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Hindi News ›   India News ›   India’s Reservoir Water Storage Falls to 68.58% After Monsoon, South India Faces Severe Water Shortage

मानसून विदा, फिर भी नहीं भरे जलाशय: दक्षिण भारत में पानी की कमी गंभीर; क्या आने वाले महीनों में बढ़ेगा संकट?

Sat, 17 Oct 2026 06:38 PM IST
डॉ. संजय पांडेय अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क Published by: डॉ. संजय पांडेय Updated Sat, 17 Oct 2026 06:38 PM IST
सार

मानसून विदा होने के बाद भी देश के 178 प्रमुख जलाशयों में सिर्फ 68.58 फीसदी उपयोगी क्षमता का पानी बचा है। पिछले साल के मुकाबले भंडारण 24.53 फीसदी कम है। कावेरी और पेन्नार बेसिन में कमी सबसे ज्यादा है, जबकि कुछ नदी क्षेत्रों में सामान्य से अधिक पानी उपलब्ध है। क्या कम भंडारण आने वाले महीनों में सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है?

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India’s Reservoir Water Storage Falls to 68.58% After Monsoon, South India Faces Severe Water Shortage
पिछले साल के मुकाबले जल भंडारण कितने फीसदी कम? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

देश से मानसून की विदाई के बाद भी प्रमुख जलाशय पूरी तरह नहीं भर पाए हैं। देश के 178 प्रमुख जलाशयों में उनकी कुल उपयोगी भंडारण क्षमता का सिर्फ 68.58 फीसदी पानी उपलब्ध है। यानी इन जलाशयों की करीब 31.42 फीसदी क्षमता खाली है। दक्षिण भारत के कई जलाशयों में स्थिति ज्यादा चिंताजनक है। कावेरी और पेन्नार नदी बेसिन में सामान्य स्तर के मुकाबले पानी की भारी कमी दर्ज की गई है। जल भंडारण में यह गिरावट आने वाले महीनों में खेती, पीने के पानी और बिजली उत्पादन के लिए चुनौती बढ़ा सकती है।

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केंद्रीय जल आयोग के साप्ताहिक जलाशय भंडारण बुलेटिन के अनुसार, 178 प्रमुख जलाशयों में कुल 126.717 अरब घन मीटर पानी उपलब्ध है, जबकि इनकी कुल उपयोगी भंडारण क्षमता 184.762 अरब घन मीटर है। ये जलाशय देश की कुल 257.812 अरब घन मीटर जल भंडारण क्षमता का लगभग 71.67 फीसदी हिस्सा रखते हैं। इसलिए इनका जलस्तर देश में पानी की उपलब्धता का महत्वपूर्ण संकेत देता है। मौजूदा भंडारण पिछले साल की इसी अवधि से 41.193 अरब घन मीटर कम है। यह 24.53 फीसदी की गिरावट है। पिछले दस वर्षों के औसत सामान्य भंडारण की तुलना में भी 24.930 अरब घन मीटर यानी 16.44 फीसदी कम पानी है।
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जलाशयों में पानी की कमी कितनी गंभीर है?
आंकड़े बताते हैं कि जलाशयों में पानी की कमी सिर्फ उनकी पूरी क्षमता तक नहीं भर पाने की समस्या नहीं है, बल्कि पिछले साल और लंबे समय के औसत के मुकाबले भी भंडारण कम है। इसका असर उन क्षेत्रों पर ज्यादा पड़ सकता है जहां खेती और पेयजल की जरूरतों के लिए जलाशयों पर निर्भरता अधिक है। मानसून के बाद जलाशयों में जमा पानी का इस्तेमाल आगे के महीनों में सिंचाई, घरेलू जरूरतों और बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है। ऐसे में कम भंडारण की स्थिति में पानी के इस्तेमाल की योजना बनाना महत्वपूर्ण हो जाता है। हालांकि, किसी क्षेत्र में वास्तविक जल संकट कितना गंभीर होगा, यह वहां पानी की मांग, भूजल की उपलब्धता और आगे होने वाली बारिश पर भी निर्भर करेगा।
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दक्षिण भारत के किन जलाशयों में पानी सबसे कम है?
दक्षिण भारत के कई प्रमुख जलाशयों में सामान्य भंडारण के मुकाबले पानी का स्तर काफी नीचे है। आंध्र प्रदेश के सोमासिला जलाशय में सामान्य भंडारण का 22.05 फीसदी और श्रीशैलम में 33.64 फीसदी पानी उपलब्ध है। तमिलनाडु के मेट्टूर में यह स्तर 32.49 फीसदी दर्ज किया गया है। केरल के इडुक्की जलाशय में सामान्य भंडारण का सिर्फ 10.62 फीसदी पानी उपलब्ध है। कर्नाटक के घटप्रभा में यह स्तर 22.56 फीसदी और तुंगभद्रा में 22.54 फीसदी है। केरल के शोलायार में सामान्य भंडारण का 23.62 फीसदी और पेरियार में 46.43 फीसदी पानी दर्ज किया गया है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि दक्षिण भारत के कई जलाशयों में पानी का भंडार सामान्य स्तर से काफी नीचे है।

महाराष्ट्र के जलाशयों में क्या स्थिति है?
महाराष्ट्र के कई जलाशयों में भी सामान्य भंडारण की तुलना में पानी की कमी दर्ज की गई है। जायकवाड़ी में सामान्य भंडारण का 15.55 फीसदी, उजनी में 10.62 फीसदी, मंजरा में 12.45 फीसदी और लोअर तेरना में 28.24 फीसदी पानी उपलब्ध है। ये आंकड़े इन जलाशयों में सामान्य स्तर के मुकाबले कम भंडारण को दिखाते हैं। वहीं, कर्नाटक के अलीयार जलाशय का भंडारण सामान्य स्तर के मुकाबले शून्य फीसदी बताया गया है। इसका अर्थ सामान्य भंडारण की तुलना में उपलब्ध पानी का स्तर शून्य दर्ज होना है। इसे जलाशय में भौतिक रूप से बिल्कुल पानी नहीं होने के बराबर नहीं माना जाना चाहिए। कम भंडारण वाले इन जलाशयों से जुड़े क्षेत्रों में पानी की जरूरतों का प्रबंधन आने वाले समय में अहम हो सकता है।

कितने जलाशयों में सामान्य स्तर का 50 से 80 फीसदी पानी है?
जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 42 जलाशयों में पानी का स्तर सामान्य भंडारण के 50 से 80 फीसदी के बीच है। इनमें 11 जलाशयों में सामान्य का 51 से 60 फीसदी, 14 में 61 से 70 फीसदी और 17 में 71 से 80 फीसदी पानी उपलब्ध है। इससे पता चलता है कि सभी जलाशयों की स्थिति एक जैसी नहीं है। कुछ में पानी की कमी बहुत ज्यादा है, जबकि कुछ में सामान्य स्तर के मुकाबले बेहतर भंडारण मौजूद है। जल भंडारण की यह स्थिति अलग-अलग क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता और जरूरतों के बीच अंतर को भी सामने लाती है।

जलविद्युत उत्पादन पर कम भंडारण का क्या असर पड़ सकता है?
देश की 20 जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े जलाशयों में से 12 का भंडारण सामान्य स्तर से कम या उसके बराबर है। जलविद्युत उत्पादन के लिए पानी की उपलब्धता महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में कम भंडारण बिजली उत्पादन की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित परियोजना में कितना पानी उपलब्ध है, बिजली उत्पादन की जरूरत क्या है और स्थानीय परिस्थितियां कैसी हैं। उपलब्ध आंकड़े यह संकेत देते हैं कि कुछ जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े जलाशयों में पानी की स्थिति पर नजर रखने की जरूरत है।

कावेरी और पेन्नार नदी बेसिन में पानी की कितनी कमी है?
नदी बेसिन के आंकड़ों में कावेरी और पेन्नार की स्थिति सबसे चिंताजनक दिखाई देती है। कावेरी बेसिन में सामान्य भंडारण के मुकाबले 60.50 फीसदी कम पानी उपलब्ध है, जबकि पेन्नार बेसिन में यह कमी 72.32 फीसदी है। इसके अलावा, कृष्णा बेसिन में सामान्य से 32.59 फीसदी और साबरमती बेसिन में 38.03 फीसदी कम भंडारण दर्ज किया गया है। सिंधु, माही, कच्छ-सौराष्ट्र और लूणी नदी क्षेत्रों में भी जल भंडारण कमी वाली श्रेणी में है। पेन्नार से कन्याकुमारी तक बहने वाली पूर्ववाहिनी नदियों और तादरी से कन्याकुमारी तक की पश्चिमवाहिनी नदियों के बेसिन में भी कमी दर्ज की गई है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि दक्षिण भारत के कई नदी क्षेत्रों में पानी का भंडार सामान्य स्तर से काफी नीचे है।

किन नदी बेसिन में सामान्य से ज्यादा पानी उपलब्ध है?
जहां कई नदी बेसिन में पानी की कमी है, वहीं कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक भंडारण दर्ज किया गया है। नर्मदा बेसिन में सामान्य से 7.81 फीसदी अधिक पानी उपलब्ध है। महानदी बेसिन में भंडारण सामान्य से 2.95 फीसदी ज्यादा है, जबकि स्वर्णरेखा बेसिन में सामान्य स्तर के मुकाबले 30.74 फीसदी अधिक पानी दर्ज किया गया है। इसके अलावा, गंगा, ताप्ती, गोदावरी, ब्रह्मपुत्र और ब्राह्मणी-बैतरणी सहित कई नदी बेसिन में जल भंडारण सामान्य स्तर के करीब है। इससे स्पष्ट होता है कि देश के सभी हिस्सों में जल भंडारण की स्थिति एक जैसी नहीं है। कुछ क्षेत्रों में स्थिति बेहतर है, जबकि अन्य क्षेत्रों में कमी बनी हुई है।


आने वाले महीनों में पानी की कमी चुनौती क्यों बढ़ा सकती है?
मानसून के बाद जलाशयों में जमा पानी का इस्तेमाल सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और अन्य जरूरतों के लिए किया जाता है। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, देश के प्रमुख जलाशयों में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 24.53 फीसदी कम पानी है। दक्षिण भारत के कावेरी और पेन्नार बेसिन में सामान्य से बड़ी कमी आने वाले महीनों की चिंता बढ़ाती है। कम भंडारण की स्थिति में पानी की उपलब्धता और उसकी मांग के बीच संतुलन बनाना जरूरी होगा। हालांकि, आगे की बारिश, भूजल की स्थिति, स्थानीय जरूरतों और जलाशयों से पानी छोड़ने के फैसलों से हालात पर असर पड़ सकता है। इसलिए मौजूदा आंकड़े चिंता का संकेत देते हैं, लेकिन किसी क्षेत्र में संकट की वास्तविक गंभीरता का आकलन स्थानीय परिस्थितियों के साथ ही किया जा सकता है।

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