वेनेजुएला में तेल उत्पादन के संबंध में रिलायंस के साथ बैठक करेगा। उन्होंने कहा कि भारत ने पेट्रोलियम की खरीद के स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने इसे एक समझदारी भरा कदम बताया।
वैश्विक ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में भारत की क्षमता से जुड़े सवाल पर रूबियो ने कहा, 'भारत तेल शोधन के क्षेत्र में एक महाशक्ति है। उसके पास भारी कच्चे तेल (हेवी क्रूड) को रिफाइन करने की क्षमता है। भारत पहले भी ऐसा कर चुका है। मेरा मानना है कि जैसे-जैसे वेनेजुएला से अधिक तेल बाजार में आएगा, भारत उसका शोधन कर सकेगा। इसके अलावा भारत के पास वेनेजुएला में पहले से तेल उत्पादन संबंधी रियायतें और अधिकार मौजूद हैं, जिनके जरिए वह स्वयं भी अधिक तेल का उत्पादन कर सकता है।'
उन्होंने कहा, 'ये सभी सकारात्मक बातें हैं। मैं यह दावा नहीं कर रहा कि दुनिया में मौजूदा घटनाक्रमों के कारण तेल आपूर्ति में पैदा होने वाली कमी को अकेले वेनेजुएला पूरा कर सकता है। लेकिन मेरा मानना है कि समय के साथ वह निश्चित रूप से ऐसा कर सकता है और अल्पावधि में भी आपूर्ति बढ़ाने में मदद कर सकता है।'
क्या रूसी तेल का विकल्प बनेगा वेनेजुएला?
अमेरिका की कोशिश है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरत का तेल वेनेजुएला से भी खरीदे। यही वजह है कि अमेरिका चाहता है कि भारत की दिग्गज तेल रिफाइनिंग कंपनी रिलायंस वेनेजुएला में तेल शोधन का काम करे। अभी अमेरिका ने भारत द्वारा रूस से तेल खरीद पर नरम रुख अपनाया हुआ है। हालांकि रूबियो ने कहा कि भारत अपनी तेल खरीद में विविधता ला रहा है, जो समझदारी भरी बात है। भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा, 'मुझे लगता है कि भारत बार-बार अपनी ऊर्जा पोर्टफोलियो में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है, जो एक समझदारी भरा कदम है। यह एक दिन में करना आसान नहीं है।'
रूबियो बोले- भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में
मुंबई में पत्रकारों से बातचीत के दौरान रूबियो ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भी बात की। उन्होंने कहा, 'जहां तक व्यापार समझौते का सवाल है, विदेश मंत्रालय सीधे तौर पर ऐसे समझौतों पर बातचीत नहीं करता, लेकिन जो कुछ हो रहा है, उसमें हमारी पूरी भागीदारी है। हम इस समझौते को काफी महत्व देते हैं। हम समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। मैं कहूंगा कि औपचारिक रूप से समझौता होने से पहले जितना करीब पहुंचा जा सकता है, हम लगभग उतने ही करीब हैं।'
रूबियो ने कहा, 'मुझे लगता है कि अब केवल कुछ ही मुद्दों को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। उम्मीद है कि यह काम जल्द पूरा हो जाएगा। हम आशा करते हैं कि जल्द ही कोई अच्छी खबर मिलेगी और उसके बाद समझौते पर हस्ताक्षर होंगे। हमें पूरा भरोसा है कि बहुत जल्द इस दिशा में ठोस नतीजा सामने आएगा।'
'भारत अमेरिका का मजबूत रणनीतिक साझेदार'
अपनी भारत यात्रा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए रूबियो ने कहा, 'सबसे पहले मैं यह बताना चाहूंगा कि भारत के विदेश मंत्री इस वर्ष चार बार अमेरिका की यात्रा कर चुके हैं। भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश और सबसे बड़ा लोकतंत्र है। वह अमेरिका का महत्वपूर्ण व्यापारिक और कारोबारी साझेदार है।'
उन्होंने कहा, 'हम रक्षा क्षेत्र में भी व्यापक सहयोग करते हैं। भारत क्वाड का एक प्रमुख सदस्य और हमारा मजबूत रणनीतिक साझेदार है। मुझे वास्तव में लगता है कि हमने भारत की पर्याप्त यात्राएं नहीं की हैं और हमें ऐसी यात्राएं और बढ़ानी चाहिए।'
क्या है रूबियो का कार्यक्रम?
भारत यात्रा के दौरान रूबियो मुंबई के ताज होटल स्थित 26/11 स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे और ‘फ्रीडम 250’ स्वागत समारोह में भी शामिल होंगे। उनके महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलने की भी संभावना है। मुंबई में अपने कार्यक्रम पूरे करने के बाद रूबियो गुजरात के जामनगर जाएंगे। वहां होने वाली बातचीत में भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा सहयोग को और बढ़ाने पर विशेष जोर रहने की उम्मीद है।
यह इस साल रूबियो की भारत की दूसरी आधिकारिक यात्रा है। इससे पहले वह मई में भी भारत आए थे। दौरे के दौरान वह केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से मिलेंगे और भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने, क्षेत्रीय और वैश्विक हालात पर विचार-विमर्श करने तथा ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा करेंगे। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, रूबियो उद्योग जगत के प्रमुख नेताओं से भी मुलाकात करेंगे, ताकि निवेश, व्यापार और आर्थिक सहयोग के नए अवसरों को बढ़ावा दिया जा सके।