बीबीएमबी मामला: जयराम बोले- बीबीएमबी की जीत में सभी सरकारों का योगदान, राजनीति कर रहे सीएम सुक्खू
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने बीबीएमबी में तीन दशक से चल रही लड़ाई में हिमाचल प्रदेश को मिली जीत पर सभी प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार का आभार जताया।
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बीबीएमबी में हिमाचल प्रदेश को उसका हक मिलने पर नेता विपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने प्रदेशवासियों को बधाई दी है। उन्होंने इस ऐतिहासिक फैसले के लिए सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार का आभार जताया। जयराम ने कहा कि हिमाचल के अधिकारों की लड़ाई करीब तीन दशक से चल रही थी। इस दौरान प्रदेश में सत्ता में रही सभी सरकारों ने मजबूती से अपना पक्ष रखा। यह जीत किसी एक सरकार की नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल के पक्ष में फैसला सुनाया था, लेकिन संबंधित राज्य इसे मानने को तैयार नहीं थे। 30 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार ने कैशलेस सेटलमेंट का फार्मूला सुझाकर सहमति बनाने की पहल की।
इसके बाद समाधान का रास्ता निकला। जयराम ने कहा कि संबंधित राज्य हिमाचल की बकाया देनदारी चुकाने के लिए 30 साल का समय मांग रहे थे, लेकिन केंद्र के प्रयासों से सुप्रीम कोर्ट ने पूरी देनदारी चुकाने के लिए 20 साल की समयसीमा तय की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लंबे समय से चले आ रहे विवाद का समाधान ऐतिहासिक है। तीन दशक की लड़ाई में मिली जीत का श्रेय लेने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू जिस तरह राजनीति कर रहे हैं, वह दुर्भाग्यपूर्ण है।
बीबीएमबी फैसले का श्रेय लेने की राजनीति बंद करें सुक्खू : रणधीर
भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी एवं विधायक रणधीर शर्मा ने बीबीएमबी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हिमाचल के हित में आया यह फैसला किसी एक सरकार की उपलब्धि नहीं, बल्कि वर्षों से किए गए सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। मुख्यमंत्री को इसका एकतरफा श्रेय लेने की राजनीति बंद करनी चाहिए। शुक्रवार को शिमला में पत्रकार वार्ता में रणधीर शर्मा ने कहा कि बीबीएमबी का मामला वर्ष 1996 से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन था। इस दौरान प्रदेश की अलग-अलग सरकारों ने हिमाचल के अधिकारों की पैरवी की। तत्कालीन मुख्यमंत्री शांता कुमार के प्रयासों से वर्ष 1990 में जलविद्युत परियोजनाओं में 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली का अधिकार मिला था। उन्होंने कहा कि बीबीएमबी मामले में 7.19 प्रतिशत बिजली हिस्सेदारी का फैसला भी महत्वपूर्ण है। रणधीर शर्मा ने पीटरहॉफ अतिथिगृह को पीपीपी मोड पर देने के प्रस्ताव पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सरकारी संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। साथ ही आपदा राहत राशि के इस्तेमाल पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। उन्होंने दावा किया कि केंद्र ने विभिन्न मदों में हजारों करोड़ रुपये की सहायता दी है। रणधीर शर्मा ने मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्रों के दौरों और घोषणाओं को राजनीतिक नाटक करार दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार के पास सड़कों की मरम्मत, एचआरटीसी बसों के टायर बदलने और विधायक निधि जारी करने के लिए पर्याप्त बजट नहीं है तो नई घोषणाओं के लिए पैसा कहां से आएगा।