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रिटायर्ड शिक्षिका से 89 लाख की साइबर ठगी: गहने बेचे, पर्सनल लोन भी लिया; कैसे रचा पूरा जाल?
Mon, 05 Oct 2026 07:12 AM IST
निर्मल कांत
ब्यूरो, मुंबई।
ब्यूरो, मुंबई।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 05 Oct 2026 07:12 AM IST
सार
मुंबई में 60 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षिका को साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 89 लाख रुपये ठग लिए। आखिर ठगों ने ऐसा क्या कहा कि शिक्षिका अपनी जमा-पूंजी तक गंवा बैठीं? पढ़िए इस रिपोर्ट में।
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साइबर अपराध
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
आर्थिक राजधानी मुंबई के चेंबूर इलाके से साइबर ठगी का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। साइबर अपराधियों ने 'डिजिटल अरेस्ट' का खौफ दिखाकर एक 60 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षिका से 89 लाख रुपये हड़प लिए। ठगों का जाल ऐसा था कि पीड़िता ने अपनी जिंदगी भर की जमा-पूंजी गंवाने के साथ ही अपना सोना तक बेच दिया और बैंक से पर्सनल लोन लेकर बदमाशों को पैसे ट्रांसफर कर दिए।
ठगी की शुरुआत एक अनजान कॉल से हुई। ठग ने खुद को एनआईए (नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी) का अधिकारी बताया। उसने शिक्षिका से कहा कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल 2.55 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग घोटाले में हुआ है। ठगों ने महिला को वीडियो कॉल पर लगातार नजर में रखते हुए डिजिटल अरेस्ट की बात कही, जिससे वह बुरी तरह घबरा गई।
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खाते में जमा 53 लाख रुपये लिए : कानूनी पचड़े से बचने के नाम पर ठगों ने शिक्षिका के खाते में जमा 53 लाख रुपये अपने अकाउंट्स में ट्रांसफर करवा लिए। ठगों के कहने पर पीड़िता ने अपने गहने एक प्राइवेट फाइनेंस कंपनी में जाकर बेच दिए और उससे मिले 3.70 लाख रुपये भी ठगों को भेज दिए। इसके बाद जालसाजों के दबाव पर पीड़िता ने बैंक से भारी-भरकम पर्सनल लोन लिया और वह रकम भी अपराधियों के हवाले कर दी। कुल मिलाकर 89 लाख रुपये लूट लिए।
ठगी से आप भी रहें सतर्क और करें ये उपाय
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ठगी की शुरुआत एक अनजान कॉल से हुई। ठग ने खुद को एनआईए (नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी) का अधिकारी बताया। उसने शिक्षिका से कहा कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल 2.55 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग घोटाले में हुआ है। ठगों ने महिला को वीडियो कॉल पर लगातार नजर में रखते हुए डिजिटल अरेस्ट की बात कही, जिससे वह बुरी तरह घबरा गई।
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खाते में जमा 53 लाख रुपये लिए : कानूनी पचड़े से बचने के नाम पर ठगों ने शिक्षिका के खाते में जमा 53 लाख रुपये अपने अकाउंट्स में ट्रांसफर करवा लिए। ठगों के कहने पर पीड़िता ने अपने गहने एक प्राइवेट फाइनेंस कंपनी में जाकर बेच दिए और उससे मिले 3.70 लाख रुपये भी ठगों को भेज दिए। इसके बाद जालसाजों के दबाव पर पीड़िता ने बैंक से भारी-भरकम पर्सनल लोन लिया और वह रकम भी अपराधियों के हवाले कर दी। कुल मिलाकर 89 लाख रुपये लूट लिए।
ठगी से आप भी रहें सतर्क और करें ये उपाय
- किसी को भी अपना पिन न दें। बैंक अधिकारी, या कोई भी सरकारी विभाग कभी ओटीपी, यूपीआई पिन या एटीएम पिन नहीं मांगता।
- अपने नेट बैंकिंग का पासवर्ड और सीवीवी नंबर किसी को न बताएं।
- एसएमएस, व्हाट्सएप या ईमेल पर आए संदिग्ध लिंक्स पर क्लिक करने से बचें।
- अपने सभी सोशल मीडिया और बैंकिंग ऐप्स के लिए कठिन पासवर्ड बनाएं।
- किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने फोन में एनी डेस्क, टीम व्यूवर या रस्ट डेस्क जैसे स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स डाउनलोड न करें। इससे ठग आपके फोन का पूरा एक्सेस ले लेते हैं।
- अगर ठगी हो जाए तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें और अपने बैंक को सूचना दें।