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बंगाल: दुर्गा पूजा के दौरान पुस्तक स्टॉलों में तोड़फोड़ का मामला कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचा, 20 अक्तूबर को सुनवाई

Mon, 19 Oct 2026 09:40 PM IST
राहुल कुमार आईएएनएस, कोलकाता।
आईएएनएस, कोलकाता। Published by: राहुल कुमार Updated Mon, 19 Oct 2026 09:40 PM IST
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case of vandalism of book stalls during Durga Puja reached Calcutta High Court
कलकत्ता हाईकोर्ट - फोटो : ANI

पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के त्योहार के दौरान कई सामुदायिक दुर्गा पूजा पंडालों के पास सीपीआई (एम) के पुस्तक स्टॉलों में तोड़फोड़ की घटनाओं पर मंगलवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय की अवकाशकालीन पीठ में तत्काल सुनवाई होगी।  इस मामले में तत्काल सुनवाई की अपील वाली याचिका को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सोमवार को स्वीकार कर लिया। पूरी संभावना है कि मामले की सुनवाई जस्टिस पार्थ प्रतीम रॉय की अवकाशकालीन पीठ द्वारा की जाएगी।

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उक्त याचिका मुआवजे की मांग के साथ दक्षिण कोलकाता के जादवपुर क्षेत्र में सीपीआई (एम) की क्षेत्रीय समिति द्वारा दायर की गई है। दुर्गा पूजा के दौरान त्योहार शुरू होने के बाद से ही कोलकाता समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में सीपीआई (एम) द्वारा आयोजित पुस्तक स्टॉलों में तोड़फोड़ की खबरें आ रही हैं। सप्तमी की रात को जादवपुर इलाके में सीपीआई (एम) के दो पुस्तक स्टॉलों में तोड़फोड़ की गई। इस घटना पर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। इस बार सीपीआई (एम) ने कानूनी रास्ता अपनाया है।
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कई बुद्धिजीवियों और नागरिक समाज के सदस्यों ने सीपीआई (एम) के पुस्तक स्टॉलों में तोड़फोड़ की घटनाओं की निंदा की है। यहां तक कि राज्य के वित्त मंत्री, पत्रकार से राजनेता बने स्वपन दासगुप्ता ने भी इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं न केवल दुर्भाग्यपूर्ण हैं बल्कि शर्मनाक भी हैं।
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दासगुप्ता ने कहा, “अगर यह घटना एक अलग-थलग मामला होता तो मैं समझ सकता था, लेकिन यह तीन-चार जगहों पर हुई। मैं इसे किसी भी तरह से स्वीकार नहीं कर सकता। वामपंथी दलों से हमारे वैचारिक मतभेद हैं, लेकिन कुछ लोग उन्हें किताबें क्यों नहीं बेचने देते? वे कौन होते हैं? उन्हें यह अधिकार किसने दिया? ऐसे मामले निंदनीय हैं। मुझे शर्म आती है। ईश्वर करे ऐसा दोबारा कभी न हो।”

सीपीआई(एम) के नेता और कार्यकर्ता दुर्गा पूजा में धार्मिक गतिविधियों से कभी नहीं जुड़ते, लेकिन वर्षों से पार्टी कार्यकर्ता राज्य के लोकप्रिय सामुदायिक दुर्गा पूजा पंडालों के पास कम्युनिस्ट और मार्क्सवादी साहित्य बेचने वाले पुस्तक स्टॉल लगाते आ रहे हैं।


ऐसा माना जाता है कि यह प्रथा एक प्रभावी जनसंपर्क रणनीति भी है, खासकर ऐसे समय में जब इन त्योहारों के दौरान पूजा पंडालों में बड़ी संख्या में लोग एकत्रित होते हैं। इस वर्ष कम्युनिस्ट और मार्क्सवादी साहित्य की पुस्तकों के अलावा, सीपीआई (एम) के पुस्तक स्टालों में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर और शरत चंद्र चट्टोपाध्याय जैसे लोकप्रिय बंगाली कवियों और लेखकों की साहित्यिक कृतियां भी प्रदर्शित की गईं।

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