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Rewari News: सर्वे में खुलासा...एक माह में 30 पशुओं की हुई मौत, सभी में मिले लंपी जैसे लक्षण
Thu, 10 Sep 2026 11:44 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Thu, 10 Sep 2026 11:44 PM IST
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गाय में लंपी जैसे लक्षण। संवाद
रेवाड़ी। पशुपालन विभाग की ओर से पिछले सप्ताह जिले में कराए गए सर्वे में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। वीरवार को आई सर्वे रिपोर्ट से पता चला कि एक माह में 30 पशुओं की मौत हुई है। इन सभी पशुओं में लंपी जैसे लक्षण मिले हैं।
जिले में अब तक 678 पशुओं के लंपी से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। विभाग के अनुसार इनमें से 535 पशु रिकवर हो चुके हैं, जबकि 143 केस अभी भी एक्टिव हैं।
बड़ा सवाल यह है कि बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाने के बाद भी संक्रमण पर नियंत्रण क्यों नहीं हो पा रहा है। विभाग ने करीब 55 हजार पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य पूरा करने का दावा किया है। इसके बाद भी नए मामले सामने आने और पशुओं की मौत से विभागीय निगरानी और पशुपालकों की सतर्कता दोनों पर सवाल उठ रहे हैं।
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पशुपालकों की ओर से संक्रमित पशुओं को अलग रखने और बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तत्काल विभाग को सूचना देने में लापरवाही भी संक्रमण फैलने की बड़ी वजह रही है। कई जगह पशुओं को खुले में या दूसरे पशुओं के संपर्क में रखने से बीमारी के फैलने का खतरा बढ़ा है।
वहीं, विभागीय स्तर पर भी संक्रमित पशुओं की नियमित निगरानी और फील्ड स्तर पर प्रभावी सर्विलांस को लेकर पशुपालकों में असंतोष है। ग्रामीण क्षेत्रों में बीमारी की सूचना मिलने के बाद भी समय पर टीम पहुंचने और सैंपलिंग की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
मई से फैल रहा संक्रमण, सितंबर तक पूरा हुआ टीकाकरण
विभाग के टीकाकरण को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जिले में मई के दौरान ही लंपी संक्रमण ने पांव पसारने शुरू कर दिए थे लेकिन मई में भी विभाग ने टीकाकरण अभियान को लेकर अधिक गंभीरता नहीं दिखाई। जून, जुलाई व अगस्त (तीन महीने) में लगातार संक्रमण का फैलाव होता गया। विभाग का टीकाकरण अभियान सितंबर तक पूरा हो पाया। बाहर से आने वाले पशुओं के झुंडों को भी संक्रमण के लिहाज से संवेदनशील माना जा रहा है। विशेष रूप से राजस्थान से आने वाले चरवाहों के झुंडों पर निगरानी रखने की तैयारी की गई है। अधिकारियों के अनुसार यदि किसी झुंड में संक्रमित पशु मिलता है तो उसे तत्काल अलग कर उपचार शुरू कराया जाएगा, ताकि दूसरे पशुओं में संक्रमण फैलने से रोका जा सके।
अब लुवास की टीम जुटाएगी सैंपल
बढ़ते मामलों के बीच अब लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) की टीम जिले में संभावित संक्रमित पशुओं के सैंपल एकत्र करेगी। सैंपल की जांच के आधार पर बीमारी की वास्तविक स्थिति और संक्रमण के फैलाव का आकलन किया जाएगा। विभाग का प्रयास है कि संक्रमित पशुओं की पहचान जल्द हो और उनका उपचार समय रहते शुरू किया जा सके।
आंकड़े बढ़ने से विभाग के दावों पर सवाल
विभाग भले ही 535 पशुओं के रिकवर होने और 55 हजार पशुओं का टीकाकरण पूरा करने का दावा कर रहा हो, लेकिन इसके बावजूद एक्टिव केसों की संख्या 143 तक पहुंचना और पिछले एक माह में 30 पशुओं की मौत होना चिंता का विषय है। ऐसे में केवल टीकाकरण के आंकड़े जारी करने के बजाय संक्रमित पशुओं की निगरानी, सैंपलिंग, आइसोलेशन और समय पर उपचार की व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी हो गया है।
वर्जन:
विभाग की ओर से जिले में एक माह में पशुओं की मौत को लेकर सर्वे कराया गया था। एक माह में 30 पशुओं की मौत हुई है। अधिकांश में लंपी संक्रमण के लक्षण मिले थे। विभाग ने वीरवार को जिले में कराए गए सर्वे की रिपोर्ट ली। 678 पशु संक्रमण की चपेट में आए हैं जिनमें से 535 रिकवर हो चुके हैं। 143 एक्टिव केस हैं। 55 हजार के टीकाकरण का लक्ष्य पूरा कर लिया गया है।-डॉ. विनोद यादव, उप निदेशक पशुपालन एवं डेयरी विभाग, रेवाड़ी।
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जिले में अब तक 678 पशुओं के लंपी से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। विभाग के अनुसार इनमें से 535 पशु रिकवर हो चुके हैं, जबकि 143 केस अभी भी एक्टिव हैं।
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बड़ा सवाल यह है कि बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाने के बाद भी संक्रमण पर नियंत्रण क्यों नहीं हो पा रहा है। विभाग ने करीब 55 हजार पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य पूरा करने का दावा किया है। इसके बाद भी नए मामले सामने आने और पशुओं की मौत से विभागीय निगरानी और पशुपालकों की सतर्कता दोनों पर सवाल उठ रहे हैं।
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पशुपालकों की ओर से संक्रमित पशुओं को अलग रखने और बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तत्काल विभाग को सूचना देने में लापरवाही भी संक्रमण फैलने की बड़ी वजह रही है। कई जगह पशुओं को खुले में या दूसरे पशुओं के संपर्क में रखने से बीमारी के फैलने का खतरा बढ़ा है।
वहीं, विभागीय स्तर पर भी संक्रमित पशुओं की नियमित निगरानी और फील्ड स्तर पर प्रभावी सर्विलांस को लेकर पशुपालकों में असंतोष है। ग्रामीण क्षेत्रों में बीमारी की सूचना मिलने के बाद भी समय पर टीम पहुंचने और सैंपलिंग की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
मई से फैल रहा संक्रमण, सितंबर तक पूरा हुआ टीकाकरण
विभाग के टीकाकरण को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जिले में मई के दौरान ही लंपी संक्रमण ने पांव पसारने शुरू कर दिए थे लेकिन मई में भी विभाग ने टीकाकरण अभियान को लेकर अधिक गंभीरता नहीं दिखाई। जून, जुलाई व अगस्त (तीन महीने) में लगातार संक्रमण का फैलाव होता गया। विभाग का टीकाकरण अभियान सितंबर तक पूरा हो पाया। बाहर से आने वाले पशुओं के झुंडों को भी संक्रमण के लिहाज से संवेदनशील माना जा रहा है। विशेष रूप से राजस्थान से आने वाले चरवाहों के झुंडों पर निगरानी रखने की तैयारी की गई है। अधिकारियों के अनुसार यदि किसी झुंड में संक्रमित पशु मिलता है तो उसे तत्काल अलग कर उपचार शुरू कराया जाएगा, ताकि दूसरे पशुओं में संक्रमण फैलने से रोका जा सके।
अब लुवास की टीम जुटाएगी सैंपल
बढ़ते मामलों के बीच अब लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) की टीम जिले में संभावित संक्रमित पशुओं के सैंपल एकत्र करेगी। सैंपल की जांच के आधार पर बीमारी की वास्तविक स्थिति और संक्रमण के फैलाव का आकलन किया जाएगा। विभाग का प्रयास है कि संक्रमित पशुओं की पहचान जल्द हो और उनका उपचार समय रहते शुरू किया जा सके।
आंकड़े बढ़ने से विभाग के दावों पर सवाल
विभाग भले ही 535 पशुओं के रिकवर होने और 55 हजार पशुओं का टीकाकरण पूरा करने का दावा कर रहा हो, लेकिन इसके बावजूद एक्टिव केसों की संख्या 143 तक पहुंचना और पिछले एक माह में 30 पशुओं की मौत होना चिंता का विषय है। ऐसे में केवल टीकाकरण के आंकड़े जारी करने के बजाय संक्रमित पशुओं की निगरानी, सैंपलिंग, आइसोलेशन और समय पर उपचार की व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी हो गया है।
वर्जन:
विभाग की ओर से जिले में एक माह में पशुओं की मौत को लेकर सर्वे कराया गया था। एक माह में 30 पशुओं की मौत हुई है। अधिकांश में लंपी संक्रमण के लक्षण मिले थे। विभाग ने वीरवार को जिले में कराए गए सर्वे की रिपोर्ट ली। 678 पशु संक्रमण की चपेट में आए हैं जिनमें से 535 रिकवर हो चुके हैं। 143 एक्टिव केस हैं। 55 हजार के टीकाकरण का लक्ष्य पूरा कर लिया गया है।-डॉ. विनोद यादव, उप निदेशक पशुपालन एवं डेयरी विभाग, रेवाड़ी।