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वीबी-जी राम जी: मनरेगा की नई व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर बरसी कांग्रेस, भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप
Tue, 20 Oct 2026 01:07 PM IST
अमन मौर्या
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: अमन मौर्या
Updated Tue, 20 Oct 2026 01:07 PM IST
सार
कांग्रेस ने मनरेगा की जगह लाई गई 'वीबी जी राम जी' योजना को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने महाराष्ट्र के बीड समेत कई राज्यों में फर्जी हाजिरी और ग्रामीण मजदूरी चोरी का गंभीर आरोप लगाया है।
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जयराम रमेश, कांग्रेस महासचिव
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
कांग्रेस ने वीबी-जी राम जी ( पूर्व में मनरेगा) को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला है। मंगलवार को पार्टी ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा मनरेगा की जगह लाई गई नई व्यवस्था, ग्रामीण भारत को सुरक्षा देने वाले 'सोशल सेफ्टी नेट' (सामाजिक सुरक्षा कवच) पर एक सर्जिकल स्ट्राइक से कम नहीं है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि 'वोट चोरी सरकार' ने अब 'ग्रामीण मजदूरी चोरी' में भी महारत हासिल कर ली है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि सूखे की मार झेल रहे महाराष्ट्र में, कागजों पर तो वीबी जी राम जी योजना के तहत हजारों लोग काम कर रहे थे, लेकिन बीड जिले में पांच अलग-अलग जगहों पर मौके पर एक भी मजदूर नहीं मिला।
ये भी पढ़ें: महाराष्ट्र: सूखे ने छीनी कमाई, बेटी की मेडिकल फीस भी नहीं हुई माफ; लातूर के बेबस किसान ने वीडियो बना दी जान
वीबी जी राम जी योजना पर क्या बोले कांग्रेस नेता?
अपने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट में रमेश ने कहा, 'महाराष्ट्र के बीड और अन्य जिलों में पिछले एक दशक का सबसे भीषण सूखा पड़ा है। ऐसे कठिन समय में मनरेगा लोगों के लिए एक सुरक्षा की गारंटी था। लेकिन इसकी जगह वीबी जी राम जी योजना को लाना, ग्रामीण भारत को सुरक्षा देने वाले 'सोशल सेफ्टी नेट' पर एक 'सर्जिकल स्ट्राइक' से कम नहीं है।'
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एक रिपोर्टर द्वारा की गई विस्तृत जमीनी जांच का हवाला देते हुए, रमेश ने बताया कि कई ग्रामीणों को कागजों पर तो काम करते हुए दिखाया गया, जबकि असल में उन्होंने महीनों से कोई काम ही नहीं किया था। रमेश ने कहा कि इसके बजाय, स्थानीय नेता, जो जाहिर तौर पर सत्ताधारी पार्टी से जुड़े हैं, उनकी मजदूरी अपनी जेब में डाल रहे हैं। मीडिया में उत्तर प्रदेश और भाजपा शासित अन्य राज्यों से भी ऐसी फर्जी हाजिरी और 'क्लोन ऐप' घोटाले के सबूत सामने आए हैं। कांग्रेस नेता ने कहा, 'यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं है, बल्कि मजदूरों की मजदूरी की एक सुनियोजित चोरी है। इस 'वोट चोरी सरकार' ने 'ग्रामीण मजदूरी चोरी' में भी महारत हासिल कर ली है।'
पिछले हफ्ते भी कांग्रेस ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि वीबी जी राम जी योजना केवल तकनीक के जरिए लोगों को योजनाओं से बाहर करने, सत्ता के केंद्रीकरण और ग्राम पंचायतों को कमजोर करने की गारंटी देता है। कांग्रेस ने वीबी जी राम जी योजना में हाजिरी से जुड़े फर्जीवाड़े को लेकर भी भाजपा की कड़ी आलोचना की।
तमिलनाडु ने की बड़ी घोषणा
इस बीच तमिलनाडु से वीबी जी राम जी को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश सरकार ने वीबी जी राम जी योजना के तहत 125 दिनों का काम पूरा करने वाले पात्र ग्रामीण परिवारों को, राज्य कोष से 25 दिनों का अतिरिक्त वेतन-रोजगार देने की घोषणा की है। बता दें कि एक आदेश के अनुसार, 'महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005' के निरस्त होने के बाद, केंद्र सरकार ने पूरे देश में 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)' (वीबी जी राम जी) योजना शुरू की। इसे 1 जुलाई, 2026 से पूरे तमिलनाडु में लागू किया गया, जिसके तहत 125 दिनों के काम की कानूनी गारंटी दी गई थी। इस पहल की समीक्षा करते हुए, मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अधिकारियों को प्रति वर्ष 150 दिनों तक का काम उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
ये भी पढ़ें: महाराष्ट्र: नाबालिग के कपड़े उतारकर मारपीट का वीडियो वायरल, एक आरोपी गिरफ्तार; पुलिस ने क्या दी चेतावनी?
किसे मिलेगी प्राथमिकता?
इन अतिरिक्त 25 दिनों के काम में प्राथमिकता उन परिवारों को दी जाएगी जिनकी मुखिया महिलाएं हैं, अकेली रहने वाली महिलाओं को, ऐसे परिवारों को जिनमें दिव्यांग व्यक्ति हैं, अनुसूचित जातियों (एससी), अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के लोगों को और 'अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006' के तहत आने वाले लाभार्थियों को दी जाएगी।
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वीबी जी राम जी योजना पर क्या बोले कांग्रेस नेता?
अपने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट में रमेश ने कहा, 'महाराष्ट्र के बीड और अन्य जिलों में पिछले एक दशक का सबसे भीषण सूखा पड़ा है। ऐसे कठिन समय में मनरेगा लोगों के लिए एक सुरक्षा की गारंटी था। लेकिन इसकी जगह वीबी जी राम जी योजना को लाना, ग्रामीण भारत को सुरक्षा देने वाले 'सोशल सेफ्टी नेट' पर एक 'सर्जिकल स्ट्राइक' से कम नहीं है।'
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एक रिपोर्टर द्वारा की गई विस्तृत जमीनी जांच का हवाला देते हुए, रमेश ने बताया कि कई ग्रामीणों को कागजों पर तो काम करते हुए दिखाया गया, जबकि असल में उन्होंने महीनों से कोई काम ही नहीं किया था। रमेश ने कहा कि इसके बजाय, स्थानीय नेता, जो जाहिर तौर पर सत्ताधारी पार्टी से जुड़े हैं, उनकी मजदूरी अपनी जेब में डाल रहे हैं। मीडिया में उत्तर प्रदेश और भाजपा शासित अन्य राज्यों से भी ऐसी फर्जी हाजिरी और 'क्लोन ऐप' घोटाले के सबूत सामने आए हैं। कांग्रेस नेता ने कहा, 'यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं है, बल्कि मजदूरों की मजदूरी की एक सुनियोजित चोरी है। इस 'वोट चोरी सरकार' ने 'ग्रामीण मजदूरी चोरी' में भी महारत हासिल कर ली है।'
पिछले हफ्ते भी कांग्रेस ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि वीबी जी राम जी योजना केवल तकनीक के जरिए लोगों को योजनाओं से बाहर करने, सत्ता के केंद्रीकरण और ग्राम पंचायतों को कमजोर करने की गारंटी देता है। कांग्रेस ने वीबी जी राम जी योजना में हाजिरी से जुड़े फर्जीवाड़े को लेकर भी भाजपा की कड़ी आलोचना की।
तमिलनाडु ने की बड़ी घोषणा
इस बीच तमिलनाडु से वीबी जी राम जी को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश सरकार ने वीबी जी राम जी योजना के तहत 125 दिनों का काम पूरा करने वाले पात्र ग्रामीण परिवारों को, राज्य कोष से 25 दिनों का अतिरिक्त वेतन-रोजगार देने की घोषणा की है। बता दें कि एक आदेश के अनुसार, 'महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005' के निरस्त होने के बाद, केंद्र सरकार ने पूरे देश में 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)' (वीबी जी राम जी) योजना शुरू की। इसे 1 जुलाई, 2026 से पूरे तमिलनाडु में लागू किया गया, जिसके तहत 125 दिनों के काम की कानूनी गारंटी दी गई थी। इस पहल की समीक्षा करते हुए, मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अधिकारियों को प्रति वर्ष 150 दिनों तक का काम उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
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किसे मिलेगी प्राथमिकता?
इन अतिरिक्त 25 दिनों के काम में प्राथमिकता उन परिवारों को दी जाएगी जिनकी मुखिया महिलाएं हैं, अकेली रहने वाली महिलाओं को, ऐसे परिवारों को जिनमें दिव्यांग व्यक्ति हैं, अनुसूचित जातियों (एससी), अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के लोगों को और 'अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006' के तहत आने वाले लाभार्थियों को दी जाएगी।