{"_id":"6a9b03f7e06a2f9b1b077815","slug":"manalis-mall-road-immersed-in-devotion-to-krishna-bhajans-echoed-throughout-kullu-news-c-89-1-ssml1014-185821-2026-09-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kullu News: मनाली में कृष्ण भक्ति में डूबा मालरोड, गूंजते रहे भजन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kullu News: मनाली में कृष्ण भक्ति में डूबा मालरोड, गूंजते रहे भजन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मनाली। पर्यटन नगरी मनाली में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। जन्माष्टमी के अवसर पर सुबह से ही दुर्गा माता मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। मंदिर परिसर में दिनभर भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
श्रद्धालुओं की भीड़ से मनाली का मालरोड भी कृष्ण भक्ति में सराबोर नजर आया। ‘श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी’, ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ और ‘गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो’ जैसे भजनों से दिनभर मालरोड गूंजता रहा। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन में भाग लेकर भगवान श्रीकृष्ण की आराधना की। मंदिर के समीप मालरोड पर भगवान श्रीकृष्ण को झूला भी झुलाया गया।
जन्माष्टमी का व्रत रखने वाली महिलाएं भी सुबह से ही मंदिर पहुंचती रहीं और पूजा-अर्चना की। जम्मू निवासी बाबा केदारनाथ ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी की मध्यरात्रि 12 बजे हुआ था। इसी पावन अवसर की स्मृति में हर वर्ष जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि मनाली में पिछले करीब 28 वर्षों से जन्माष्टमी के अवसर पर धार्मिक कार्यक्रमों के साथ भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
श्रद्धालुओं की भीड़ से मनाली का मालरोड भी कृष्ण भक्ति में सराबोर नजर आया। ‘श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी’, ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ और ‘गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो’ जैसे भजनों से दिनभर मालरोड गूंजता रहा। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन में भाग लेकर भगवान श्रीकृष्ण की आराधना की। मंदिर के समीप मालरोड पर भगवान श्रीकृष्ण को झूला भी झुलाया गया।
विज्ञापन
जन्माष्टमी का व्रत रखने वाली महिलाएं भी सुबह से ही मंदिर पहुंचती रहीं और पूजा-अर्चना की। जम्मू निवासी बाबा केदारनाथ ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी की मध्यरात्रि 12 बजे हुआ था। इसी पावन अवसर की स्मृति में हर वर्ष जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि मनाली में पिछले करीब 28 वर्षों से जन्माष्टमी के अवसर पर धार्मिक कार्यक्रमों के साथ भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। संवाद
विज्ञापन