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पश्चिम बंगाल बीएड एडमिशन 2026-28: कहीं आपका कॉलेज भी तो नहीं इस लिस्ट में? 393 को मंजूरी, 205 पर सरकार की रोक
Fri, 06 Nov 2026 04:05 PM IST
शिवम तिवारी
कोलकाता पीटीआई
कोलकाता पीटीआई
Published by: शिवम तिवारी
Updated Fri, 06 Nov 2026 04:05 PM IST
सार
West Bengal BEd Admission 2026-28: पश्चिम बंगाल सरकार ने 2026-28 सत्र में दाखिले के लिए 393 निजी बीएड कॉलेजों को मंजूरी दी है। वहीं, 205 कॉलेजों को जरूरी सुविधाएं और ढांचा बेहतर करने तक दाखिले लेने से रोक दिया गया है। राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि कॉलेजों की जांच पढ़ाई और बुनियादी सुविधाओं का स्तर सुधारने के लिए की गई थी। यह कदम छात्रों के हित में है।
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West Bengal
- फोटो : AI Generated
विस्तार
पश्चिम बंगाल सरकार ने 2026-28 शैक्षणिक सत्र के लिए 393 निजी बीएड कॉलेजों को छात्रों के दाखिले लेने की मंजूरी दे दी है। वहीं, राज्य के 205 निजी बीएड कॉलेजों को जरूरी सुविधाएं और अपना ढांचा बेहतर करने तक दाखिले की प्रक्रिया से बाहर रखा गया है। शुक्रवार, 6 नवंबर को राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि सरकार ने राज्य के बीएड, आईटीआई, फार्मेसी और पॉलिटेक्निक संस्थानों की जांच कराई थी। इसका मकसद इन संस्थानों में पढ़ाई और जरूरी सुविधाओं का स्तर सुधारना है।
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पहले और दूसरे चरण में कितनों को मंजूरी मिली?
उच्च शिक्षा मंत्री के मुताबिक, मंजूरी पाने वाले 393 बीएड कॉलेजों में से 156 को पहले चरण में अनुमति दी गई थी। इसके बाद दूसरे चरण में 237 और कॉलेजों को दाखिले शुरू करने की मंजूरी मिली। दरअसल, अगस्त में राज्य के 601 निजी बीएड कॉलेजों में से केवल 150 को दाखिले की अनुमति दी गई थी। बाकी 451 कॉलेजों को जरूरी सुविधाओं की कमी के कारण नोटिस जारी किए गए थे और उनके दाखिले रोक दिए गए थे। इसके बाद 442 कॉलेजों ने सरकार को लिखित भरोसा दिया कि वे तय नियमों का पालन कर रहे हैं।
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205 कॉलेजों पर क्यों लगी रोक?
- मंत्री ने बताया कि 442 कॉलेजों ने जरूरी सुविधाएं पूरी होने का दावा करते हुए सरकार से दोबारा अनुमति मांगी थी, जबकि नौ कॉलेजों ने इस बारे में कोई जवाब नहीं दिया।
- इसके बाद 4 नवंबर तक दोबारा जांच की रिपोर्ट सौंपी गई।
- जांच में 237 कॉलेज तय नियमों पर खरे उतरे और उन्हें 2026-28 सत्र में दाखिले की अनुमति मिली।
- वहीं, बाकी 205 कॉलेजों में जरूरी सुविधाओं की कमी पाई गई।
- इसी वजह से इन संस्थानों की 2027-28 शैक्षणिक सत्र की दाखिला प्रक्रिया पर रोक लगाने का फैसला लिया गया।
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