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अब मनमाना हवाई किराया वसूलना आसान नहीं होगा?: नए साल से लागू होंगे नियम, सरकार ने और क्या-क्या बदला?
Mon, 02 Nov 2026 11:03 AM IST
देवेश त्रिपाठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Mon, 02 Nov 2026 11:03 AM IST
सार
केंद्र सरकार ने हवाई टिकटों की कीमतों को लेकर भारतीय विमानन नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं। इनके तहत असाधारण परिस्थितियों में जनहित को ध्यान में रखते हुए सरकार एयरलाइंस को किराये पर निर्देश दे सकेगी। नए नियमों में टिकट बुकिंग के दौरान कुल कीमत बताना अनिवार्य किया गया है।
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89 साल पुराने विमान नियमों की जगह लेंगे नए भारतीय विमानन नियम
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
केंद्र सरकार ने हवाई टिकटों की कीमतों को लेकर नए नियम अधिसूचित किए हैं। इनके तहत असाधारण परिस्थितियों और जनहित में जरूरत पड़ने पर सरकार एयरलाइंस के किराये में हस्तक्षेप कर सकेगी। कच्चे तेल और विमान ईंधन (एटीएफ) की ऊंची कीमतों के बीच हवाई किराये में बढ़ोतरी की चिंताओं को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से अधिसूचित भारतीय विमानन नियम, 2026 के तहत केंद्र सरकार असाधारण स्थिति में एयरलाइंस को किराये को लेकर निर्देश जारी कर सकती है। ऐसे निर्देश हालात के अनुरूप होने चाहिए और केवल तय अवधि तक ही लागू रहेंगे।
सरकार कब कर सकती है किराये के मामले में हस्तक्षेप?
नियम 192 के अनुसार, नियमित हवाई सेवाएं संचालित करने वाली एयरलाइंस को परिचालन लागत सहित विभिन्न कारकों के आधार पर किराया तय करना होगा। साथ ही उन्हें किराये से जुड़ी जानकारी नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) को देनी होगी। नियमों में कहा गया है कि अगर सरकार को लगता है कि कोई असाधारण स्थिति पैदा हुई है और जनहित में हस्तक्षेप जरूरी है, तो वह लिखित निर्देश जारी कर सकती है।
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किराये की जानकारी सार्वजनिक करना होगा अनिवार्य
नए नियमों के तहत एयरलाइंस को अपनी वेबसाइट और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर टिकटों का किराया प्रकाशित करना होगा। इसका उद्देश्य किराये में पारदर्शिता बनाए रखना और यात्रियों को सही जानकारी उपलब्ध कराना है। डीजीसीए नियमित हवाई सेवाएं देने वाली एयरलाइंस के किराये पर नजर रखेगा।
नियमों के तहत टिकट बुक करते समय और टिकट पर यात्रियों को कुल देय राशि बताना अनिवार्य होगा। एयरलाइंस को बेस किराया, टैक्स, शुल्क, टिकट रद्द करने का चार्ज, रिफंड की शर्तों और अन्य लागू शुल्कों का अलग-अलग ब्योरा भी देना होगा।
नियमों में सरकार को दिए जाने वाले टैक्स और एयरलाइंस की ओर से यात्रियों को उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं या सुविधाओं के बदले वसूले जाने वाले शुल्क के बीच भी अंतर स्पष्ट किया गया है।
सरकार ने तय की एयरलाइंस की जिम्मेदारियां
नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से अधिसूचित नए नियमों में विमान पंजीकरण, प्रमाणन, निर्माण, रखरखाव, उड़ान संचालन, कर्मचारियों के लाइसेंस और हवाई अड्डों के संचालन से जुड़े व्यापक प्रावधान शामिल हैं। इन नियमों में विमान मालिकों, ऑपरेटरों, एयरलाइंस और विमानन क्षेत्र से जुड़े अन्य पक्षों की जिम्मेदारियां भी तय की गई हैं।
नए नियमों के तहत विमान के पंजीकरण और उड़ान के लिए उसकी सुरक्षा संबंधी प्रमाणन की व्यवस्था की गई है। इसके जरिए यह तय किया जाएगा कि कोई विमान संचालन के लिए सुरक्षित और उपयुक्त है या नहीं। नए ढांचे में विमान के डिजाइन, निर्माण मानकों, उसमें बदलाव और मरम्मत से जुड़ी मंजूरी के प्रावधान भी शामिल हैं।
विमानों के पूरे परिचालन जीवनकाल के दौरान नियमित जांच और रखरखाव अनिवार्य होगा। ऑपरेटरों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि विमान सुरक्षा मानकों का लगातार पालन करें और उड़ान के लिए सुरक्षित स्थिति में रहें।
पायलटों और विमानन कर्मचारियों के लिए तय होंगे मानक
नए नियमों में पायलट, विमान रखरखाव इंजीनियर और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर सहित विमानन क्षेत्र के कर्मचारियों की योग्यता और लाइसेंस से जुड़े प्रावधान किए गए हैं। इनमें प्रशिक्षण, परीक्षा, अनुभव और मेडिकल फिटनेस की शर्तें तय की गई हैं। साथ ही लाइसेंस के नवीनीकरण, निलंबन और रद्द करने से जुड़ी व्यवस्थाएं भी शामिल हैं।
नियमों में एयरलाइंस के संचालन, उड़ान की योजना, परिचालन प्रक्रियाओं और सुरक्षा संबंधी जरूरतों को भी शामिल किया गया है। पायलट और केबिन क्रू के उड़ान तथा ड्यूटी के समय की सीमा से जुड़े प्रावधान भी किए गए हैं। इनका उद्देश्य कर्मचारियों की थकान को रोकना और उड़ानों की सुरक्षा बेहतर बनाना है।
1994 में हवाई किराये तय करने की व्यवस्था हुई थी मुक्त
भारत में 1994 में एयरलाइंस को बाजार की परिस्थितियों के आधार पर हवाई किराया तय करने की छूट दी गई थी। नागरिक उड्डयन मंत्रालय का कहना रहा है कि एयरलाइंस आमतौर पर मांग, परिचालन लागत और टिकट बुक करने के समय के आधार पर किराया तय करती हैं। यात्रियों के लिए अलग-अलग कीमतों के विकल्प भी उपलब्ध होते हैं।
इससे पहले लागू विमान नियम, 1937 के नियम 135(4) के तहत डीजीसीए को अत्यधिक या अनुचित कीमत वसूलने, प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचाने वाली कीमतों और बाजार में कुछ कंपनियों के दबदबे जैसी स्थितियों में निर्देश जारी करने का अधिकार था।
हालांकि, नए नियम 192 में एयरलाइंस के किराये की निगरानी का प्रावधान बरकरार रखा गया है, लेकिन इसमें अत्यधिक या अनुचित कीमत वसूलने और कुछ कंपनियों के बाजार पर दबदबे को सरकार के हस्तक्षेप के स्पष्ट आधार के रूप में शामिल नहीं किया गया है। नया ढांचा असाधारण परिस्थितियों में केंद्र सरकार को हवाई किराये को लेकर निर्देश जारी करने का अधिकार देता है। इसके लिए नियमों में तय शर्तों का पालन करना होगा।
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केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से अधिसूचित भारतीय विमानन नियम, 2026 के तहत केंद्र सरकार असाधारण स्थिति में एयरलाइंस को किराये को लेकर निर्देश जारी कर सकती है। ऐसे निर्देश हालात के अनुरूप होने चाहिए और केवल तय अवधि तक ही लागू रहेंगे।
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सरकार कब कर सकती है किराये के मामले में हस्तक्षेप?
नियम 192 के अनुसार, नियमित हवाई सेवाएं संचालित करने वाली एयरलाइंस को परिचालन लागत सहित विभिन्न कारकों के आधार पर किराया तय करना होगा। साथ ही उन्हें किराये से जुड़ी जानकारी नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) को देनी होगी। नियमों में कहा गया है कि अगर सरकार को लगता है कि कोई असाधारण स्थिति पैदा हुई है और जनहित में हस्तक्षेप जरूरी है, तो वह लिखित निर्देश जारी कर सकती है।
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किराये की जानकारी सार्वजनिक करना होगा अनिवार्य
नए नियमों के तहत एयरलाइंस को अपनी वेबसाइट और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर टिकटों का किराया प्रकाशित करना होगा। इसका उद्देश्य किराये में पारदर्शिता बनाए रखना और यात्रियों को सही जानकारी उपलब्ध कराना है। डीजीसीए नियमित हवाई सेवाएं देने वाली एयरलाइंस के किराये पर नजर रखेगा।
नियमों के तहत टिकट बुक करते समय और टिकट पर यात्रियों को कुल देय राशि बताना अनिवार्य होगा। एयरलाइंस को बेस किराया, टैक्स, शुल्क, टिकट रद्द करने का चार्ज, रिफंड की शर्तों और अन्य लागू शुल्कों का अलग-अलग ब्योरा भी देना होगा।
नियमों में सरकार को दिए जाने वाले टैक्स और एयरलाइंस की ओर से यात्रियों को उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं या सुविधाओं के बदले वसूले जाने वाले शुल्क के बीच भी अंतर स्पष्ट किया गया है।
सरकार ने तय की एयरलाइंस की जिम्मेदारियां
नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से अधिसूचित नए नियमों में विमान पंजीकरण, प्रमाणन, निर्माण, रखरखाव, उड़ान संचालन, कर्मचारियों के लाइसेंस और हवाई अड्डों के संचालन से जुड़े व्यापक प्रावधान शामिल हैं। इन नियमों में विमान मालिकों, ऑपरेटरों, एयरलाइंस और विमानन क्षेत्र से जुड़े अन्य पक्षों की जिम्मेदारियां भी तय की गई हैं।
नए नियमों के तहत विमान के पंजीकरण और उड़ान के लिए उसकी सुरक्षा संबंधी प्रमाणन की व्यवस्था की गई है। इसके जरिए यह तय किया जाएगा कि कोई विमान संचालन के लिए सुरक्षित और उपयुक्त है या नहीं। नए ढांचे में विमान के डिजाइन, निर्माण मानकों, उसमें बदलाव और मरम्मत से जुड़ी मंजूरी के प्रावधान भी शामिल हैं।
विमानों के पूरे परिचालन जीवनकाल के दौरान नियमित जांच और रखरखाव अनिवार्य होगा। ऑपरेटरों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि विमान सुरक्षा मानकों का लगातार पालन करें और उड़ान के लिए सुरक्षित स्थिति में रहें।
पायलटों और विमानन कर्मचारियों के लिए तय होंगे मानक
नए नियमों में पायलट, विमान रखरखाव इंजीनियर और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर सहित विमानन क्षेत्र के कर्मचारियों की योग्यता और लाइसेंस से जुड़े प्रावधान किए गए हैं। इनमें प्रशिक्षण, परीक्षा, अनुभव और मेडिकल फिटनेस की शर्तें तय की गई हैं। साथ ही लाइसेंस के नवीनीकरण, निलंबन और रद्द करने से जुड़ी व्यवस्थाएं भी शामिल हैं।
नियमों में एयरलाइंस के संचालन, उड़ान की योजना, परिचालन प्रक्रियाओं और सुरक्षा संबंधी जरूरतों को भी शामिल किया गया है। पायलट और केबिन क्रू के उड़ान तथा ड्यूटी के समय की सीमा से जुड़े प्रावधान भी किए गए हैं। इनका उद्देश्य कर्मचारियों की थकान को रोकना और उड़ानों की सुरक्षा बेहतर बनाना है।
1994 में हवाई किराये तय करने की व्यवस्था हुई थी मुक्त
भारत में 1994 में एयरलाइंस को बाजार की परिस्थितियों के आधार पर हवाई किराया तय करने की छूट दी गई थी। नागरिक उड्डयन मंत्रालय का कहना रहा है कि एयरलाइंस आमतौर पर मांग, परिचालन लागत और टिकट बुक करने के समय के आधार पर किराया तय करती हैं। यात्रियों के लिए अलग-अलग कीमतों के विकल्प भी उपलब्ध होते हैं।
इससे पहले लागू विमान नियम, 1937 के नियम 135(4) के तहत डीजीसीए को अत्यधिक या अनुचित कीमत वसूलने, प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचाने वाली कीमतों और बाजार में कुछ कंपनियों के दबदबे जैसी स्थितियों में निर्देश जारी करने का अधिकार था।
हालांकि, नए नियम 192 में एयरलाइंस के किराये की निगरानी का प्रावधान बरकरार रखा गया है, लेकिन इसमें अत्यधिक या अनुचित कीमत वसूलने और कुछ कंपनियों के बाजार पर दबदबे को सरकार के हस्तक्षेप के स्पष्ट आधार के रूप में शामिल नहीं किया गया है। नया ढांचा असाधारण परिस्थितियों में केंद्र सरकार को हवाई किराये को लेकर निर्देश जारी करने का अधिकार देता है। इसके लिए नियमों में तय शर्तों का पालन करना होगा।