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Panipat News: सेवादारों ने सेवा, समर्पण और मानवता के प्रति दायित्व को निभाने का लिया संकल्प
Mon, 21 Sep 2026 06:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Mon, 21 Sep 2026 06:03 AM IST
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निरंकारी आध्यात्मिक स्थल पर कस्सी चलाकर सेवा कार्य शुरू करते राजपिता रमित। संवाद
समालखा (पानीपत)। संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल भोड़वाल माजरी समालखा में संत निरंकारी मिशन के 79वें वार्षिक संत समागम की तैयारियों का रविवार से शुभारंभ किया गया। सेवादारों ने अरदास के साथ विभिन्न सेवा कार्यों की शुरुआत की। इस दौरान बड़ी संख्या में पहुंचे सेवादारों ने सेवा, समर्पण और मानवता के प्रति अपने दायित्व को निभाने का संकल्प दोहराया। इस वर्ष 23 से 26 अक्तूबर तक भोड़वाल माजरी में तीन दिवसीय वार्षिक निरंकारी संत समागम आयोजित किया जाएगा। इस बार समागम का थीम जागृति रखा है।
सेवा कार्य का शुभारंभ सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज की कृपा से किया गया। राजपिता रमित कस्सी चलाकर सेवा कार्यों को शुरू किया। इस बार सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज सेवा कार्यों के शुभारंभ पर नहीं पहुंची। राजपिता रमित ने कहा कि देखने में यह केवल समागम स्थल की सफाई और व्यवस्थाएं शुरू करने का अवसर है, लेकिन इसके पीछे मानव जीवन को सेवा, परोपकार और आत्म-जागृति से जोड़ने का व्यापक संदेश छिपा है। इस वर्ष संत समागम का मुख्य भाव जागृति रखा गया है। संतों ने समझाया कि जागृति का अर्थ केवल नींद से जागना नहीं, बल्कि अपने जीवन की आध्यात्मिक वास्तविकता को पहचानना है। जब कोई व्यक्ति दूसरों की सेवा करता है तो उसके मन में यह भाव होना चाहिए कि उसे वास्तव में परमात्मा की सेवा करने का सुअवसर मिला है। ब्रह्मज्ञान के माध्यम से सद्गुरु मनुष्य को वह दृष्टि प्रदान करते हैं, जिससे वह प्रत्येक जीव में ईश्वर का दर्शन कर सके। यही जागृत अवस्था सेवा को अहंकार से दूर रखते हुए सच्चे समर्पण और प्रेम से जोड़ती है।
अक्तूबर तक चलेगा सेवा पखवाड़ा, जुटेंगे हजारों सेवादार
संत समागम की भव्य तैयारियों को लेकर संत निरंकारी मिशन द्वारा विशेष सेवा पखवाड़े का भी आयोजन किया जाएगा। यह सितंबर से शुरू होकर अक्तूबर माह तक निरंतर चलेगा। इस पखवाड़े के दौरान देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मिशन से जुड़े सेवादार अलग-अलग व्यवस्थाओं में अपना योगदान देंगे। समागम स्थल पर टेंट लगाने, साफ-सफाई, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा, जल-पान और साज-सज्जा सहित विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियां सेवादारों द्वारा संभाली जाएंगी।
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मानव-मानव का बने सहारा, तभी सुंदर बनेगी धरती
कार्यक्रम में संतों ने आह्वान किया कि जीवन तभी सार्थक बनता है, जब उसमें दूसरों के लिए सहयोग और परोपकार की भावना पैदा होती है। जब मानव केवल अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों के काम आता है, तो समाज में प्रेम, शांति और भाईचारा मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर सेवा, प्रेम और सहयोग के भाव को निरंतर बढ़ाए, तो इस धरती पर एक सुंदर और सुखद वातावरण का निर्माण संभव है। समागम की तैयारियों में की जाने वाली प्रत्येक सेवा मानवता के प्रति निस्वार्थ समर्पण का प्रतीक है। संवाद
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सेवा कार्य का शुभारंभ सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज की कृपा से किया गया। राजपिता रमित कस्सी चलाकर सेवा कार्यों को शुरू किया। इस बार सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज सेवा कार्यों के शुभारंभ पर नहीं पहुंची। राजपिता रमित ने कहा कि देखने में यह केवल समागम स्थल की सफाई और व्यवस्थाएं शुरू करने का अवसर है, लेकिन इसके पीछे मानव जीवन को सेवा, परोपकार और आत्म-जागृति से जोड़ने का व्यापक संदेश छिपा है। इस वर्ष संत समागम का मुख्य भाव जागृति रखा गया है। संतों ने समझाया कि जागृति का अर्थ केवल नींद से जागना नहीं, बल्कि अपने जीवन की आध्यात्मिक वास्तविकता को पहचानना है। जब कोई व्यक्ति दूसरों की सेवा करता है तो उसके मन में यह भाव होना चाहिए कि उसे वास्तव में परमात्मा की सेवा करने का सुअवसर मिला है। ब्रह्मज्ञान के माध्यम से सद्गुरु मनुष्य को वह दृष्टि प्रदान करते हैं, जिससे वह प्रत्येक जीव में ईश्वर का दर्शन कर सके। यही जागृत अवस्था सेवा को अहंकार से दूर रखते हुए सच्चे समर्पण और प्रेम से जोड़ती है।
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अक्तूबर तक चलेगा सेवा पखवाड़ा, जुटेंगे हजारों सेवादार
संत समागम की भव्य तैयारियों को लेकर संत निरंकारी मिशन द्वारा विशेष सेवा पखवाड़े का भी आयोजन किया जाएगा। यह सितंबर से शुरू होकर अक्तूबर माह तक निरंतर चलेगा। इस पखवाड़े के दौरान देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मिशन से जुड़े सेवादार अलग-अलग व्यवस्थाओं में अपना योगदान देंगे। समागम स्थल पर टेंट लगाने, साफ-सफाई, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा, जल-पान और साज-सज्जा सहित विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियां सेवादारों द्वारा संभाली जाएंगी।
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कार्यक्रम में संतों ने आह्वान किया कि जीवन तभी सार्थक बनता है, जब उसमें दूसरों के लिए सहयोग और परोपकार की भावना पैदा होती है। जब मानव केवल अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों के काम आता है, तो समाज में प्रेम, शांति और भाईचारा मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर सेवा, प्रेम और सहयोग के भाव को निरंतर बढ़ाए, तो इस धरती पर एक सुंदर और सुखद वातावरण का निर्माण संभव है। समागम की तैयारियों में की जाने वाली प्रत्येक सेवा मानवता के प्रति निस्वार्थ समर्पण का प्रतीक है। संवाद

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