{"_id":"6a9ddc54b73265b1ec09d1b2","slug":"explained-the-significance-of-devotion-and-renunciation-to-the-seekers-panipat-news-c-244-1-pnp1007-163657-2026-09-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panipat News: साधकों को बताया भक्ति और त्याग का महत्व","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panipat News: साधकों को बताया भक्ति और त्याग का महत्व
Mon, 07 Sep 2026 03:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Mon, 07 Sep 2026 03:04 AM IST
विज्ञापन
गांधी मंडी में प्रवचन सुनते साधक : स्रोत : सभा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पानीपत। गांधी मंडी में श्री एसएस जैन सभा के तत्वावधान में अभिग्रहधारी डॉ. राजेश मुनि महाराज के आठवें निर्जल उपवास के उपलक्ष्य में रविवार को तप अनुमोदना दिवस भक्ति और त्याग-संकल्प से मनाया गया। रविवार को प्रवचन कार्यक्रम राजेंद्र मुनि महाराज, महासाध्वी समता महाराज, साध्वी भविका महाराज के सानिध्य में हुए। इस अवसर पर जिले में पांच स्थानों पर चल रहा है चातुर्मास में आठ-आठ नए लोगों ने आजीवन जमीकंद, कच्चे पानी व रात्रि भोजन का त्याग, रोजाना सामायिक करने के पचक्खान ग्रहण किए। उन्होंने एकासनों के मासखमण करने का नियम भी लिया।
गांधी मंडी जैन सभा के संरक्षक डॉ. एपी जैन ने बताया कि दीक्षा के समय डॉ. राजेश मुनि महाराज एमए, एमएससी थे। उन्होंने जैन धर्म का गहरा अध्ययन किया था। वह पहले भी स्वाध्यायी के रूप में प्रवचन करते रहे थे। इन्होंने दीक्षा लेते ही कठोरतम साधना की। अभिग्रह के साथ बेले-बेले पारणा शुरू कर दिया। तपस्या में भी एक दिन में 72 किलोमीटर तक का विहार कर चुके हैं। इन्होंने लगभग एक हजार संथारों का अध्ययन करके तीन हजार पृष्ठों की थीसिस लिखकर पीएचडी की डिग्री प्राप्त की और डॉक्टर कहलाने लगे। ये स्वयं 136 चारित्रात्माओं को संथारे दिला चुके हैं। उन्होंने बताया कि पानीपत में यह पहली बार हुआ है कि किसी संत ने निर्जल उपवास की अठाई की हो। तीन दिन के उपवास के पश्चात ये हर दिन अभिग्रह भी निश्चित करते रहे, वे फलीभूत भी होते रहे और ये अपनी तपस्या को हर दिन बढ़ाते रहे और आज आठवें दिन तक ले आए।
सोमवार को अभिग्रह जप एवं पारणे का पुण्य लाभ चाचा-भतीजा डॉ. रामनिवास जैन व प्रवीण जैन को प्राप्त होगा जिसके लिए उन्होंने गांधी मंडी जैन समाज के लिए एक लाख इक्कीस हजार रुपये की सहयोग राशि घोषित की है। महासाध्वी समता महाराज ने बताया कि डॉ. राजेश मुनि का जन्म धार्मिक, संस्कारी परिवार में हुआ। उन्होंने नौ वर्ष की आयु में चौविहार रात्रिकाल खाने-पीने का त्याग शुरू कर दिया था। 15 वर्ष की आयु में कच्ची-पक्की हरी फल- सब्जी की मर्यादा कर ली थी, स्कूल, कॉलेज में पढ़ते हुए सालों-साल एक दिन उपवास एक दिन पारणा करते रहे थे, बीच-बीच में बड़ी तपस्याओं के साथ। मध्य प्रदेश के बड़वाह में नौ फरवरी 2001 को आठ दीक्षाएं होने जा रही थी। कुछ लोगों ने इन पर कटाक्ष कर दिया कि जा तू भी दीक्षा ले ले। तब उन्होंने दीक्षा लेने की ठान ली, ठीक दीक्षा वाले दिन ही गुरु भगवंतों के सामने प्रस्तुत हो गए और उनके वैराग्य की गहराई को समझते हुए पारिवारिक जनों को भी स्वीकृति देनी ही पड़ी। इस प्रकार 27 वर्ष की आयु में ये जैन संत के रूप में दीक्षित हो गए। कार्यक्रम में डॉ. ईश्वर जैन ने कहा कि मेरे गुरुवर ने की निर्जल अठाई, बधाई-बधाई, लाखों-लाख बधाई। इस अवसर पर भगत महावीर जैन, प्रधान जगदीश जैन, विरेंद्र जैन, सुशील जैन, कालू जैन, किरण जैन, सुलोचना जैन, सरिता जैन उपस्थित रही।
विज्ञापन
संसार में अकेले आए हैं और अकेले ही जाना है : रमण गुरुनी महाराज
एसएस जैन सभा राजाखेड़ी में रविवार को रमण गुरुनी महाराज ने चातुर्मास में प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि सांसारिक जीवन में व्यक्ति कहते हैं कि यह मकान मेरा है, यह बगीचा मेरा है, यह नौकर- यह चीज मेरी है। परंतु व्यक्ति ये नहीं सोचता कि मृत्यु के महामार्ग पर तुझे अकेला ही चलना होगा। यहां कोई साथी नहीं और कोई वस्तु साथ नहीं जाती है। संसार से विदाई के वक्त तेरी जुबान पर यह गीता होगा कि आए अकेले हैं और अकेले ही जाना है। इसलिए इस संसार की मोह-माया को त्याग प्रभु की भक्ति में मन लगा।
दांपत्य जीवन में एक-दूसरे के प्रति विश्वास सबसे जरूरी : मनोज मुनि महाराज
एसएम जैन सभा अग्रवाल मंडी में रविवार को मनोज मुनि ने दांपत्य और पारिवारिक जीवन पर प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि दांपत्य और पारिवारिक जीवन में एक-दूसरे पर विश्वास होना सबसे जरूरी है। दांपत्य जीवन और पारिवारिक रिश्ते में दरार सहनशीलता की कमी, अतिरिक्त स्वतंत्रता पाने की भावना और बुरी आदतें, आलस्य मुख्य कारण बन रहे हैं। इसलिए एक-दूसरे पर विश्वास रखकर ही पारिवारिक रिश्तों को संवारा जा सकता है। संवाद
विज्ञापन
गांधी मंडी जैन सभा के संरक्षक डॉ. एपी जैन ने बताया कि दीक्षा के समय डॉ. राजेश मुनि महाराज एमए, एमएससी थे। उन्होंने जैन धर्म का गहरा अध्ययन किया था। वह पहले भी स्वाध्यायी के रूप में प्रवचन करते रहे थे। इन्होंने दीक्षा लेते ही कठोरतम साधना की। अभिग्रह के साथ बेले-बेले पारणा शुरू कर दिया। तपस्या में भी एक दिन में 72 किलोमीटर तक का विहार कर चुके हैं। इन्होंने लगभग एक हजार संथारों का अध्ययन करके तीन हजार पृष्ठों की थीसिस लिखकर पीएचडी की डिग्री प्राप्त की और डॉक्टर कहलाने लगे। ये स्वयं 136 चारित्रात्माओं को संथारे दिला चुके हैं। उन्होंने बताया कि पानीपत में यह पहली बार हुआ है कि किसी संत ने निर्जल उपवास की अठाई की हो। तीन दिन के उपवास के पश्चात ये हर दिन अभिग्रह भी निश्चित करते रहे, वे फलीभूत भी होते रहे और ये अपनी तपस्या को हर दिन बढ़ाते रहे और आज आठवें दिन तक ले आए।
विज्ञापन
सोमवार को अभिग्रह जप एवं पारणे का पुण्य लाभ चाचा-भतीजा डॉ. रामनिवास जैन व प्रवीण जैन को प्राप्त होगा जिसके लिए उन्होंने गांधी मंडी जैन समाज के लिए एक लाख इक्कीस हजार रुपये की सहयोग राशि घोषित की है। महासाध्वी समता महाराज ने बताया कि डॉ. राजेश मुनि का जन्म धार्मिक, संस्कारी परिवार में हुआ। उन्होंने नौ वर्ष की आयु में चौविहार रात्रिकाल खाने-पीने का त्याग शुरू कर दिया था। 15 वर्ष की आयु में कच्ची-पक्की हरी फल- सब्जी की मर्यादा कर ली थी, स्कूल, कॉलेज में पढ़ते हुए सालों-साल एक दिन उपवास एक दिन पारणा करते रहे थे, बीच-बीच में बड़ी तपस्याओं के साथ। मध्य प्रदेश के बड़वाह में नौ फरवरी 2001 को आठ दीक्षाएं होने जा रही थी। कुछ लोगों ने इन पर कटाक्ष कर दिया कि जा तू भी दीक्षा ले ले। तब उन्होंने दीक्षा लेने की ठान ली, ठीक दीक्षा वाले दिन ही गुरु भगवंतों के सामने प्रस्तुत हो गए और उनके वैराग्य की गहराई को समझते हुए पारिवारिक जनों को भी स्वीकृति देनी ही पड़ी। इस प्रकार 27 वर्ष की आयु में ये जैन संत के रूप में दीक्षित हो गए। कार्यक्रम में डॉ. ईश्वर जैन ने कहा कि मेरे गुरुवर ने की निर्जल अठाई, बधाई-बधाई, लाखों-लाख बधाई। इस अवसर पर भगत महावीर जैन, प्रधान जगदीश जैन, विरेंद्र जैन, सुशील जैन, कालू जैन, किरण जैन, सुलोचना जैन, सरिता जैन उपस्थित रही।
विज्ञापन
संसार में अकेले आए हैं और अकेले ही जाना है : रमण गुरुनी महाराज
एसएस जैन सभा राजाखेड़ी में रविवार को रमण गुरुनी महाराज ने चातुर्मास में प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि सांसारिक जीवन में व्यक्ति कहते हैं कि यह मकान मेरा है, यह बगीचा मेरा है, यह नौकर- यह चीज मेरी है। परंतु व्यक्ति ये नहीं सोचता कि मृत्यु के महामार्ग पर तुझे अकेला ही चलना होगा। यहां कोई साथी नहीं और कोई वस्तु साथ नहीं जाती है। संसार से विदाई के वक्त तेरी जुबान पर यह गीता होगा कि आए अकेले हैं और अकेले ही जाना है। इसलिए इस संसार की मोह-माया को त्याग प्रभु की भक्ति में मन लगा।
दांपत्य जीवन में एक-दूसरे के प्रति विश्वास सबसे जरूरी : मनोज मुनि महाराज
एसएम जैन सभा अग्रवाल मंडी में रविवार को मनोज मुनि ने दांपत्य और पारिवारिक जीवन पर प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि दांपत्य और पारिवारिक जीवन में एक-दूसरे पर विश्वास होना सबसे जरूरी है। दांपत्य जीवन और पारिवारिक रिश्ते में दरार सहनशीलता की कमी, अतिरिक्त स्वतंत्रता पाने की भावना और बुरी आदतें, आलस्य मुख्य कारण बन रहे हैं। इसलिए एक-दूसरे पर विश्वास रखकर ही पारिवारिक रिश्तों को संवारा जा सकता है। संवाद

गांधी मंडी में प्रवचन सुनते साधक : स्रोत : सभा