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Una News: 17 स्वीकृत पद, 10 खाली... पढ़ाई पर असर
Mon, 21 Sep 2026 10:17 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Mon, 21 Sep 2026 10:17 PM IST
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नारी (ऊना)। पंजाब सीमा से सटे राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पोलियां बीत में शिक्षा व्यवस्था लंबे समय से शिक्षकों की कमी से जूझ रही है।
वर्ष 2016 में वरिष्ठ माध्यमिक का दर्जा मिलने के बाद स्कूल में कला संकाय की कक्षाएं शुरू हुईं लेकिन वर्षों बाद भी स्वीकृत 17 पदों में से 10 खाली पड़े हैं। शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की कमी का सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
वर्तमान में स्कूल में करीब 60 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जबकि पर्याप्त स्टाफ नहीं होने के कारण कई बच्चों को दूसरे स्कूलों का रुख करना पड़ा है।
स्कूल में अंग्रेजी, राजनीतिक विज्ञान और इतिहास के प्रवक्ता के पद लंबे समय से रिक्त हैं। इसके अलावा कंप्यूटर शिक्षक, शारीरिक शिक्षा अध्यापक, कार्यालय लिपिक, चपरासी और चौकीदार के पद भी खाली हैं।
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प्रधानाचार्य कमलेश कुमार को अध्यापन के साथ-साथ कार्यालय संबंधी कई जिम्मेदारियां भी संभालनी पड़ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पर्याप्त स्टाफ नहीं होने से विद्यार्थियों को विषय विशेषज्ञों से पढ़ाई का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
130 से घटकर 60 रह गई विद्यार्थियों की संख्या
ग्रामीण मलकियत सिंह, मोहनलाल, श्याम कुमारी, रक्षा देवी और सुशील कुमार के अनुसार वर्ष 2016 में वरिष्ठ माध्यमिक का दर्जा मिलने के बाद स्कूल में कला संकाय की कक्षाएं शुरू हुई थीं। उस समय धीरे-धीरे विद्यार्थियों की संख्या बढ़कर करीब 130 तक पहुंच गई थी। शुरुआत में प्रधानाचार्य ने पदभार संभाला और बाद में एक प्रवक्ता की भी नियुक्ति हुई। इसके बावजूद शिक्षकों के पद लगातार खाली होते गए। पर्याप्त अध्यापक नहीं मिलने से विद्यार्थियों की संख्या अब करीब 60 रह गई है। कई अभिभावकों को अपने बच्चों का दाखिला दूर के स्कूलों में करवाना पड़ा है।
अपने स्तर पर बेहतर शिक्षा का प्रयास
विद्यालय में लंबे समय से अध्यापकों और प्राध्यापकों की कमी चली आ रही है। इससे विद्यार्थियों की संख्या भी प्रभावित हुई है। इसके बावजूद स्कूल प्रबंधन विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा देने के लिए अपने स्तर पर पूरा प्रयास कर रहा है। कमलेश कुमार, प्रधानाचार्य
उच्च अधिकारियों और सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार स्कूलों में रिक्त पद भरे जा रहे हैं। जिन स्कूलों में अभी भी शिक्षकों की किल्लत है, वहां नई नियुक्तियां जल्द होने की उम्मीद है। अनिल कुमार तक्खी, उपनिदेशक, जिला उच्च शिक्षा विभाग
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वर्ष 2016 में वरिष्ठ माध्यमिक का दर्जा मिलने के बाद स्कूल में कला संकाय की कक्षाएं शुरू हुईं लेकिन वर्षों बाद भी स्वीकृत 17 पदों में से 10 खाली पड़े हैं। शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की कमी का सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
वर्तमान में स्कूल में करीब 60 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जबकि पर्याप्त स्टाफ नहीं होने के कारण कई बच्चों को दूसरे स्कूलों का रुख करना पड़ा है।
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स्कूल में अंग्रेजी, राजनीतिक विज्ञान और इतिहास के प्रवक्ता के पद लंबे समय से रिक्त हैं। इसके अलावा कंप्यूटर शिक्षक, शारीरिक शिक्षा अध्यापक, कार्यालय लिपिक, चपरासी और चौकीदार के पद भी खाली हैं।
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प्रधानाचार्य कमलेश कुमार को अध्यापन के साथ-साथ कार्यालय संबंधी कई जिम्मेदारियां भी संभालनी पड़ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पर्याप्त स्टाफ नहीं होने से विद्यार्थियों को विषय विशेषज्ञों से पढ़ाई का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
130 से घटकर 60 रह गई विद्यार्थियों की संख्या
ग्रामीण मलकियत सिंह, मोहनलाल, श्याम कुमारी, रक्षा देवी और सुशील कुमार के अनुसार वर्ष 2016 में वरिष्ठ माध्यमिक का दर्जा मिलने के बाद स्कूल में कला संकाय की कक्षाएं शुरू हुई थीं। उस समय धीरे-धीरे विद्यार्थियों की संख्या बढ़कर करीब 130 तक पहुंच गई थी। शुरुआत में प्रधानाचार्य ने पदभार संभाला और बाद में एक प्रवक्ता की भी नियुक्ति हुई। इसके बावजूद शिक्षकों के पद लगातार खाली होते गए। पर्याप्त अध्यापक नहीं मिलने से विद्यार्थियों की संख्या अब करीब 60 रह गई है। कई अभिभावकों को अपने बच्चों का दाखिला दूर के स्कूलों में करवाना पड़ा है।
अपने स्तर पर बेहतर शिक्षा का प्रयास
विद्यालय में लंबे समय से अध्यापकों और प्राध्यापकों की कमी चली आ रही है। इससे विद्यार्थियों की संख्या भी प्रभावित हुई है। इसके बावजूद स्कूल प्रबंधन विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा देने के लिए अपने स्तर पर पूरा प्रयास कर रहा है। कमलेश कुमार, प्रधानाचार्य
उच्च अधिकारियों और सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार स्कूलों में रिक्त पद भरे जा रहे हैं। जिन स्कूलों में अभी भी शिक्षकों की किल्लत है, वहां नई नियुक्तियां जल्द होने की उम्मीद है। अनिल कुमार तक्खी, उपनिदेशक, जिला उच्च शिक्षा विभाग