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‘15 सवाल पूछे, सीएम ने एक का भी नहीं दिया जवाब’: विजय के भाषण पर भड़के उदयनिधि; डीएमके का विधानसभा से वॉकआउट

Mon, 07 Sep 2026 07:26 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, चेन्नई
पीटीआई, चेन्नई Published by: प्रशांत तिवारी Updated Mon, 07 Sep 2026 07:26 PM IST
सार

तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री जोसेफ सी. विजय के भाषण के बाद डीएमके ने सदन से वॉकआउट कर दिया। विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था से जुड़े 15 सवालों का जवाब देने के बजाय पुराने राजनीतिक मुद्दे और विपक्ष पर भ्रष्टाचार के आरोप उठाकर ध्यान भटकाया। 

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15 questions asked CM didn't answer one Udhayanidhi lashes Vijay speech DMK stages walkout Tamil Nadu Assembly
उदयनिधी स्टालिन, नेता प्रतिपक्ष, तमिलनाडु विधानसभा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

तमिलनाडु में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने सोमवार को मुख्यमंत्री जोसेफ सी. विजय पर विधानसभा में ध्यान भटकाने वाली चालें चलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सदन में डीएमके पर तीखे हमले करने के बावजूद मुख्यमंत्री ने राज्य की कानून-व्यवस्था से जुड़े उनके किसी खास सवाल का जवाब नहीं दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री विजय पर अपने करीबी सहयोगियों द्वारा संचालित एक गुप्त कार्टेल को संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि यह समूह राज्य के माइनिंग कॉन्ट्रैक्ट्स पर एकाधिकार स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। इसके साथ ही उदयनिधि ने मुख्यमंत्री के भाषण को 'याद की हुई फिल्मी स्क्रिप्ट' करार दिया।

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'कानून-व्यवस्था के 15 सवालों का जवाब नहीं मिला'
उदयनिधि ने कहा कि राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री से 15 खास सवाल पूछे थे। उनके मुताबिक, इन सवालों का सीधा जवाब देने के बजाय मुख्यमंत्री ने मुद्दे से ध्यान हटाने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि विजय ने मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति पर जवाब देने के बजाय सरकारी आयोग से जुड़े दशकों पुराने विवादों और उस समय लागू MISA (आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने का कानून) जैसे मुद्दों को उठाया। इसके साथ ही उन्होंने विपक्षी नेताओं के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जुड़े लंबित आरोपों का भी उल्लेख किया।
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भ्रष्टाचार के आरोपों पर जवाब देने का मौका न मिलने का दावा
विपक्ष के नेता ने कहा कि DMK ने विधानसभा की कार्यवाही का बहिष्कार इसलिए किया, क्योंकि स्पीकर JCD प्रभाकर ने उन्हें मुख्यमंत्री द्वारा लगाए गए 'बेबुनियाद' भ्रष्टाचार के आरोपों का जवाब देने का अवसर नहीं दिया। उदयनिधि के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने पुलिस (गृह) विभाग के कामकाज पर चर्चा के दौरान अपने करीब 45 मिनट लंबे जवाब में ये आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि विपक्ष को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।
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माइनिंग ऑपरेशन्स पर एकाधिकार का गंभीर आरोप
राज्य-समर्थित एकाधिकार का सीधा आरोप लगाते हुए उदयनिधि ने कहा,'विष्णु रेड्डी, उनके बहनोई सुजय रेड्डी और उनके बिजनेस पार्टनर अनिल रेड्डी ने अब सरकार द्वारा चलाए जा रहे सभी माइनिंग ऑपरेशन्स पर पूरा नियंत्रण कर लिया है। मैं इसके सबूत एक-एक करके जारी करने जा रहा हूं।'  DMK नेता द्वारा जिन लोगों के नाम लिए गए, उनकी ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

मुख्यमंत्री पर भी इनकम टैक्स मामले का आरोप
उदयनिधि ने मुख्यमंत्री विजय को 'डमी' बताते हुए उनके सत्ता में आने को 'हादसा' करार दिया। उन्होंने दावा किया कि खुद मुख्यमंत्री के खिलाफ 15 करोड़ रुपये छिपाने के कथित मामले में इनकम टैक्स का एक अनसुलझा केस चल रहा है। उदयनिधि ने सत्ताधारी खेमे पर खुलेआम हॉर्स-ट्रेडिंग यानी विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप भी लगाया। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में राजनीतिक समर्थन हासिल करने के बदले एक IUML विधायक को नकद राशि और कैबिनेट पोर्टफोलियो की पेशकश की गई थी। DMK नेता ने विधानसभा अध्यक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने स्पीकर पर विपक्ष की आवाज दबाने के लिए पक्षपाती और एकतरफा तरीके से काम करने का आरोप लगाया।

आर.एस. भारती ने सरकारिया आयोग के मुद्दे पर दी सफाई
इस बीच, DMK के संगठन सचिव आर.एस. भारती ने मुख्यमंत्री के विधानसभा भाषण में सरकारिया आयोग के जिक्र को लेकर पार्टी का पक्ष रखा। भारती ने कहा,'असली शिकायत 1972 में MGR (AIADMK के संस्थापक एम.जी. रामचंद्रन) ने की थी। आयोग का गठन 1976 में इमरजेंसी के दौरान हुआ था। (तत्कालीन प्रधानमंत्री) इंदिरा गांधी, जिन्होंने आयोग नियुक्त किया था, ने तमिलनाडु की जनता से माफी भी मांगी थी और कहा था कि यह सब उनकी जानकारी के बिना हुआ था। इसलिए, यह मामला अब खत्म हो चुका है। अब विजय उसी मरे हुए मुद्दे को फिर से उठाने की कोशिश कर रहे हैं। बस इतना ही।' 

कनिमोझी ने विजय के भाषण को बताया 'WhatsApp फैक्ट्री का झूठ'
मुख्यमंत्री विजय के विधानसभा भाषण की पार्टी की ओर से कड़ी आलोचना करते हुए DMK सांसद कनिमोझी ने TVK नेता पर अपनी पार्टी को निशाना बनाने के लिए 'WhatsApp फैक्ट्री के झूठ' का सहारा लेने का आरोप लगाया। एक्स पर एक पोस्ट में कनिमोझी ने कहा कि विधानसभा में कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर गंभीर बहस होनी चाहिए थी, लेकिन सदन एक 'सर्कस के तंबू' में बदलकर रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस अनुदान पर बहस के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने सिर्फ पहले से तैयार स्क्रिप्ट पढ़ी और सीधे सवालों से बचते रहे।


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इतिहास और द्रविड़ आंदोलन के मुद्दे पर भी निशाना
कनिमोझी ने जस्टिस पार्टी और द्रविड़ योगदान से जुड़े मुद्दों पर मुख्यमंत्री की समझ पर सवाल उठाया। उन्होंने विजय पर "ऐतिहासिक जानकारी की कमी" और अपने बयानों में जरूरत से ज्यादा आक्रामकता दिखाने का आरोप लगाया। 

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