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हिमाचल: धारा-118 में किस आधार पर दी गईं मंजूरियां, हाईकोर्ट ने सरकार से 10 साल का रिकॉर्ड किया तलब

Sat, 17 Oct 2026 06:00 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 17 Oct 2026 06:00 AM IST
सार

 हाईकोर्ट ने गैर कृषकों (हिमाचल से बाहर के लोगों) को जमीन खरीदने के लिए प्रदेश टेनेंसी एंड लैंड रिफॉर्म्स एक्ट 1972 की धारा 118 के तहत दी जा रही मंजूरियों पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। 

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Himachal High Court seeks records from govt on number of approvals granted under Section 118 over the last 10
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने गैर कृषकों (हिमाचल से बाहर के लोगों) को जमीन खरीदने के लिए प्रदेश टेनेंसी एंड लैंड रिफॉर्म्स एक्ट 1972 की धारा 118 के तहत दी जा रही मंजूरियों पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने राज्य सरकार को प्रदेश में पिछले 10 साल में दी गई सभी मंजूरियों का पूरा रिकॉर्ड पेश करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि पिछले एक दशक में पूरे हिमाचल में धारा 118 के तहत कुल कितनी मंजूरियां किस आधार पर दी गई हैं। साथ ही पूछा है कि आवेदन स्वीकार या रद्द करने की प्रक्रिया और मापदंड क्या हैं। जिन लोगों के आवेदन खारिज किए गए, उनके कारण भी बताने होंगे। अदालत ने यह भी पूछा है कि क्या धारा 118 के इन आवेदनों से प्रोसेसिंग फीस, एप्लीकेशन फीस या स्टांप ड्यूटी के रूप में राज्य के खजाने को कोई बड़ा राजस्व मिलता है या नहीं।

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धारा 118 के तहत दी गई मंजूरियों की विस्तृत सूची भी तलब की
कोर्ट ने कुल्लू, कांगड़ा और सिरमौर के बाकी बचे इलाकों में धारा 118 के तहत दी गई मंजूरियों की विस्तृत सूची भी तलब की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पहाड़ों की सुरक्षा और पर्यावरण से समझौता नहीं किया जा सकता। अब इस मामले की अगली सुनवाई 7 दिसंबर को होगी। कोर्ट ने सोलन-बड़ोग के 21 बड़े प्रोजेक्ट्स में से 8 में 6 मंजिल से ज्यादा का उल्लंघन पाए जाने पर निर्माण रोकने के नोटिस जारी किए हैं। अदालत ने सोलन जिले के बड़ोग, शिमला और नाहन जैसे क्षेत्रों में धारा 118 के तहत धड़ाधड़ दी जा रही मंजूरियों और उनकी आड़ में खड़े हो रहे नियमों के खिलाफ बहुमंजिला कमर्शियल प्रोजेक्ट्स पर गंभीर चिंता जताई है। सरकार की ओर से अदालत में पेश किए गए आंकड़ों से सामने आया है कि पिछले कुछ समय में धारा 118 के तहत बड़े पैमाने पर छूट दी गई है।

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तय मानकों से ऊंचे अपार्टमेंट किए जा रहे तैयार
हाईकोर्ट ने पाया कि धारा 118 के तहत मंजूरी लेने के बाद कई बिल्डर पहाड़ों में तय मानकों से कहीं ऊंचे अपार्टमेंट ब्लॉक खड़े कर रहे हैं। नियमों के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों में ढलान वाली छत समेत किसी भी इमारत की अधिकतम ऊंचाई 25 मीटर (लगभग 6 से 7 मंजिल) से ज्यादा नहीं हो सकती। इसके बावजूद मैसर्स लक्सस होटल एंड रिसॉर्ट को 15 मंजिल, मैसर्स पद्मेश बिल्डवेल को 8 मंजिलों के 6 ब्लॉक्स और मैसर्स एचपी रिसॉर्ट्स को 7 मंजिला ब्लॉक्स बनाने की मंजूरी दे दी गई।

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कहां पर कितने गैर कृषकों को दी हैं मंजूरियां
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, एक दशक के भीतर सोलन के बड़ोग क्षेत्र में गैर कृषकों को कुल 187 मंजूरियां दी गई, जिनमें से 64 जमीन खरीदने और 123 निर्मित ढांचे या फ्लैट्स खरीदने के लिए थी। शिमला में रिकॉर्ड 801 मंजूरियां जारी की गईं। नाहन तहसील (सिरमौर) में 270 मंजूरियां दी गई, जिनमें से 159 इंडस्ट्री व टूरिज्म और 111 आवासीय एवं टूरिज्म प्रोजेक्ट्स की थीं।

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