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विश्व शिक्षक दिवस: गुरुकुल से कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक, हजारों साल में कितना बदल गया शिक्षक और पढ़ाने का तरीका
Sun, 04 Oct 2026 05:32 PM IST
शिवम तिवारी
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिवम तिवारी
Updated Sun, 04 Oct 2026 05:32 PM IST
सार
World Teachers Day: विश्व शिक्षक दिवस कल यानी हर साल 5 अक्तूबर को मनाया जाता है। गुरुकुल की पारंपरिक शिक्षा से लेकर आज की स्मार्ट कक्षा और एआई आधारित पढ़ाई तक शिक्षक की भूमिका लगातार बदली है। तकनीक ने पढ़ाने के तरीके आसान किए हैं, लेकिन शिक्षक का मार्गदर्शन, प्रेरणा, अनुशासन और विद्यार्थियों को समझने की भूमिका आज भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।
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गुरुकुल से AI तक कितना बदला पढ़ाने का तरीका?
- फोटो : AI Generated
विस्तार
कभी शिक्षा का मतलब गुरु के पास बैठकर जीवन जीने का तरीका सीखना था। फिर समय बदला तो पाठशालाएं आईं, किताबें आईं और पढ़ाई के साथ परीक्षा का चलन बढ़ा। ब्लैकबोर्ड और चॉक ने कक्षा को नया रूप दिया तो आगे चलकर प्रोजेक्टर और स्मार्ट बोर्ड ने शिक्षक के पढ़ाने का तरीका बदल दिया। फिर इंटरनेट आया और कक्षा की दीवारें भी छोटी पड़ गईं। अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई विद्यार्थियों के सवालों का जवाब देने, पाठ तैयार करने और पढ़ाई को व्यक्तिगत बनाने में मदद कर रही है। ऐसे समय में विश्व शिक्षक दिवस सिर्फ शिक्षकों को धन्यवाद देने का दिन नहीं है, बल्कि यह समझने का मौका भी है कि हजारों साल में शिक्षक की भूमिका कितनी बदल गई है और आने वाले समय में वह कैसी होगी।
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5 अक्तूबर को ही शिक्षक दिवस क्यों मनाया जाता है?
विश्व शिक्षक दिवस कल यानी हर साल 5 अक्तूबर को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1994 में हुई थी। यह दिन 5 अक्तूबर 1966 को अपनाई गई अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन और यूनेस्को की शिक्षकों की स्थिति से जुड़ी सिफारिश की याद में मनाया जाता है। इस सिफारिश में शिक्षकों के अधिकार, जिम्मेदारियां, प्रशिक्षण, नियुक्ति, रोजगार और पढ़ाने-सीखने की परिस्थितियों से जुड़े मानक तय किए गए थे। यानी यह दिन केवल शिक्षक के सम्मान का अवसर नहीं है, बल्कि शिक्षक पेशे की स्थिति और उसकी जरूरतों पर चर्चा करने का भी दिन है। वर्ष 2026 में इस सिफारिश को अपनाए जाने के 60 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस बार भी दुनिया भर में शिक्षकों की भूमिका, उनकी चुनौतियों और बेहतर कार्य परिस्थितियों पर चर्चा हो रही है।
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गुरुकुल में पढ़ाई का तरीका कैसा था?
भारत की प्राचीन शिक्षा व्यवस्था में गुरुकुल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विद्यार्थी गुरु के आश्रम में रहकर शिक्षा प्राप्त करते थे। पढ़ाई केवल किताब या किसी एक विषय तक सीमित नहीं मानी जाती थी। विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ व्यवहार, अनुशासन, जिम्मेदारी और जीवन से जुड़े काम भी सिखाए जाते थे। गुरु और शिष्य के बीच व्यक्तिगत संबंध शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा था। विद्यार्थी गुरु के साथ रहकर सीखते थे और शिक्षा का तरीका भी काफी हद तक प्रत्यक्ष अनुभव, अभ्यास, बातचीत और अनुशासन पर आधारित था। हालांकि प्राचीन भारत में शिक्षा की सभी व्यवस्थाएं एक जैसी नहीं थीं और अलग-अलग समय तथा क्षेत्रों में इनके स्वरूप में अंतर रहा। फिर भी गुरु-शिष्य परंपरा ने भारतीय शिक्षा की ऐतिहासिक समझ में महत्वपूर्ण स्थान बनाया।
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