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ई20 ईंधन नीति पर वैज्ञानिक क्यों नाराज?: पानी, फसल और भूजल को लेकर जताई चिंता; विज्ञान को लेकर भी दिया संदेश
Sun, 13 Sep 2026 06:28 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Sun, 13 Sep 2026 06:28 PM IST
सार
मुंबई में इंडिया मार्च फॉर साइंस के दौरान वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार से ई20 ईंधन नीति पर रोक लगाने, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी खत्म करने और देश में काला जादू विरोधी कानून बनाने की मांग की। समूह ने शिक्षा और शोध का बजट बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण मजबूत करने और नीतियां वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर बनाने की अपील भी की। सवाल है कि वैज्ञानिकों ने इन मांगों के पीछे क्या वजह बताई? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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वैज्ञानिकों ने ई20 पर भी उठाए सवाल
- फोटो : ANI
विस्तार
मुंबई में शनिवार को इंडिया मार्च फॉर साइंस के दौरान वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक समूह ने सरकार से कई नीतिगत बदलाव करने की मांग की। सामूहिक अपील में ई20 यानी पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाने की नीति पर तत्काल रोक लगाने, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए को खत्म करने और देशभर में काला जादू विरोधी कानून बनाने की मांग की गई। समूह ने कहा कि सरकारी नीतियां वैज्ञानिक प्रमाण, तर्क और तथ्यों के आधार पर बननी चाहिए।
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ई20 ईंधन नीति पर वैज्ञानिकों को क्या आपत्ति है?
समूह ने ई20 ईंधन नीति को तत्काल रोकने की मांग करते हुए कहा कि इसके पर्यावरण पर पूरे असर का व्यापक आकलन नहीं किया गया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक ईंधन के लिए पानी की ज्यादा जरूरत वाली खाद्य फसलों को इस्तेमाल करने से खाद्य सुरक्षा पर खतरा पैदा हो सकता है। इससे भूजल भंडार पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है। समूह ने ई20 नीति के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे की कमी का मुद्दा भी उठाया और इस पर नए सिरे से विचार करने की मांग की।
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एनटीए और परीक्षा व्यवस्था को लेकर क्या कहा गया?
अपील में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को खत्म करने और देश की परीक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की मांग की गई। वैज्ञानिकों और कार्यकर्ताओं ने हाल में सामने आए प्रश्नपत्र लीक के मामलों और देशभर में हुए नीट विरोध प्रदर्शनों का हवाला देते हुए परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि शिक्षा से जुड़े संस्थानों और परीक्षाओं की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें छात्रों का भरोसा बना रहे और पारदर्शिता सुनिश्चित हो।
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