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Solan News: भगवान शिव के अद्भुत श्रृंगार का आध्यात्मिक रहस्य बताया
Tue, 13 Oct 2026 12:57 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Tue, 13 Oct 2026 12:57 AM IST
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धर्मपुर की धार की बेड़ में आयोजित भगवान शिव कथा अमृत के दौरान मौजूद भक्त। स्रोत : आयोजक
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान करवा रहा धर्मपुर में कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मपुर (सोलन)। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से रिखी भवन में आयोजित पांच दिवसीय भगवान शिव कथा अमृत के चौथे दिन साध्वी श्वेता भारती ने भगवान शिव के स्वरूप और शृंगार का आध्यात्मिक महत्व समझाया। उन्होंने मानव शरीर की नश्वरता बताते हुए देह आसक्ति त्यागने और जीवन के वास्तविक लक्ष्य को पहचानने का संदेश दिया।
साध्वी श्वेता भारती ने कहा कि पांच तत्वों से बना शरीर एक दिन राख में बदल जाएगा। इसलिए मनुष्य को जीवन सार्थक बनाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से मन की कामनाओं और वासनाओं पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि बढ़ते तनाव के बीच स्थायी शांति के लिए गुरु के मार्गदर्शन में ध्यान साधना आवश्यक है। ध्यान केवल आंखें बंद करके बैठना नहीं, बल्कि आंतरिक आनंद और शांति का अनुभव करने की आध्यात्मिक प्रक्रिया है। जिस प्रकार व्यायाम शरीर को सक्रिय करता है, उसी प्रकार सही ध्यान मन को शांति प्रदान करता है।
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इस अवसर पर साध्वी संतोष भारती ने कहा कि आध्यात्मिक ज्ञान और ध्यान अपनाकर जीवन में शांति, सकारात्मकता और आनंद का अनुभव किया जा सकता है। गुरु के मार्गदर्शन में ध्यान साधना मनुष्य को अंतःकरण में ईश्वर के साक्षात्कार का मार्ग दिखाती है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मपुर (सोलन)। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से रिखी भवन में आयोजित पांच दिवसीय भगवान शिव कथा अमृत के चौथे दिन साध्वी श्वेता भारती ने भगवान शिव के स्वरूप और शृंगार का आध्यात्मिक महत्व समझाया। उन्होंने मानव शरीर की नश्वरता बताते हुए देह आसक्ति त्यागने और जीवन के वास्तविक लक्ष्य को पहचानने का संदेश दिया।
साध्वी श्वेता भारती ने कहा कि पांच तत्वों से बना शरीर एक दिन राख में बदल जाएगा। इसलिए मनुष्य को जीवन सार्थक बनाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से मन की कामनाओं और वासनाओं पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
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उन्होंने कहा कि बढ़ते तनाव के बीच स्थायी शांति के लिए गुरु के मार्गदर्शन में ध्यान साधना आवश्यक है। ध्यान केवल आंखें बंद करके बैठना नहीं, बल्कि आंतरिक आनंद और शांति का अनुभव करने की आध्यात्मिक प्रक्रिया है। जिस प्रकार व्यायाम शरीर को सक्रिय करता है, उसी प्रकार सही ध्यान मन को शांति प्रदान करता है।
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इस अवसर पर साध्वी संतोष भारती ने कहा कि आध्यात्मिक ज्ञान और ध्यान अपनाकर जीवन में शांति, सकारात्मकता और आनंद का अनुभव किया जा सकता है। गुरु के मार्गदर्शन में ध्यान साधना मनुष्य को अंतःकरण में ईश्वर के साक्षात्कार का मार्ग दिखाती है।