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एविएशन: हवाई किराये बढ़ाने पर एयरलाइंस की नहीं चलेगी मनमानी; सरकार ने क्या बनाया प्लान, कब से होगा लागू?
Sun, 01 Nov 2026 05:41 PM IST
पवन पांडेय
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Sun, 01 Nov 2026 05:41 PM IST
सार
बुकिंग वेबसाइट और टिकट पर यात्री को चुकाई जाने वाली कुल रकम दिखाना जरूरी होगा। इसमें मूल किराया, टैक्स, दूसरे शुल्क, टिकट रद्द करने का चार्ज और रिफंड की शर्तें अलग-अलग बतानी होंगी।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
विस्तार
हवाई किरायों में मनमानी बढ़ोतरी होने पर केंद्र सरकार दखल दे सकेगी। सरकार ने इसके लिए भारतीय विमानयान नियम, 2026 के तहत नए प्रावधान अधिसूचित किए हैं। ये नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। इनके तहत सरकार असाधारण हालात में जनहित को देखते हुए एयरलाइंस को किराये पर निर्देश दे सकती है।
नियम 192 के मुताबिक, सरकार को लगता है कि हालात असाधारण हैं तो वह किरायों को लेकर निर्देश जारी कर सकती है। ये निर्देश हालात के हिसाब से होंगे और तय अवधि तक ही लागू रहेंगे। हालांकि, नियमों में हवाई किराये की कोई अधिकतम सीमा तय नहीं की गई है। न ही यह बताया गया है कि किराया कितना बढ़ने पर सरकार दखल देगी। यानी सरकार जरूरत पड़ने पर निर्देश दे सकेगी, लेकिन कोई तय किराया सीमा लागू नहीं होगी।
किराये की जानकारी डीजीसीए को देनी होगी
नियमों के तहत एयरलाइंस को परिचालन लागत समेत अन्य बातों को ध्यान में रखकर किराया तय करना होगा। तय किराये की जानकारी निर्धारित तरीके और समय पर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय को देनी होगी। डीजीसीए इन किरायों पर नजर रखेगा। एयरलाइंस को अपनी वेबसाइट या दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी किराये की जानकारी देनी होगी। इससे यात्रियों को किराये के बारे में जानकारी मिलेगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।
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टिकट पर दिखाना होगा पूरा खर्च
बुकिंग वेबसाइट और टिकट पर यात्री को चुकाई जाने वाली कुल रकम दिखाना जरूरी होगा। इसमें मूल किराया, टैक्स, दूसरे शुल्क, टिकट रद्द करने का चार्ज और रिफंड की शर्तें अलग-अलग बतानी होंगी। कोई अन्य शुल्क भी है तो उसका ब्योरा देना होगा। नियमों में सेवा शुल्क उस रकम को बताया गया है, जो यात्रियों को सुविधा या सेवा देने के बदले चुकाई जाती है। टैक्स वह रकम है जो सरकार को दी जाती है।
किराये पर पहले से मंजूरी जरूरी नहीं
नियमों में एयरलाइंस के हर किराये के लिए सरकार से पहले मंजूरी लेने की व्यवस्था नहीं है। साथ ही, जिन मार्गों पर किसी एक एयरलाइन का दबदबा है, उनके लिए अलग नियम भी तय नहीं किए गए हैं। किराये की सीमा तय करने के लिए प्रतिस्पर्धा के आधार पर कोई अलग फॉर्मूला भी नहीं दिया गया है।
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नियम 192 के मुताबिक, सरकार को लगता है कि हालात असाधारण हैं तो वह किरायों को लेकर निर्देश जारी कर सकती है। ये निर्देश हालात के हिसाब से होंगे और तय अवधि तक ही लागू रहेंगे। हालांकि, नियमों में हवाई किराये की कोई अधिकतम सीमा तय नहीं की गई है। न ही यह बताया गया है कि किराया कितना बढ़ने पर सरकार दखल देगी। यानी सरकार जरूरत पड़ने पर निर्देश दे सकेगी, लेकिन कोई तय किराया सीमा लागू नहीं होगी।
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किराये की जानकारी डीजीसीए को देनी होगी
नियमों के तहत एयरलाइंस को परिचालन लागत समेत अन्य बातों को ध्यान में रखकर किराया तय करना होगा। तय किराये की जानकारी निर्धारित तरीके और समय पर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय को देनी होगी। डीजीसीए इन किरायों पर नजर रखेगा। एयरलाइंस को अपनी वेबसाइट या दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी किराये की जानकारी देनी होगी। इससे यात्रियों को किराये के बारे में जानकारी मिलेगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।
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टिकट पर दिखाना होगा पूरा खर्च
बुकिंग वेबसाइट और टिकट पर यात्री को चुकाई जाने वाली कुल रकम दिखाना जरूरी होगा। इसमें मूल किराया, टैक्स, दूसरे शुल्क, टिकट रद्द करने का चार्ज और रिफंड की शर्तें अलग-अलग बतानी होंगी। कोई अन्य शुल्क भी है तो उसका ब्योरा देना होगा। नियमों में सेवा शुल्क उस रकम को बताया गया है, जो यात्रियों को सुविधा या सेवा देने के बदले चुकाई जाती है। टैक्स वह रकम है जो सरकार को दी जाती है।
किराये पर पहले से मंजूरी जरूरी नहीं
नियमों में एयरलाइंस के हर किराये के लिए सरकार से पहले मंजूरी लेने की व्यवस्था नहीं है। साथ ही, जिन मार्गों पर किसी एक एयरलाइन का दबदबा है, उनके लिए अलग नियम भी तय नहीं किए गए हैं। किराये की सीमा तय करने के लिए प्रतिस्पर्धा के आधार पर कोई अलग फॉर्मूला भी नहीं दिया गया है।